कुंभ मेला दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक समागमों में गिना जाता है। करोड़ों श्रद्धालु, साधु-संत और अखाड़े पवित्र नदियों में स्नान के लिए एक जगह जुटते हैं। यूनेस्को ने 2017 में कुंभ मेले को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल किया। जानिए कुंभ मेला कहां-कहां लगता है, इसका चक्र क्या है और इससे जुड़ी मान्यताएं क्या हैं।
कुंभ मेले के चार स्थान
कुंभ मेला देश के चार पवित्र स्थानों पर लगता है:
- प्रयागराज (उत्तर प्रदेश): गंगा, यमुना और अदृश्य मानी जाने वाली सरस्वती का संगम
- हरिद्वार (उत्तराखंड): गंगा नदी का तट
- उज्जैन (मध्य प्रदेश): क्षिप्रा नदी का तट
- नासिक (महाराष्ट्र): गोदावरी नदी का तट, जहां त्र्यंबकेश्वर में भी आयोजन होता है
हर स्थान पर मेला लगभग 12 साल में एक बार लगता है। इसकी तिथियां बृहस्पति, सूर्य और चंद्रमा की ज्योतिषीय स्थिति के आधार पर तय की जाती हैं।

समुद्र मंथन की कथा
कुंभ से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथा समुद्र मंथन की है। मान्यता है कि देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया, जिससे अमृत से भरा कलश यानी कुंभ निकला। अमृत को लेकर देवताओं और असुरों में संघर्ष हुआ और इस दौरान अमृत की कुछ बूंदें धरती पर चार जगह गिरीं। यही चार स्थान कुंभ मेले के तीर्थ माने जाते हैं। “कुंभ” शब्द का अर्थ ही घड़ा या कलश है।
अर्धकुंभ, पूर्ण कुंभ, महाकुंभ और सिंहस्थ
प्रयागराज और हरिद्वार में हर छह साल पर अर्धकुंभ लगता है, जबकि 12 साल पर पूर्ण कुंभ होता है। प्रयागराज में 12 पूर्ण कुंभ के बाद लगने वाले मेले को महाकुंभ कहा जाता है। प्रयागराज में पिछला महाकुंभ 2025 में लगा था। उज्जैन और नासिक के कुंभ को सिंहस्थ कहा जाता है, क्योंकि यह बृहस्पति के सिंह राशि में होने के समय लगता है।
यह भी पढ़ें: रामायण के सात कांड: बालकांड से उत्तरकांड तक हर कांड की कथा संक्षेप में | 12 ज्योतिर्लिंग: नाम, स्थान और महत्व, जानें किस राज्य में कौन सा ज्योतिर्लिंग है
अखाड़े और शाही स्नान
कुंभ मेले का बड़ा आकर्षण साधु-संतों के अखाड़े हैं। तय तिथियों पर अखाड़ों के संत भव्य जुलूस के साथ स्नान के लिए पहुंचते हैं, जिसे शाही स्नान या अमृत स्नान कहा जाता है। इन तिथियों पर सबसे ज्यादा भीड़ होती है। मेले में प्रवचन, कथा, भजन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन होता है। यूनेस्को ने इसे ज्ञान, परंपराओं और कौशल के गुरु-शिष्य परंपरा से आगे बढ़ने का उदाहरण माना है।
यात्रा से पहले ध्यान रखें
कुंभ में भारी भीड़ होती है, इसलिए यात्रा से पहले राज्य सरकार और मेला प्रशासन की आधिकारिक जानकारी, स्नान तिथियां और यातायात व्यवस्था देखें। बच्चों और बुजुर्गों के पास पहचान पत्र और संपर्क नंबर रखें। भीड़ में तय जगह पर मिलने की योजना बनाएं और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। नदी में तय घाटों पर ही स्नान करें और स्वच्छता बनाए रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कुंभ मेला कितने साल में लगता है?
हर स्थान पर पूर्ण कुंभ लगभग 12 साल में एक बार लगता है।
यूनेस्को ने कुंभ मेले को कब मान्यता दी?
2017 में।
स्रोत: यूनेस्को: Kumbh Mela, मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।





