महाभारत दुनिया के सबसे लंबे महाकाव्यों में गिना जाता है। परंपरा के अनुसार इसकी रचना महर्षि वेदव्यास ने की और भगवान गणेश ने इसे लिखा। इसमें कौरवों और पांडवों की कथा के साथ धर्म, राजनीति, नीति और जीवन के कई गहरे सवालों पर चर्चा है। भगवद्गीता भी महाभारत का ही हिस्सा है। यह ग्रंथ 18 पर्वों में बंटा है। जानिए हर पर्व में क्या है।
पहले छह पर्व
- आदि पर्व: कुरु वंश की उत्पत्ति, भीष्म की प्रतिज्ञा, पांडवों और कौरवों का जन्म, लाक्षागृह और द्रौपदी स्वयंवर
- सभा पर्व: इंद्रप्रस्थ में मय सभा, राजसूय यज्ञ, द्यूत क्रीड़ा और द्रौपदी का अपमान
- वन पर्व: पांडवों का बारह वर्ष का वनवास, यक्ष प्रश्न और नल-दमयंती व सावित्री-सत्यवान जैसी उपकथाएं
- विराट पर्व: विराट नगर में पांडवों का एक वर्ष का अज्ञातवास
- उद्योग पर्व: युद्ध टालने की कोशिशें, श्रीकृष्ण का शांति दूत बनकर हस्तिनापुर जाना और युद्ध की तैयारी
- भीष्म पर्व: कुरुक्षेत्र युद्ध की शुरुआत, अर्जुन को श्रीकृष्ण का गीता उपदेश और भीष्म का शरशय्या पर गिरना

युद्ध से जुड़े पर्व
- द्रोण पर्व: द्रोणाचार्य का सेनापति बनना, चक्रव्यूह में अभिमन्यु का वध और द्रोण का अंत
- कर्ण पर्व: कर्ण का सेनापति बनना और अर्जुन के साथ युद्ध में उसका अंत
- शल्य पर्व: शल्य का सेनापति बनना, युद्ध का अंतिम दिन और भीम-दुर्योधन का गदा युद्ध
- सौप्तिक पर्व: अश्वत्थामा का रात में सोते हुए पांडव पुत्रों पर हमला
कुरुक्षेत्र का युद्ध 18 दिन तक चला। यह संख्या भी महाभारत के 18 पर्वों की तरह खास मानी जाती है।
युद्ध के बाद के पर्व
- स्त्री पर्व: युद्ध में मारे गए योद्धाओं के परिवारों का शोक और गांधारी का विलाप
- शांति पर्व: युधिष्ठिर का राज्याभिषेक और शरशय्या पर लेटे भीष्म का राजधर्म पर उपदेश
- अनुशासन पर्व: भीष्म के धर्म और नीति से जुड़े उपदेश और उनका देह त्याग
- आश्वमेधिक पर्व: युधिष्ठिर का अश्वमेध यज्ञ
- आश्रमवासिक पर्व: धृतराष्ट्र, गांधारी, कुंती और विदुर का वन जाना
- मौसल पर्व: यदुवंश का अंत और श्रीकृष्ण का देह त्याग
- महाप्रस्थानिक पर्व: पांडवों और द्रौपदी की हिमालय की अंतिम यात्रा
- स्वर्गारोहण पर्व: युधिष्ठिर का स्वर्ग पहुंचना और कथा का समापन
यह भी पढ़ें: भगवद्गीता के उपदेश: कर्म, समत्व और कर्तव्य पर श्रीकृष्ण के प्रमुख श्लोक और उनके अर्थ | चार वेद: ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद क्या हैं, इनकी संरचना और महत्व
महाभारत से जुड़े अहम तथ्य
परंपरा में महाभारत को “शतसाहस्री संहिता” कहा गया है, यानी लगभग एक लाख श्लोकों वाला ग्रंथ। हरिवंश को महाभारत का परिशिष्ट माना जाता है, जिसमें श्रीकृष्ण के वंश और जीवन की कथा है। पुणे के भंडारकर ओरिएंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट ने देश भर की पांडुलिपियों का मिलान करके महाभारत का आलोचनात्मक संस्करण तैयार किया, जिसे विद्वान अहम संदर्भ मानते हैं।
महाभारत की सीख
महाभारत केवल युद्ध की कथा नहीं है। इसमें सत्ता के लालच, अपमान के बदले, मित्रता, त्याग और कर्तव्य के बीच टकराव को बहुत बारीकी से दिखाया गया है। विदुर नीति, यक्ष प्रश्न और भीष्म के उपदेश जैसे हिस्से आज भी नैतिक शिक्षा के लिए पढ़े जाते हैं। ग्रंथ का एक प्रसिद्ध कथन है कि जो यहां है वह कहीं और भी मिल सकता है, पर जो यहां नहीं है वह कहीं नहीं है। यही कारण है कि सदियों से कलाकार, लेखक और विचारक महाभारत से प्रेरणा लेते रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
भगवद्गीता महाभारत के किस पर्व में है?
भगवद्गीता भीष्म पर्व का हिस्सा है।
स्रोत: भंडारकर ओरिएंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट (BORI), पुणे। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।





