अमेरिकी शेयर बाजार में शुक्रवार को भारी उथल-पुथल देखी गई, जहां नैस्डैक और एसएंडपी 500 जैसे प्रमुख सूचकांकों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इंटेल के शेयरों में 28 प्रतिशत की भारी कमी आने से बाजार को 1.8 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है। निवेशकों के बीच अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षेत्र में किए गए भारी निवेश के भविष्य को लेकर डर का माहौल है और बाजार के जानकारों को एक बड़े संकट की आशंका सता रही है।

अमेरिकी सूचकांकों में दर्ज की गई बड़ी गिरावट
अमेरिकी शेयर बाजार में देर रात हुई भारी गिरावट ने पूरी दुनिया के वित्तीय जगत को हिलाकर रख दिया है। इस गिरावट के कारण निवेशकों की एक बड़ी राशि, जो लगभग 1.8 ट्रिलियन डॉलर आंकी गई है, देखते ही देखते साफ हो गई। बाजार के प्रमुख सूचकांकों में शामिल नैस्डैक कंपोजिट में 5 जून के बाद से प्रतिशत के लिहाज से यह एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। शुक्रवार को जब बाजार बंद हुआ, तो नैस्डैक 2.86 प्रतिशत की गिरावट के साथ 25,437 के स्तर पर आ गया था। इस गिरावट का मुख्य कारण तकनीकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों के खराब प्रदर्शन को माना जा रहा है, जिसने निवेशकों के बीच डर पैदा कर दिया है।
केवल नैस्डैक ही नहीं, बल्कि एसएंडपी 500 सूचकांक में भी बड़ी गिरावट देखी गई। यह सूचकांक 2.06 प्रतिशत गिरकर 7,581 के स्तर पर बंद हुआ। इसके साथ ही डाओ जेंस इंडस्ट्रियल एवरेज में भी 1.09 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो अंकों के हिसाब से 572 अंकों की कमी को दर्शाता है। इस गिरावट के बाद डाओ जेंस 51,770 के स्तर पर पहुंच गया है। बाजार में आई इस अचानक गिरावट ने उन निवेशकों को बड़ा झटका दिया है जो तकनीकी शेयरों में तेजी की उम्मीद लगाए बैठे थे। बाजार के आंकड़ों से पता चलता है कि यह गिरावट व्यापक थी और इसने लगभग सभी प्रमुख क्षेत्रों को प्रभावित किया है।
इंटेल और तकनीकी कंपनियों के शेयरों का हाल
इस पूरी गिरावट के केंद्र में दिग्गज चिप निर्माता कंपनी इंटेल रही। इंटेल के शेयरों में शुक्रवार को 28 प्रतिशत की ऐतिहासिक गिरावट देखी गई। इतनी बड़ी गिरावट ने न केवल इंटेल के निवेशकों को नुकसान पहुंचाया, बल्कि पूरे तकनीकी क्षेत्र के सेंटिमेंट को भी बिगाड़ दिया। इंटेल के साथ-साथ अन्य बड़ी तकनीकी कंपनियों जैसे एनवीडिया, एएमडी, डेल और एचपी के शेयरों में भी भारी बिकवाली देखी गई। इन कंपनियों के शेयरों में आई गिरावट ने बाजार के कुल पूंजीकरण को काफी कम कर दिया है।
बाजार में इस गिरावट की एक बड़ी वजह इंटेल और एमेजन के खराब तिमाही नतीजे रहे हैं। जैसे ही इन कंपनियों के वित्तीय नतीजे सामने आए, निवेशकों ने तेजी से मुनाफावसूली शुरू कर दी। विशेष रूप से इंटेल के प्रदर्शन ने बाजार को निराश किया, जिससे निवेशकों का भरोसा डगमगा गया। तकनीकी क्षेत्र की इन कंपनियों में आई गिरावट का सीधा असर नैस्डैक सूचकांक पर पड़ा, क्योंकि यह सूचकांक मुख्य रूप से तकनीकी कंपनियों के प्रदर्शन पर आधारित है। निवेशकों को अब यह डर सता रहा है कि क्या अन्य तकनीकी कंपनियां भी आने वाले समय में इसी तरह के परिणाम पेश करेंगी।
चीनी बाजार के संकट के साथ तुलनात्मक अध्ययन
अमेरिकी बाजार में आई यह गिरावट कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि इससे पहले चीनी बाजारों में भी इसी तरह का पैटर्न देखा जा चुका है। पिछले कुछ महीनों से चीनी बाजार में एआई निवेश वाली कंपनियों के शेयरों में लगातार गिरावट जारी है। शंघाई स्टॉक एक्सचेंज के टेक्नोलॉजी इंडेक्स, जिसे स्टार 50 के नाम से जाना जाता है, उसमें चार महीने से भी कम समय में लगभग 40 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। इस गिरावट के कारण चीनी बाजार में लगभग 3.5 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है।
चीन में भी गिरावट की मुख्य वजह एआई और सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में आई कमजोरी रही है। वहां भी निवेशकों ने एआई क्षेत्र में किए जा रहे भारी निवेश पर मिलने वाले रिटर्न को लेकर चिंता जताई है। अब ठीक वैसा ही परिदृश्य अमेरिकी शेयर बाजार में भी बनता दिख रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका में भी एआई का बुलबुला अब फूटने की कगार पर है, जैसा कि चीन में देखा गया था। दोनों देशों के बाजारों में तकनीकी शेयरों के प्रति निवेशकों का बदलता नजरिया वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक चिंता का विषय बन गया है।
एआई निवेश पर रिटर्न को लेकर उठते सवाल
बाजार में आई इस गिरावट ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के भविष्य पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं। पिछले कुछ समय से कंपनियां एआई तकनीक को विकसित करने के लिए अरबों डॉलर का निवेश कर रही हैं। हालांकि, अब निवेशक यह पूछ रहे हैं कि इस भारी निवेश से उन्हें लाभ कब मिलना शुरू होगा। क्या एआई में निवेश करने का यह तरीका सही है और क्या भविष्य में यह तकनीक वास्तव में मुनाफा कमा कर देगी? इन सवालों के स्पष्ट जवाब अभी तक नहीं मिल पाए हैं।
हालिया तिमाही आंकड़े भी एआई के पक्ष में नहीं दिख रहे हैं, जिससे निवेशकों की निराशा और बढ़ गई है। इंटेल और एमेजन जैसी कंपनियों के नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि एआई पर किए गए भारी खर्च का तत्काल लाभ नहीं मिल रहा है। इसी सेंटिमेंट की वजह से शुक्रवार को अमेरिकी बाजार में तेज मुनाफावसूली हुई। निवेशकों को अब लगने लगा है कि एआई के नाम पर जो तेजी बाजार में देखी जा रही थी, वह केवल एक बुलबुला हो सकता है जो अब फटने लगा है।
वैश्विक बाजारों पर सोमवार को होने वाला असर
अमेरिकी बाजार में शुक्रवार को हुई इस भारी तबाही का असर अब सोमवार, 3 नवंबर को दुनिया भर के अन्य शेयर बाजारों पर दिखने की संभावना है। विशेष रूप से एशियाई बाजारों में बड़ी गिरावट की आशंका जताई जा रही है। दक्षिण कोरिया और ताइवान के शेयर बाजारों पर इसका सबसे अधिक प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि इन देशों के बाजारों में हालिया तेजी का मुख्य आधार टेक्नोलॉजी स्टॉक्स ही रहे हैं।
ताइवान और दक्षिण कोरिया की कई कंपनियां वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उनका सीधा संबंध अमेरिकी तकनीकी कंपनियों से है। अमेरिकी बाजार में तकनीकी शेयरों के गिरने से इन देशों की कंपनियों के शेयरों पर भी दबाव बढ़ेगा। वैश्विक निवेशक अब सोमवार के कारोबारी सत्र को लेकर काफी सतर्क हैं। बाजार के जानकारों का कहना है कि अगर अमेरिकी बाजार में गिरावट का यह दौर जारी रहता है, तो इसका असर लंबे समय तक वैश्विक वित्तीय बाजारों पर बना रह सकता है।
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स्रोत: Aaj Tak





