सर्दियों की शुरुआत और प्रदूषण बढ़ने के साथ कई लोगों में सांस फूलने और रात में खांसी की शिकायत बढ़ जाती है। अगर ऐसा बार-बार हो, तो यह अस्थमा यानी दमा हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार अस्थमा फेफड़ों की एक लंबी चलने वाली बीमारी है, जो बच्चों और बड़ों दोनों को प्रभावित करती है। इसमें सांस की नलियों में सूजन आ जाती है और वे सिकुड़ जाती हैं। जानिए अस्थमा के लक्षण और इसे नियंत्रित रखने के तरीके।
अस्थमा के लक्षण
WHO के अनुसार अस्थमा के आम लक्षण ये हैं:
- सांस फूलना या सांस लेने में तकलीफ
- सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज यानी घरघराहट
- खांसी, खासकर रात में या सुबह जल्दी
- सीने में जकड़न
लक्षण समय-समय पर आते-जाते हैं और कई बार कसरत, सर्दी-जुकाम या किसी ट्रिगर के संपर्क में आने पर बढ़ जाते हैं। कुछ लोगों में लक्षण हल्के होते हैं, तो कुछ में गंभीर अटैक भी हो सकता है।

आम ट्रिगर
अस्थमा के लक्षण बढ़ाने वाली चीजें हर व्यक्ति में अलग हो सकती हैं। WHO के अनुसार आम ट्रिगर इस प्रकार हैं:
- तंबाकू का धुआं, चाहे खुद पीएं या दूसरों का धुआं
- बाहर का वायु प्रदूषण और घर में लकड़ी, उपले या कोयले के चूल्हे का धुआं
- धूल, धूल के कण, फफूंद, पालतू जानवरों के बाल और परागकण
- सर्दी-जुकाम और सांस के संक्रमण
- ठंडी हवा, तेज गंध और कुछ लोगों में भारी कसरत
अपने ट्रिगर पहचानकर उनसे बचना अस्थमा नियंत्रण का अहम हिस्सा है। प्रदूषण ज्यादा होने वाले दिनों में बाहर की भारी गतिविधि कम करें और घर में साफ-सफाई रखें।
इनहेलर क्यों जरूरी है
WHO के अनुसार अस्थमा का इलाज आम तौर पर इनहेलर से होता है, जो दवा सीधे फेफड़ों तक पहुंचाता है। मोटे तौर पर दो तरह के इनहेलर होते हैं। एक, लक्षण तुरंत कम करने वाला रिलीवर। दूसरा, रोज लेने वाला कंट्रोलर, जो सांस की नलियों की सूजन कम करके अटैक से बचाता है। कई लोग इनहेलर को “आदत” या “आखिरी इलाज” समझकर डरते हैं, जबकि सही इलाज से ज्यादातर लोग सामान्य जिंदगी जी सकते हैं। कंट्रोलर दवा लक्षण न होने पर भी डॉक्टर के बताए अनुसार लेते रहें।
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इनहेलर का सही इस्तेमाल
इनहेलर की तकनीक सही न हो, तो दवा फेफड़ों तक नहीं पहुंचती। डॉक्टर या फार्मासिस्ट से अपनी तकनीक जांच करवाएं। कई लोगों, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए स्पेसर लगाने से दवा बेहतर पहुंचती है। स्टेरॉयड वाले इनहेलर के बाद कुल्ला करने की सलाह दी जाती है। इनहेलर की एक्सपायरी और बची खुराक पर नजर रखें।
अस्थमा अटैक में क्या करें
अगर सांस बहुत ज्यादा फूले, बोलने में दिक्कत हो, रिलीवर इनहेलर से आराम न मिले, या होंठ और नाखून नीले पड़ने लगें, तो यह गंभीर अटैक हो सकता है। तुरंत डॉक्टर के बताए अनुसार रिलीवर लें, सीधे बैठें और बिना देर किए 112 या 108 पर कॉल करके अस्पताल जाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या अस्थमा वाले बच्चे खेल सकते हैं?
हां, सही इलाज और डॉक्टर की सलाह से अस्थमा वाले बच्चे भी खेलकूद में हिस्सा ले सकते हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और किसी डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। कोई भी लक्षण होने या इलाज शुरू करने से पहले योग्य डॉक्टर से सलाह लें।
स्रोत: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO): Asthma fact sheet। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।





