सिगरेट, बीड़ी, गुटखा, खैनी या पान मसाला, तंबाकू किसी भी रूप में हो, सेहत के लिए नुकसानदेह है। कई लोग तंबाकू छोड़ना चाहते हैं, लेकिन बार-बार कोशिश के बाद भी आदत लौट आती है। इसकी वजह निकोटिन है, जो लत लगाता है। अच्छी बात यह है कि सही योजना और मदद से तंबाकू छोड़ा जा सकता है। जानिए तंबाकू कैसे छोड़ें।
तंबाकू कितना नुकसानदेह है
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार तंबाकू शरीर के लगभग हर अंग को नुकसान पहुंचाता है और कैंसर, दिल की बीमारी, स्ट्रोक और फेफड़ों की बीमारियों का कारण बनता है। WHO बताता है कि तंबाकू से हर साल दुनिया में 70 लाख से ज्यादा लोगों की मौत होती है, जिनमें दूसरों के धुएं के संपर्क में आने वाले लाखों लोग भी शामिल हैं। WHO साफ कहता है कि तंबाकू का कोई भी रूप सुरक्षित नहीं है। भारत में चबाने वाले तंबाकू से मुंह के कैंसर का खतरा भी बड़ी चिंता है।

छोड़ने की तैयारी कैसे करें
- अगले कुछ दिनों में छोड़ने की एक तारीख तय करें और उसे परिवार को बताएं
- लिखें कि आप तंबाकू क्यों छोड़ना चाहते हैं, जैसे सेहत, परिवार या पैसे की बचत
- पहचानें कि तलब कब लगती है, जैसे चाय के साथ, खाने के बाद या तनाव में
- तय तारीख से पहले घर, गाड़ी और ऑफिस से सिगरेट, गुटखा, लाइटर और ऐशट्रे हटा दें
तलब से कैसे निपटें
तंबाकू की तलब कुछ मिनटों तक तेज रहती है और फिर कम होने लगती है। उस समय पानी पिएं, सौंफ, इलायची या बिना चीनी की च्युइंग गम जैसी चीजें मुंह में रखें, गहरी सांस लें या थोड़ा टहल लें। जिन जगहों और लोगों के साथ आप तंबाकू लेते थे, शुरुआती दिनों में उनसे दूरी रखें। “बस एक बार” वाली सोच से बचें, क्योंकि अक्सर यहीं से आदत लौटती है।
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छोड़ने पर शरीर में क्या होता है
तंबाकू छोड़ने के बाद शुरुआती दिनों में चिड़चिड़ापन, बेचैनी, सिरदर्द, नींद में दिक्कत, भूख बढ़ना और ध्यान लगाने में परेशानी हो सकती है। ये निकोटिन छोड़ने के लक्षण हैं, जो आमतौर पर कुछ हफ्तों में कम हो जाते हैं। वहीं फायदे भी जल्दी दिखने लगते हैं, जैसे सांस फूलना कम होना, स्वाद और गंध बेहतर होना। लंबे समय में दिल की बीमारी, स्ट्रोक और कैंसर का खतरा कम होता है।
मदद कहां से लें
स्वास्थ्य मंत्रालय की राष्ट्रीय तंबाकू मुक्ति हेल्पलाइन 1800-11-2356 मुफ्त है, जहां प्रशिक्षित परामर्शदाता तंबाकू छोड़ने में मदद करते हैं। कई जिला अस्पतालों में राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के तहत तंबाकू मुक्ति केंद्र भी हैं। डॉक्टर जरूरत के हिसाब से निकोटिन रिप्लेसमेंट थेरेपी, जैसे निकोटिन गम या पैच, या दूसरी दवाएं बता सकते हैं। इन्हें डॉक्टर की सलाह से ही लें।
अगर फिर से शुरू हो जाए
कई लोग कुछ कोशिशों के बाद ही पूरी तरह तंबाकू छोड़ पाते हैं। एक बार फिसलने का मतलब हार नहीं है। सोचें कि किस वजह से दोबारा शुरू हुआ और अगली बार उस स्थिति के लिए पहले से योजना बनाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या धीरे-धीरे कम करना बेहतर है या एकदम छोड़ना?
दोनों तरीके अपनाए जाते हैं। तय तारीख पर पूरी तरह छोड़ना कई लोगों के लिए आसान रहता है। अपने लिए सही तरीका डॉक्टर या हेल्पलाइन परामर्शदाता से तय करें।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और किसी डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। कोई भी लक्षण होने या इलाज शुरू करने से पहले योग्य डॉक्टर से सलाह लें।
स्रोत: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO): Tobacco फैक्ट शीट, राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम, स्वास्थ्य मंत्रालय। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।






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