वेद भारत के सबसे प्राचीन ग्रंथ माने जाते हैं। “वेद” शब्द संस्कृत की “विद्” धातु से बना है, जिसका अर्थ है जानना। यानी वेद ज्ञान के ग्रंथ हैं। हजारों साल तक इन्हें गुरु से शिष्य तक मौखिक रूप से पहुंचाया गया, इसलिए इन्हें श्रुति भी कहा जाता है। यूनेस्को ने वैदिक पाठ की परंपरा को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में शामिल किया है। जानिए चार वेद कौन से हैं।
वेदों की संरचना
हर वेद के चार मुख्य हिस्से माने जाते हैं। संहिता में मंत्र और स्तुतियां हैं। ब्राह्मण ग्रंथों में यज्ञ और कर्मकांड की व्याख्या है। आरण्यक ग्रंथ वन में रहकर किए जाने वाले चिंतन से जुड़े हैं। उपनिषद वेदों का दार्शनिक हिस्सा हैं, जिनमें आत्मा, ब्रह्म और ज्ञान पर विचार है। उपनिषदों को वेदों का अंतिम भाग होने के कारण वेदांत भी कहा जाता है।

ऋग्वेद
ऋग्वेद को चारों वेदों में सबसे प्राचीन माना जाता है। यह 10 मंडलों में बंटा है और इसमें अग्नि, इंद्र, वरुण, सोम जैसे देवताओं की स्तुति में रचे गए सूक्त हैं। प्रसिद्ध गायत्री मंत्र ऋग्वेद के तीसरे मंडल में है। ऋग्वेद से उस समय के समाज, खेती, पशुपालन और प्रकृति के प्रति सम्मान की झलक भी मिलती है। इतिहासकार इसे भारत के प्राचीन इतिहास को समझने का अहम स्रोत मानते हैं।
यजुर्वेद
यजुर्वेद में यज्ञ के समय बोले जाने वाले मंत्र और उनकी विधि दी गई है। इसमें गद्य और पद्य, दोनों रूप मिलते हैं। यजुर्वेद की दो प्रमुख शाखाएं हैं: शुक्ल यजुर्वेद और कृष्ण यजुर्वेद। ईशावास्य उपनिषद शुक्ल यजुर्वेद से जुड़ा है, जिसकी शुरुआत “ईशावास्यमिदं सर्वं” से होती है।
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सामवेद
सामवेद को संगीत का वेद कहा जाता है। इसके ज्यादातर मंत्र ऋग्वेद से लिए गए हैं, लेकिन उन्हें गाने की विशेष विधि के साथ रखा गया है। भारतीय शास्त्रीय संगीत की जड़ें सामवेद की गायन परंपरा में देखी जाती हैं। छांदोग्य उपनिषद सामवेद से जुड़ा है।
अथर्ववेद
अथर्ववेद में रोजमर्रा के जीवन, स्वास्थ्य, जड़ी-बूटियों, घर-परिवार और समाज से जुड़े मंत्र हैं। इसमें रोगों से बचाव और औषधियों का भी जिक्र मिलता है, इसलिए इसे आयुर्वेद की परंपरा से जोड़ा जाता है। मुंडक और मांडूक्य उपनिषद अथर्ववेद से जुड़े हैं। राष्ट्रीय चिह्न पर लिखा “सत्यमेव जयते” मुंडक उपनिषद से लिया गया है।
वैदिक पाठ की परंपरा
वेदों को सही उच्चारण और स्वर के साथ याद रखने के लिए पाठ की कई विधियां बनाई गईं, जैसे पद पाठ, क्रम पाठ, जटा पाठ और घन पाठ। इनसे एक भी अक्षर बदले बिना सदियों तक मंत्र सुरक्षित रहे। यूनेस्को ने इसी अनोखी मौखिक परंपरा को अपनी सूची में मान्यता दी है। आज भी देश के कई गुरुकुलों और वेद पाठशालाओं में यह परंपरा जीवित है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सबसे पुराना वेद कौन सा है?
ऋग्वेद को सबसे पुराना वेद माना जाता है।
गायत्री मंत्र किस वेद में है?
गायत्री मंत्र ऋग्वेद के तीसरे मंडल में है।
स्रोत: यूनेस्को: Tradition of Vedic chanting। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।





