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गन्ना FRP 2026-27: 365 रुपये प्रति क्विंटल, रिकवरी के हिसाब से कितना मिलेगा और 9.5% से कम पर क्या नियम

चीनी सीजन 2026-27 अक्टूबर से शुरू हो चुका है। जानिए गन्ना किसानों को मिलों से कम से कम कितना दाम मिलेगा।

खेत में गन्ने की फसल और किसान का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • गन्ना देश की सबसे अहम नकदी फसलों में से है और उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में लाखों किसान परिवार इस पर निर्भर हैं।
  • PIB के अनुसार 10.25 प्रतिशत से ऊपर हर 0.1 प्रतिशत रिकवरी बढ़ने पर 3.56 रुपये प्रति क्विंटल का प्रीमियम मिलेगा।
  • FRP कृषि लागत और मूल्य आयोग यानी CACP की सिफारिश पर तय होता है।
  • नियमों के तहत मिलों को गन्ना खरीद के तय समय के भीतर किसानों को भुगतान करना होता है।

गन्ना देश की सबसे अहम नकदी फसलों में से है और उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में लाखों किसान परिवार इस पर निर्भर हैं। चीनी सीजन 2026-27 एक अक्टूबर 2026 से शुरू हो चुका है और मिलों में पेराई का दौर शुरू होने लगा है। ऐसे में किसानों के लिए सबसे जरूरी सवाल है कि मिल उन्हें कम से कम कितना दाम देगी। इसका जवाब है FRP यानी उचित और लाभकारी मूल्य। इस लेख में जानिए गन्ना FRP 2026-27 का पूरा हिसाब।

FRP 2026-27 कितना है

पत्र सूचना कार्यालय यानी PIB की प्रेस रिलीज के अनुसार प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने चीनी सीजन 2026-27 के लिए गन्ने का FRP 365 रुपये प्रति क्विंटल मंजूर किया है। यह दाम 10.25 प्रतिशत की मूल रिकवरी दर पर तय है। सीजन अक्टूबर से सितंबर तक चलता है। BusinessLine के अनुसार 2025-26 सीजन में FRP 355 रुपये प्रति क्विंटल था, यानी इस बार 10 रुपये की बढ़ोतरी हुई है, जो करीब 2.81 प्रतिशत है।

मुख्य बातें: खेत में गन्ने की फसल और किसान का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

रिकवरी दर का मतलब

रिकवरी दर का मतलब है कि गन्ने से कितने प्रतिशत चीनी निकलती है। अगर 100 किलो गन्ने से 10.25 किलो चीनी निकले, तो रिकवरी 10.25 प्रतिशत होगी। FRP इसी रिकवरी से जुड़ा है। जिस मिल की रिकवरी ज्यादा होती है, वहां किसानों को ज्यादा दाम मिलता है।

प्रीमियम और कटौती का नियम

PIB के अनुसार 10.25 प्रतिशत से ऊपर हर 0.1 प्रतिशत रिकवरी बढ़ने पर 3.56 रुपये प्रति क्विंटल का प्रीमियम मिलेगा। इसी तरह 10.25 प्रतिशत से नीचे हर 0.1 प्रतिशत की कमी पर FRP में 3.56 रुपये प्रति क्विंटल की कटौती होगी। उदाहरण के लिए, अगर किसी मिल की रिकवरी 10.75 प्रतिशत है, तो वह 10.25 से 0.5 प्रतिशत ज्यादा है। ऐसे में किसान को 365 रुपये के ऊपर 5 गुना 3.56 यानी करीब 17.8 रुपये ज्यादा मिलेंगे और दाम लगभग 382.8 रुपये प्रति क्विंटल होगा।

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9.5 प्रतिशत से कम रिकवरी पर सुरक्षा

किसानों के हित को देखते हुए सरकार ने तय किया है कि जिन मिलों की रिकवरी 9.5 प्रतिशत से कम होगी, वहां FRP में आगे कोई कटौती नहीं होगी। ऐसे किसानों को 2026-27 में 338.3 रुपये प्रति क्विंटल मिलेंगे। इसका मतलब है कि रिकवरी कितनी भी कम हो, किसान का दाम इस स्तर से नीचे नहीं जाएगा।

लागत से कितना ज्यादा

PIB के अनुसार 2026-27 के लिए गन्ने की उत्पादन लागत यानी A2 प्लस FL 182 रुपये प्रति क्विंटल आंकी गई है। 365 रुपये का FRP इस लागत से 100.5 प्रतिशत ज्यादा है। A2 प्लस FL में बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी जैसे नकद खर्च और परिवार के श्रम का अनुमानित मूल्य शामिल होता है।

FRP कौन तय करता है

FRP कृषि लागत और मूल्य आयोग यानी CACP की सिफारिश पर तय होता है। इसके बाद राज्य सरकारों और दूसरे पक्षों से सलाह लेकर केंद्र सरकार अंतिम फैसला करती है। यह गन्ना नियंत्रण आदेश 1966 के तहत तय किया जाता है। FRP वह न्यूनतम दाम है जो चीनी मिलों को कानूनी रूप से देना ही होता है।

FRP और SAP में अंतर

कई राज्य सरकारें अपने स्तर पर राज्य परामर्शित मूल्य यानी SAP घोषित करती हैं, जो अक्सर FRP से ज्यादा होता है। उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में SAP का चलन है। जिन राज्यों में SAP घोषित होता है, वहां मिलें आम तौर पर उसी दाम पर भुगतान करती हैं। इसलिए किसानों को अपने राज्य के गन्ना विभाग की घोषणा भी देखनी चाहिए।

किसानों पर असर

PIB के अनुसार चीनी उद्योग से करीब 5 करोड़ गन्ना किसान और उनके परिवार जुड़े हैं और लगभग 5 लाख कामगार सीधे चीनी मिलों में काम करते हैं। FRP बढ़ने का सीधा असर किसानों की आय पर पड़ता है। हालांकि कई किसान संगठन लागत बढ़ने का हवाला देकर इससे ज्यादा बढ़ोतरी की मांग करते रहे हैं।

भुगतान से जुड़ी बातें

नियमों के तहत मिलों को गन्ना खरीद के तय समय के भीतर किसानों को भुगतान करना होता है। भुगतान में देरी होने पर किसान अपने जिले के गन्ना अधिकारी या राज्य के गन्ना आयुक्त कार्यालय से शिकायत कर सकते हैं। गन्ना पर्ची, तौल रसीद और बैंक खाते की जानकारी संभाल कर रखें।

किसान क्या ध्यान रखें

अपनी मिल की पिछले सीजन की रिकवरी दर पता करें, ताकि अंदाजा लग सके कि आपको कितना दाम मिलेगा। राज्य के गन्ना विभाग के पोर्टल पर सर्वे, पर्ची और भुगतान की स्थिति देखी जा सकती है। समय पर कटाई और जल्द सप्लाई से गन्ने का वजन और रस दोनों बेहतर रहते हैं।

गन्ना FRP 2026-27 कितना है

365 रुपये प्रति क्विंटल, 10.25 प्रतिशत रिकवरी पर।

2025-26 में FRP कितना था

355 रुपये प्रति क्विंटल।

9.5 प्रतिशत से कम रिकवरी पर कितना मिलेगा

338.3 रुपये प्रति क्विंटल।

FRP की सिफारिश कौन करता है

कृषि लागत और मूल्य आयोग यानी CACP।

सलाह लें: अपने राज्य के SAP, मिल की रिकवरी और भुगतान की ताजा स्थिति के लिए जिला गन्ना अधिकारी या राज्य गन्ना विभाग से जानकारी लें।

स्रोत: PIB: FRP of sugarcane for sugar season 2026-27, The Hindu: Cabinet raises sugarcane FRP by Rs 10, BusinessLine: Rs 10 per quintal hike for 2026-27

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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