कई ग्राहकों को बैंक से मैसेज आता है कि उनका Re-KYC बाकी है और समय पर अपडेट न करने पर खाते में लेन देन रुक सकता है। KYC यानी नो योर कस्टमर वह प्रक्रिया है, जिसमें बैंक अपने ग्राहक की पहचान और पता सत्यापित करता है। खाता खोलते समय KYC एक बार होता है, लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के अनुसार बैंकों को समय समय पर ग्राहकों की जानकारी अपडेट करनी होती है। इसी को Re-KYC या KYC का आवधिक अपडेट कहा जाता है। इस लेख में जानिए इसके नियम और आसान तरीका।
Re-KYC क्यों जरूरी है
समय के साथ ग्राहक का पता, मोबाइल नंबर, नौकरी या दूसरी जानकारी बदल सकती है। बैंक को सही और ताजा जानकारी रखनी होती है, ताकि धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और फर्जी खातों पर रोक लग सके। RBI की KYC से जुड़ी मास्टर डायरेक्शन में बैंकों को यह जिम्मेदारी दी गई है।

कितने समय में जरूरी
RBI के नियमों के अनुसार बैंक हर ग्राहक को जोखिम के हिसाब से श्रेणी में रखते हैं:
- उच्च जोखिम वाले ग्राहक: कम से कम हर दो साल में एक बार।
- मध्यम जोखिम वाले ग्राहक: कम से कम हर आठ साल में एक बार।
- कम जोखिम वाले ग्राहक: कम से कम हर दस साल में एक बार।
ज्यादातर आम बचत खाताधारक कम जोखिम की श्रेणी में आते हैं। आपके खाते के लिए Re-KYC कब बाकी है, यह बैंक मैसेज, ईमेल या नेट बैंकिंग में बताता है।
अगर कोई बदलाव नहीं हुआ
अगर आपकी KYC जानकारी में कोई बदलाव नहीं हुआ है, तो RBI के नियमों के अनुसार ग्राहक केवल स्व घोषणा यानी सेल्फ डिक्लेरेशन देकर Re-KYC पूरा कर सकता है। यह घोषणा बैंक में रजिस्टर्ड ईमेल, मोबाइल नंबर, ATM, नेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग ऐप या बैंक को लिखे पत्र के जरिए दी जा सकती है। इसके लिए आम तौर पर शाखा जाने की जरूरत नहीं होती।
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अगर पता बदल गया है
अगर सिर्फ पता बदला है, तो ग्राहक नए पते की स्व घोषणा उन्हीं तरीकों से दे सकता है। बैंक दो महीने के भीतर नए पते का सत्यापन करता है। अगर दूसरी जानकारी बदली है, जैसे नाम या पहचान दस्तावेज, तो नए दस्तावेज जमा करने होते हैं। आधार आधारित ई KYC या वीडियो KYC की सुविधा भी कई बैंक देते हैं।
जरूरी दस्तावेज
RBI ने KYC के लिए आधिकारिक रूप से मान्य दस्तावेजों की सूची तय की है, जिसमें पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, आधार कार्ड का प्रमाण, वोटर आईडी, नरेगा जॉब कार्ड और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर का पत्र शामिल हैं। इसके साथ पैन या फॉर्म 60 भी जरूरी होता है।
खाता फ्रीज होने से कैसे बचें
RBI ने बैंकों से कहा है कि Re-KYC बाकी होने पर ग्राहकों को पहले से कई बार सूचना दें। साथ ही ग्राहकों को राहत देने के लिए निर्देश दिए गए हैं कि जिन खातों में Re-KYC बाकी है, उन पर तुरंत रोक न लगाई जाए और ग्राहक को पर्याप्त समय मिले। फिर भी सबसे अच्छा तरीका है कि मैसेज आने पर जल्द से जल्द Re-KYC पूरा कर लें। सरकारी योजनाओं के पैसे पाने वाले खातों, जैसे पेंशन, छात्रवृत्ति या DBT वाले खातों के लिए भी RBI ने ग्राहकों को आसान सुविधा देने की बात कही है।
वीडियो KYC
कई बैंक वीडियो आधारित ग्राहक पहचान प्रक्रिया की सुविधा देते हैं। इसमें ग्राहक बैंक के ऐप या वेबसाइट से वीडियो कॉल पर बैंक अधिकारी से जुड़ता है, अपना मूल पैन कार्ड दिखाता है और आधार आधारित सत्यापन होता है। यह कॉल बैंक के आधिकारिक प्लेटफॉर्म से ही होनी चाहिए, किसी अनजान लिंक से नहीं।
KYC के नाम पर ठगी से बचें
KYC अपडेट के नाम पर ठगी के मामले बहुत सामने आते हैं। ठग मैसेज भेजते हैं कि आपका खाता आज बंद हो जाएगा और एक लिंक पर क्लिक करके KYC अपडेट करें। ऐसे लिंक नकली वेबसाइट पर ले जाते हैं, जहां बैंक की जानकारी और OTP चुरा लिए जाते हैं।
- बैंक कभी OTP, PIN या पासवर्ड नहीं मांगता।
- सिर्फ बैंक की आधिकारिक वेबसाइट, ऐप या शाखा से ही KYC अपडेट करें।
- किसी अनजान ऐप को डाउनलोड न करें।
- ठगी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें।
शिकायत कहां करें
अगर बैंक Re-KYC के नाम पर परेशान करे या बिना सूचना खाता रोक दे, तो पहले बैंक की शिकायत व्यवस्था में शिकायत करें। 30 दिन में समाधान न मिले तो RBI की एकीकृत लोकपाल योजना के तहत cms.rbi.org.in पर शिकायत की जा सकती है।
Re-KYC कितने साल में करनी होती है
जोखिम श्रेणी के हिसाब से 2, 8 या 10 साल में कम से कम एक बार।
क्या बिना बदलाव के शाखा जाना जरूरी है
नहीं, स्व घोषणा ईमेल, ऐप या नेट बैंकिंग से दी जा सकती है।
KYC के नाम पर लिंक आए तो क्या करें
उस पर क्लिक न करें और बैंक से खुद संपर्क करें।
स्रोत: RBI: Master Direction on KYC, RBI: Consumer awareness, RBI





