Lakhpati Didi Yojana: देश के ग्रामीण अंचलों में सामाजिक और आर्थिक क्रांति का सूत्रपात करने वाली केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘लखपति दीदी योजना’ अब एक नए और विशाल संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है। ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा संचालित दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को प्रतिवर्ष न्यूनतम एक लाख रुपये की संवहनीय और नियमित आय सुनिश्चित कराने के लिए अब छह करोड़ का ऐतिहासिक लक्ष्य तय किया गया है। प्रारंभिक चरण में निर्धारित तीन करोड़ का लक्ष्य समय से काफी पहले पूरा कर लिया गया था और वर्तमान में साढ़े तीन करोड़ से अधिक ग्रामीण महिलाएं इस प्रतिष्ठित आय वर्ग में सफलतापूर्वक प्रवेश कर चुकी हैं। इसी अभूतपूर्व सफलता को आधार बनाकर प्रधानमंत्री के विजन के अनुरूप इस लक्ष्य को दोगुना करते हुए छह करोड़ लखपति दीदी तैयार करने की विस्तृत राष्ट्रीय कार्ययोजना पर काम शुरू कर दिया गया है। यह पहल केवल आंकड़ों की उपलब्धि नहीं है, बल्कि देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्वावलंबन और महिला नेतृत्व के एक नए युग में ले जाने का दृढ़ संकल्प है।
Lakhpati Didi Yojana: योजना का मुख्य ध्येय और छह करोड़ का नया राष्ट्रीय संकल्प
लखपति दीदी पहल का प्राथमिक उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को केवल निर्वाह स्तर की आजीविका से बाहर निकालकर उन्हें आत्मनिर्भर उद्यमी और परिवार की मुख्य आर्थिक संबल बनाना है। इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक चिन्हित महिला को ऐसी बहुआयामी आजीविका गतिविधियों से जोड़ा जाता है जिससे उसकी शुद्ध वार्षिक आय कम से कम एक लाख रुपये या प्रतिमाह औसतन आठ हजार तीन सौ रुपये से अधिक स्थायी रूप से बनी रहे।
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने विभिन्न राज्यों के ग्रामीण आजीविका मिशनों के साथ समन्वय स्थापित कर क्लस्टर स्तर पर रणनीतियां तैयार की हैं। इस नए लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए संसाधनों का वैज्ञानिक आवंटन किया जा रहा है और पारंपरिक खेती पर निर्भरता को कम करते हुए मूल्य संवर्धन (Value Addition) पर जोर दिया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य है कि ग्रामीण महिलाएं परिवार के वित्तीय निर्णयों में बराबर की हिस्सेदार बनें, जिससे न केवल ग्रामीण उपभोग और मांग में वृद्धि होगी, बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा के स्तर में भी ऐतिहासिक सुधार दर्ज होगा।
स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने की सुगम प्रक्रिया और शुरुआती कदम
ग्रामीण महिलाओं के लिए इस आर्थिक उत्थान की यात्रा का पहला द्वार स्वयं सहायता समूह है। कोई भी ग्रामीण महिला अपने ग्राम पंचायत स्तर पर कार्यरत ग्राम संगठन (VO), क्लस्टर लेवल फेडरेशन (CLF) अथवा विकास खंड (ब्लॉक) मुख्यालय स्थित आजीविका मिशन कार्यालय में संपर्क करके आसानी से 10 से 15 महिलाओं के समूह का हिस्सा बन सकती है। यदि किसी गांव में नया समूह गठित करना हो, तो मिशन के सामुदायिक संसाधन व्यक्ति (CRPs) महिलाओं को संगठित करने और बैंक में बचत खाता खुलवाने में पूर्ण प्रशासनिक सहायता प्रदान करते हैं।
समूह का सदस्य बनने के पश्चात महिलाओं में नियमित बचत और आंतरिक ऋण लेन-देन की आदत विकसित की जाती है। कुछ महीनों के सफल संचालन के बाद समूह को रिवाल्विंग फंड (RF) और कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड (CIF) के रूप में प्रारंभिक वित्तीय संबल प्राप्त होता है। यह सामूहिक ढांचा महिलाओं को बिना किसी कोलैटरल या साहूकारों के चंगुल में फंसे अत्यंत सुगम तरीके से वित्तीय साधन जुटाने का आत्मविश्वास प्रदान करता है।
प्रशिक्षण, संस्थागत ऋण और ड्रोन दीदी जैसी आधुनिक तकनीकी पहल
लखपति दीदी योजना की वास्तविक शक्ति इसके त्रिसूत्रीय मॉडल—कौशल विकास प्रशिक्षण, संस्थागत बैंक क्रेडिट और आधुनिक तकनीक के समावेशन—में निहित है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने कृषि विज्ञान केंद्रों, ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थानों (RSETI) और विभिन्न कॉरपोरेट भागीदारों के सहयोग से महिलाओं को वैज्ञानिक खेती, उन्नत पशुपालन, डेयरी प्रबंधन, जैविक खाद निर्माण, खाद्य प्रसंस्करण और पैकेजिंग का व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया है।
इसके साथ ही केंद्र सरकार की ‘नमो ड्रोन दीदी’ जैसी दूरगामी पहल ने ग्रामीण महिलाओं को पारंपरिक सीमाओं से निकालकर आधुनिक कृषि तकनीक के केंद्र में स्थापित कर दिया है। महिलाओं को ड्रोन उड़ाने, उनकी मरम्मत करने और खेतों में तरल नैनो-यूरिया व कीटनाशकों के सटीक छिड़काव का 15 दिवसीय गहन प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह तकनीकी ज्ञान महिलाओं को प्रति सीजन हजारों रुपये की अतिरिक्त कमाई कराने में सक्षम बना रहा है। इसके अतिरिक्त, वाणिज्यिक बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के माध्यम से महिलाओं को प्राथमिक क्षेत्र उधारी के तहत अत्यंत रियायती ब्याज दरों पर व्यक्तिगत और सामूहिक उद्यम ऋण सुलभ कराए जा रहे हैं।
बाजार से सीधा संपर्क और डिजिटल ई-कॉमर्स का क्रांतिकारी विस्तार
उत्पाद निर्माण से लेकर उसके अंतिम विक्रय तक की मूल्य शृंखला को मजबूत करने के लिए सरकार ने त्रिस्तरीय विपणन तंत्र विकसित किया है। स्थानीय स्तर पर लगने वाले साप्ताहिक हाट-बाजारों, जिला स्तरीय सरस मेलों और राज्य स्तरीय प्रदर्शनियों के अतिरिक्त अब स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को सीधे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ा जा रहा है। सरकार के ई-मार्केटप्लेस (GeM Portal) पर ‘सारस कलेक्शन’ के माध्यम से सरकारी विभाग और मंत्रालय सीधे इन महिलाओं से स्टेशनरी, यूनिफॉर्म, हस्तशिल्प और खानपान के उत्पाद खरीद रहे हैं।
इसके साथ ही प्रमुख निजी ई-कॉमर्स कंपनियों और ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) के साथ साझेदारी करके ग्रामीण महिलाओं के हस्तनिर्मित आचार, मसाले, प्राकृतिक शहद, पारंपरिक हथकरघा और लकड़ी के खिलौनों को वैश्विक मंच उपलब्ध कराया गया है। इस सीधे बाजार संपर्क से बिचौलियों का कमीशन पूरी तरह समाप्त हो गया है और उत्पाद की वास्तविक बिक्री का अधिकतम लाभ सीधे महिला उत्पादकों के बैंक खातों में पहुंच रहा है।
Lakhpati Didi Yojana: ग्रामीण समाज में सम्मान, स्वावलंबन और दूरगामी आर्थिक बदलाव
लखपति दीदी योजना का प्रभाव केवल बैंक खातों की जमा-पूंजी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने ग्रामीण सामाजिक संरचना में महिलाओं की स्थिति को आमूलचूल रूप से बदल दिया है। जो महिलाएं पहले केवल घरेलू कामकाज या खेतों में अवैतनिक मजदूरी तक सीमित थीं, वे अब ‘बैंक सखी’, ‘कृषि सखी’, ‘पशु सखी’ और सफल व्यवसाय संचालक के रूप में समाज में नेतृत्वकारी भूमिका निभा रही हैं। जब एक महिला आर्थिक रूप से सशक्त होती है, तो उसका आत्मविश्वास बढ़ता है और समाज में उसके प्रति पारंपरिक दृष्टिकोण में सकारात्मक बदलाव आता है।
छह करोड़ लखपति दीदी बनाने का यह विस्तारित लक्ष्य विकसित भारत के निर्माण की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला साबित होने जा रहा है। देश के विभिन्न राज्यों के आजीविका मिशन कार्यालयों में नए पंजीकरण और क्षमता निर्माण के शिविर लगातार आयोजित किए जा रहे हैं। योग्य और इच्छुक ग्रामीण महिलाएं अपने निकटतम ग्राम सचिवालय या ब्लॉक कार्यालय में जाकर इस योजना का हिस्सा बन सकती हैं और सामूहिक शक्ति के बल पर अपनी आर्थिक स्वतंत्रता की एक नई कहानी लिख सकती हैं।
स्रोत: लखपति दीदी पोर्टल (ग्रामीण विकास मंत्रालय)
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