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QR कोड स्कैम से कैसे बचें: पैसे लेने के लिए स्कैन की जरूरत नहीं, ठगी के तरीके और सावधानियां

QR कोड कैसे काम करता है, पैसे लेने के नाम पर QR स्कैम, दुकानों पर QR बदलने की ठगी, नकली वेबसाइट वाले QR, बचाव के उपाय और शिकायत कहां करें।

QR कोड स्कैम से बचाव के तरीके बताने वाला ग्राफिक
ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • आज चाय की दुकान से लेकर बड़े शोरूम तक, हर जगह QR कोड स्कैन करके भुगतान होता है।
  • QR कोड एक तरह का चौकोर बारकोड है, जिसमें जानकारी छिपी होती है।
  • पुराना सामान ऑनलाइन बेचते समय अगर खरीदार बिना सामान देखे बहुत जल्दी पैसे भेजने की बात करे, खुद को सेना या किसी बड़े विभाग का बताए और QR भेजे, तो सतर्क हो जाएं।
  • पैसे कटते ही तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

आज चाय की दुकान से लेकर बड़े शोरूम तक, हर जगह QR कोड स्कैन करके भुगतान होता है। यह तरीका तेज और आसान है, लेकिन ठगों ने इसे भी धोखाधड़ी का जरिया बना लिया है। कोई सामान खरीदने का बहाना बनाकर QR भेजता है, तो कोई दुकान का असली QR बदलकर अपना लगा देता है। जानिए QR कोड स्कैम कैसे होते हैं और इनसे कैसे बचें।

QR कोड क्या करता है

QR कोड एक तरह का चौकोर बारकोड है, जिसमें जानकारी छिपी होती है। भुगतान वाले QR में आम तौर पर पैसे पाने वाले का UPI पता होता है। स्कैन करने पर आपका ऐप उस व्यक्ति को पैसे भेजने की स्क्रीन खोलता है। कुछ QR कोड किसी वेबसाइट, ऐप डाउनलोड या वाई-फाई से जोड़ने का काम भी करते हैं। सबसे जरूरी बात यह है कि QR स्कैन करना आम तौर पर पैसे भेजने के लिए होता है, पैसे पाने के लिए नहीं।

मुख्य बातें: QR कोड स्कैम से बचाव के तरीके बताने वाला ग्राफिक
ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

QR कोड स्कैम के आम तरीके

  • ऑनलाइन पुराना सामान बेचने पर नकली खरीदार कहता है कि पैसे भेजने के लिए यह QR स्कैन करें और PIN डालें, जबकि असल में पैसा आपके खाते से कटता है
  • दुकान या पेट्रोल पंप पर लगे असली QR के ऊपर ठग अपना QR चिपका देते हैं
  • पार्किंग, बिजली बिल या इनाम के नाम पर QR भेजकर नकली वेबसाइट खोलवाई जाती है, जहां बैंक की जानकारी मांगी जाती है
  • QR के जरिए अनजान ऐप डाउनलोड करवाया जाता है, जो फोन में मालवेयर डाल सकता है
  • सोशल मीडिया पर “कैशबैक” या “लॉटरी” पाने के लिए QR स्कैन करने को कहा जाता है

बचाव के उपाय

  • याद रखें कि पैसे लेने के लिए कभी QR स्कैन करने या UPI PIN डालने की जरूरत नहीं होती
  • स्कैन करने के बाद भुगतान से पहले स्क्रीन पर दिख रहा नाम जरूर जांचें, नाम दुकान या व्यक्ति से मेल न खाए तो रुक जाएं
  • रकम खुद ध्यान से डालें और भुगतान के बाद दुकानदार से पुष्टि करें
  • QR से कोई वेबसाइट खुले, तो उसका पता ध्यान से देखें और वहां बैंक की जानकारी, OTP या PIN न डालें
  • अनजान QR से ऐप डाउनलोड न करें, ऐप सिर्फ आधिकारिक ऐप स्टोर से लें
  • दुकानदार अपने QR स्टिकर की समय-समय पर जांच करें और भुगतान की आवाज वाले साउंड बॉक्स या ऐप नोटिफिकेशन पर ध्यान दें

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ऑनलाइन बिक्री करते समय सावधानी

पुराना सामान ऑनलाइन बेचते समय अगर खरीदार बिना सामान देखे बहुत जल्दी पैसे भेजने की बात करे, खुद को सेना या किसी बड़े विभाग का बताए और QR भेजे, तो सतर्क हो जाएं। सामान बेचने वाले को पैसे पाने के लिए सिर्फ अपना UPI पता या QR देना होता है, किसी का QR स्कैन नहीं करना होता।

ठगी हो जाए तो क्या करें

पैसे कटते ही तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। अपने बैंक को भी तुरंत सूचना दें। लेनदेन का स्क्रीनशॉट, UPI रेफरेंस नंबर और ठग के नंबर या प्रोफाइल की जानकारी संभालकर रखें। जितनी जल्दी शिकायत होगी, पैसे रोके जाने की संभावना उतनी बढ़ती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या हर QR कोड खतरनाक है?

नहीं, भरोसेमंद दुकानों पर QR से भुगतान सुरक्षित है। बस स्कैन के बाद नाम और रकम की जांच की आदत डालें।

स्रोत: राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल, गृह मंत्रालय, भारतीय रिज़र्व बैंक। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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