विजयादशमी पर रावण दहन के अलावा कई घरों में शमी वृक्ष और देवी अपराजिता की पूजा की परंपरा भी है। खासकर महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान और उत्तर भारत के कई हिस्सों में यह परंपरा प्रचलित है। दशहरा 2026 मंगलवार, 20 अक्टूबर को है। जानिए शमी पूजा और अपराजिता पूजा का महत्व और सामान्य विधि।
शमी वृक्ष का महत्व
शमी एक कांटेदार पेड़ है, जो सूखे इलाकों में भी आसानी से उग जाता है। धार्मिक परंपरा में इसे शुभ और विजय दिलाने वाला माना गया है। कई लोग इसे शनि से भी जोड़ते हैं और घर में शमी का पौधा लगाते हैं। विजयादशमी पर शमी की पूजा करके उसकी पत्तियां घर लाने की परंपरा कई क्षेत्रों में है।

महाभारत की कथा
महाभारत के अनुसार पांडवों ने बारह साल के वनवास के बाद एक साल का अज्ञातवास राजा विराट के राज्य में बिताया। उस दौरान अपनी पहचान छिपाने के लिए उन्होंने अपने अस्त्र-शस्त्र एक शमी वृक्ष पर छिपा दिए थे। अज्ञातवास पूरा होने पर अर्जुन ने शमी वृक्ष से अपना गांडीव धनुष निकाला और कौरव सेना का सामना किया। इसी कथा के कारण शमी को विजय और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है।
शमी पूजा की सामान्य विधि
- शमी वृक्ष या पौधे के पास साफ जगह पर दीपक जलाएं
- जल, रोली, अक्षत और फूल अर्पित करें
- वृक्ष की परिक्रमा करें और परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें
- परंपरा के अनुसार कुछ पत्तियां सम्मान से तोड़कर घर लाएं, पेड़ को नुकसान न पहुंचाएं
- इन पत्तियों को पूजा स्थान या तिजोरी में रखने की परंपरा भी कई घरों में है
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सोना बांटने की परंपरा
महाराष्ट्र में दशहरे पर आपटा या शमी की पत्तियों को “सोना” कहकर रिश्तेदारों और मित्रों को दिया जाता है और बड़ों से आशीर्वाद लिया जाता है। इसके पीछे भाव यह है कि खुशहाली और समृद्धि सबके साथ बांटी जाए। ध्यान रखें कि पेड़ों से बहुत ज्यादा पत्तियां तोड़ना पर्यावरण के लिए ठीक नहीं, इसलिए जरूरत भर ही पत्तियां लें।
अपराजिता पूजा
अपराजिता का अर्थ है जिसे कोई हरा न सके। विजयादशमी पर देवी अपराजिता की पूजा की परंपरा पुराने ग्रंथों और लोक परंपराओं में मिलती है। कई परिवार घर के पूजा स्थान या उत्तर-पूर्व दिशा में साफ जगह पर अष्टदल यानी आठ पंखुड़ियों वाला चित्र बनाकर देवी का ध्यान करते हैं और विजय व रक्षा की प्रार्थना करते हैं। अपराजिता के नीले फूल भी पूजा में चढ़ाए जाते हैं।
मुहूर्त के बारे में
शमी और अपराजिता पूजा आम तौर पर दशमी तिथि में दोपहर बाद के समय में की जाती है। लेकिन सटीक समय हर शहर में अलग होता है। इसलिए अपने शहर के पंचांग, मंदिर या पंडित से समय की पुष्टि करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शमी का पौधा न हो तो क्या करें?
आप मंदिर या आसपास के किसी शमी वृक्ष पर पूजा कर सकते हैं, या घर में भगवान का ध्यान करके प्रार्थना कर सकते हैं।
स्रोत: भारत सरकार, संसदीय कार्य मंत्रालय: 2026 अवकाश कैलेंडर, Tirth: Hindu Festivals 2026। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।





