बैंक में पैसा जमा करते समय या कर्ज लेते समय “चक्रवृद्धि ब्याज” या कंपाउंडिंग शब्द अक्सर सुनने को मिलता है। इसे समझना हर व्यक्ति के लिए जरूरी है, क्योंकि यही नियम लंबे समय में बचत को कई गुना बढ़ा सकता है और कर्ज को भारी भी बना सकता है। जानिए चक्रवृद्धि ब्याज क्या है।
साधारण ब्याज क्या है
साधारण ब्याज में ब्याज हर साल केवल मूलधन यानी शुरुआती रकम पर लगता है। मान लीजिए आपने 10,000 रुपये 10 प्रतिशत सालाना साधारण ब्याज पर रखे। हर साल 1,000 रुपये ब्याज मिलेगा, और तीन साल बाद कुल रकम 13,000 रुपये होगी।

चक्रवृद्धि ब्याज क्या है
चक्रवृद्धि ब्याज में हर अवधि का ब्याज मूलधन में जुड़ जाता है और अगली बार ब्याज इस बढ़ी हुई रकम पर लगता है। यानी ब्याज पर भी ब्याज मिलता है। ऊपर वाले उदाहरण में सालाना चक्रवृद्धि के साथ पहले साल 10,000 पर 1,000 रुपये ब्याज मिलेगा। दूसरे साल 11,000 पर 1,100 रुपये, और तीसरे साल 12,100 पर 1,210 रुपये। तीन साल बाद कुल रकम लगभग 13,310 रुपये होगी। शुरुआत में फर्क छोटा लगता है, लेकिन लंबे समय में यह बहुत बड़ा हो जाता है।
कंपाउंडिंग कितनी बार होती है
ब्याज सालाना, छमाही, तिमाही या मासिक आधार पर जुड़ सकता है। जितनी जल्दी-जल्दी ब्याज मूलधन में जुड़ता है, कुल रिटर्न उतना थोड़ा ज्यादा होता है। कई बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट पर तिमाही आधार पर ब्याज जोड़ते हैं। इसीलिए FD का प्रभावी सालाना रिटर्न घोषित दर से थोड़ा ज्यादा हो सकता है। कोई भी योजना चुनते समय यह जरूर देखें कि ब्याज कितनी बार जुड़ता है।
यह भी पढ़ें: महंगाई क्या है: CPI और WPI कैसे मापे जाते हैं, RBI महंगाई को कैसे काबू करता है और आपकी बचत पर असर | FD और RD में क्या फर्क है: किसमें कैसे जमा होता है पैसा, ब्याज, टैक्स और DICGC बीमा की जानकारी
जल्दी शुरू करने का फायदा
चक्रवृद्धि का सबसे बड़ा दोस्त समय है। जो व्यक्ति कम उम्र में छोटी रकम से बचत शुरू करता है, उसके पैसे को बढ़ने के लिए ज्यादा साल मिलते हैं। कई बार देर से शुरू करने वाला व्यक्ति ज्यादा रकम लगाकर भी उतना नहीं जुटा पाता। इसलिए बचत के लिए बड़ी तनख्वाह का इंतजार करने के बजाय छोटी रकम से नियमित शुरुआत करना बेहतर है। बीच में पैसा निकालने से कंपाउंडिंग का असर टूट जाता है।
72 का नियम
यह एक आसान अनुमान है कि चक्रवृद्धि ब्याज पर पैसा लगभग कितने साल में दोगुना होगा। 72 को सालाना ब्याज दर से भाग दें। जैसे 8 प्रतिशत दर पर लगभग 72 ÷ 8 = 9 साल में पैसा दोगुना हो सकता है। यह सिर्फ मोटा अनुमान है, सटीक गणना नहीं। यह भी याद रखें कि महंगाई पैसे की असली खरीद क्षमता घटाती है।
कर्ज में उल्टा असर
यही नियम कर्ज में आपके खिलाफ काम करता है। क्रेडिट कार्ड का बकाया या ऊंचे ब्याज वाला कर्ज समय पर न चुकाने पर ब्याज पर ब्याज जुड़ता जाता है और रकम तेजी से बढ़ती है। इसलिए ऊंचे ब्याज वाले कर्ज जल्दी चुकाना समझदारी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या RD में भी चक्रवृद्धि ब्याज मिलता है?
हां, आम तौर पर बैंक रिकरिंग डिपॉजिट पर भी चक्रवृद्धि आधार पर ब्याज देते हैं। शर्तें अपने बैंक से जांच लें।
स्रोत: नेशनल सेंटर फॉर फाइनेंशियल एजुकेशन (NCFE), भारतीय रिज़र्व बैंक: वित्तीय शिक्षा। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।






टिप्पणियां (1)