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UP Farmer Registry: यूपी में फार्मर आईडी बनवाना जरूरी, पीएम किसान सम्मान निधि समेत इन योजनाओं का मिलेगा लाभ

UP Farmer Registry: यूपी में फार्मर आईडी बनवाना जरूरी, पीएम किसान सम्मान निधि समेत इन योजनाओं का मिलेगा लाभ

सारांश

  • UP Farmer Registry: फार्मर आईडी किसानों की डिजिटल कृषि पहचान है।
  • इसमें किसान की पहचान और भूमि रिकॉर्ड को जोड़ा जाता है।
  • पीएम किसान सहित कृषि योजनाओं में इसका उपयोग सत्यापन के लिए हो सकता है।
  • पंजीकरण से पहले आधार और खतौनी के विवरण का मिलान करें।
  • नाम या भूमि रिकॉर्ड में गलती होने पर संबंधित राजस्व अधिकारी से संपर्क करें।
  • पंजीकरण के लिए केवल आधिकारिक सरकारी पोर्टल या अधिकृत केंद्र का इस्तेमाल करें।
  • फार्मर आईडी की अनिवार्यता और किस्त पर पड़ने वाले प्रभाव की पुष्टि सरकारी दिशा-निर्देशों से करें।

UP Farmer Registry: उत्तर प्रदेश सरकार कृषि व्यवस्था के आधुनिकीकरण और सरकारी योजनाओं के पारदर्शी क्रियान्वयन के लिए ‘डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन’ के तहत फार्मर रजिस्ट्री अभियान को युद्धस्तर पर संचालित कर रही है। केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को एक साझा डिजिटल तंत्र से जोड़ने के उद्देश्य से किसानों के भू-अभिलेखों और पहचान का केंद्रीकृत डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। इस डिजिटल व्यवस्था का मुख्य आधार प्रत्येक किसान को जारी की जाने वाली 11 अंकों की विशिष्ट ‘फार्मर आईडी’ (Farmer ID) है। आने वाले समय में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की किस्तों के निर्बाध हस्तांतरण, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल खरीद, कृषि यंत्र सब्सिडी और फसल बीमा जैसी तमाम योजनाओं के लाभ को सीधे फार्मर रजिस्ट्री से जोड़ा जा रहा है, जिसके चलते किसानों के लिए इस डिजिटल पहचान को समय रहते बनवाना अनिवार्य हो गया है।

UP Farmer Registry: क्या है यूपी फार्मर रजिस्ट्री और 11 अंकों की डिजिटल फार्मर आईडी?

फार्मर रजिस्ट्री केंद्र सरकार के ‘एग्रीस्टैक’ (AgriStack) फ्रेमवर्क पर आधारित एक व्यापक डिजिटल भंडार है, जिसमें कृषक की व्यक्तिगत पहचान, उसके परिवार के विवरण और राजस्व विभाग की खतौनी में दर्ज भू-अभिलेखों (गाटा संख्या, रकबा और हिस्सेदारी) का पूर्ण मिलान किया जाता है। सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रणाली स्वतः 11 अंकों की एक विशिष्ट पहचान संख्या जारी करती है, जिसे फार्मर आईडी कहा जाता है।

जिस तरह आम नागरिक के लिए विशिष्ट पहचान पत्र आवश्यक होता है, ठीक उसी तरह यह फार्मर आईडी किसानों के लिए एक डिजिटल कृषि पहचान पत्र का कार्य करेगी। इस व्यवस्था के लागू होने से किसानों को किसी भी कृषि योजना का लाभ लेने के लिए बार-बार तहसील के चक्कर काटने, लेखपाल से खतौनी प्रमाणित कराने या विभिन्न विभागों में दस्तावेजों की कई प्रतियां जमा करने की झंझट से मुक्ति मिल जाएगी। केवल फार्मर आईडी दर्ज करते ही संबंधित विभाग किसान की भूमि और बैंक खाते का डिजिटल सत्यापन कर सकेगा।

पीएम किसान सम्मान निधि की अगली किस्तों पर क्या पड़ेगा प्रभाव?

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) के तहत मिलने वाली 6,000 रुपये की वार्षिक वित्तीय सहायता को पूरी तरह पारदर्शी और पात्र किसानों तक सीमित रखने के लिए कृषि मंत्रालय ने फार्मर रजिस्ट्री को अनिवार्य मानक बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे मामले सामने आए हैं जहां भू-अभिलेखों में अद्यतन न होने या परिवार में भूमि बंटवारे के बाद भी पुराने खातों पर किस्तें जा रही थीं।

डिजिटल रजिस्ट्री लागू होने के बाद केवल वही किसान पोर्टल पर सत्यापित माने जाएंगे जिनकी भूमि का रिकॉर्ड उनकी फार्मर आईडी से सीधे जुड़ा होगा। जिन कृषकों ने अभी तक अपनी फार्मर आईडी नहीं बनवाई है, उनकी आगामी किस्तों पर अस्थाई रोक लग सकती है। हालांकि किसानों को यह समझना होगा कि केवल फार्मर आईडी जनरेट होना ही किस्त मिलने की अंतिम गारंटी नहीं है; इसके साथ पूर्व से निर्धारित ई-केवाईसी (e-KYC), बैंक खाते का आधार सीडिंग और भूमि सत्यापन की शर्तें भी पूरी होनी अनिवार्य हैं।

किसान क्रेडिट कार्ड, फसल खरीद और कृषि सब्सिडी में सीधी उपयोगिता

फार्मर आईडी का दायरा मात्र पीएम किसान सम्मान निधि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कृषि क्षेत्र की संपूर्ण वित्तीय और विपणन व्यवस्था का आधार बनेगी। बैंकों से किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के माध्यम से रियायती फसली ऋण लेने के लिए अब तक जटिल कागजी प्रक्रिया और भूमि बंधक सत्यापन से गुजरना पड़ता था, जिसे अब फार्मर आईडी के जरिए पेपरलेस और डिजिटल रूप से कुछ ही मिनटों में पूरा किया जा सकेगा।

इसके अलावा, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर होने वाली खरीफ और रबी फसलों की सरकारी खरीद, जैसे धान और गेहूं की तौल के लिए खाद्य एवं रसद विभाग के पोर्टल पर पंजीकरण कराते समय फार्मर आईडी की अनिवार्यता लागू की जा रही है। इससे खरीद केंद्रों पर बिचौलियों और फर्जी किसानों द्वारा की जाने वाली अनधिकृत बिक्री पर पूरी तरह लगाम लगेगी। इसी तरह कृषि विभाग द्वारा संचालित फार्म मशीनरी बैंक, सोलर पंप (पीएम कुसुम योजना), उन्नत बीज और कीटनाशकों पर मिलने वाले प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) अनुदान के लिए भी यही डिजिटल आईडी मुख्य आधार बनेगी।

UP Farmer Registry में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की चरणबद्ध प्रक्रिया

उत्तर प्रदेश के कृषक घर बैठे अपने मोबाइल फोन या कंप्यूटर के माध्यम से आधिकारिक पोर्टल ‘upfr.agristack.gov.in’ अथवा राज्य के कृषि विभाग की वेबसाइट पर जाकर अपना पंजीकरण पूरा कर सकते हैं। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में जनसेवा केंद्रों (CSC) और ग्राम पंचायतों में लगाए जा रहे विशेष राजस्व शिविरों में भी यह सुविधा निशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है।

पोर्टल पर पंजीकरण के लिए सबसे पहले किसान को अपना मोबाइल नंबर दर्ज कर ओटीपी के जरिए सत्यापन करना होता है। इसके बाद अपने पहचान पत्र का विवरण प्रविष्ट कर आधार-लिंक्ड मोबाइल नंबर पर प्राप्त बायोमेट्रिक या ओटीपी सत्यापन पूरा किया जाता है। अगले चरण में किसान को अपने जिले, तहसील, परगना और ग्राम का चयन करके अपनी खतौनी का खाता संख्या या गाटा संख्या दर्ज करना होता है। प्रणाली भूलेख डेटाबेस से किसान की कुल भूमि और सह-खातेदारों का विवरण स्वतः प्रदर्शित करती है। सभी प्रविष्टियों की जांच के बाद सबमिट करते ही 11 अंकों की फार्मर आईडी जनरेट हो जाती है, जिसे किसान प्रिंट कर अपने पास सुरक्षित रख सकते हैं।

पंजीकरण के दौरान आने वाली समस्याएं और सुधार के उपाय

फार्मर रजिस्ट्री के दौरान किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या खतौनी और पहचान पत्र में नाम की वर्तनी (Spelling) में अंतर होने के कारण आती है। कई मामलों में राजस्व अभिलेखों में पिता का नाम, उपनाम या स्वयं का नाम आधार डेटाबेस से मेल नहीं खाता, जिससे स्वचालित ई-केवाईसी सत्यापन असफल हो जाता है।

यदि किसी किसान का डाटा मिसमैच के कारण रिजेक्ट हो रहा है, तो उसे तुरंत अपनी ग्राम पंचायत के संबंधित लेखपाल, राजस्व निरीक्षक या उप कृषि निदेशक कार्यालय में संपर्क कर खतौनी में नाम संशोधन या नामांतरण (दाखिल-खारिज) की प्रक्रिया पूरी करानी चाहिए। संयुक्त खातेदारी की स्थिति में सभी हिस्सेदारों का अलग-अलग रकबा स्पष्ट रूप से दर्ज होना आवश्यक है ताकि भविष्य में किसी प्रकार का भू-स्वामित्व विवाद उत्पन्न न हो।

UP Farmer Registry: किसानों के लिए आवश्यक साइबर सुरक्षा एवं आधिकारिक दिशा-निर्देश

डिजिटल प्रक्रियाओं के विस्तार के साथ ही साइबर धोखाधड़ी का जोखिम भी बढ़ जाता है। किसानों को विशेष रूप से सचेत किया जाता है कि वे फार्मर रजिस्ट्री कराने के नाम पर किसी भी अज्ञात व्यक्ति, फर्जी कॉल या अनधिकृत लिंक पर अपने बैंक खाते का विवरण या ओटीपी साझा न करें। सरकारी योजनाओं के पंजीकरण के लिए किसी भी निजी व्यक्ति को नकद शुल्क देने की आवश्यकता नहीं है।

वर्तमान में राज्यभर में चल रहे विशेष ग्राम स्तरीय शिविरों का लाभ उठाते हुए किसान समय रहते अपनी 11 अंकों की डिजिटल फार्मर आईडी बनवा लें। भूमि अभिलेखों के डिजिटल होने से न केवल सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी अड़चन के सीधे बैंक खातों में पहुंचेगा, बल्कि भूमि विवादों और फर्जीवाड़े से भी किसानों के मालिकाना हक को स्थायी सुरक्षा प्राप्त होगी।

स्रोत: किसान रजिस्ट्री, उत्तर प्रदेश (एग्रीस्टैक) और पीएम किसान पोर्टल। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।

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लेखक

Netsha Singh

नेत्शा सिंह डेमोक्रेटिक भारत लाइव में हिंदी न्यूज़ कंटेंट राइटर हैं। वे सरकारी योजनाओं, आपका पैसा, देश की खबरों और धर्म-आस्था से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। डिजिटल न्यूज़ लेखन में उन्हें लगभग एक साल का अनुभव है; इससे पहले वे खबर नगरी और ऑनलाइन ताज़ा खबर के साथ काम कर चुकी हैं और यूट्यूब पर समसामयिक विषयों पर कंटेंट भी बनाती हैं।

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