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सिख धर्म के दस गुरु: गुरु नानक देव से गुरु गोबिंद सिंह तक, उनका योगदान और गुरु ग्रंथ साहिब

सिख धर्म के दस गुरुओं के नाम और योगदान, गुरु नानक देव की शिक्षाएं, लंगर परंपरा, आदि ग्रंथ का संकलन, खालसा की स्थापना और गुरु ग्रंथ साहिब का स्थान।

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सारांश

  • सिख धर्म की नींव गुरु नानक देव जी ने पंद्रहवीं सदी में रखी। उनके बाद नौ और गुरुओं ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया।
  • गुरु नानक देव जी ने एक ईश्वर, सबकी बराबरी और सच्चे आचरण का संदेश दिया।
  • दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी ने 1699 में बैसाखी के दिन आनंदपुर साहिब में खालसा पंथ की स्थापना की।
  • गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने बाद किसी व्यक्ति को गुरु बनाने के बजाय गुरु ग्रंथ साहिब को सदा के लिए गुरु घोषित किया।

सिख धर्म की नींव गुरु नानक देव जी ने पंद्रहवीं सदी में रखी। उनके बाद नौ और गुरुओं ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया। दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी ने गुरु ग्रंथ साहिब को सदा के लिए गुरु का दर्जा दिया। सिख परंपरा में “गुरु” का अर्थ अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाला है। जानिए सिख धर्म के दस गुरु और उनका योगदान।

दस गुरुओं के नाम

  • गुरु नानक देव जी
  • गुरु अंगद देव जी
  • गुरु अमर दास जी
  • गुरु राम दास जी
  • गुरु अर्जन देव जी
  • गुरु हरगोबिंद जी
  • गुरु हर राय जी
  • गुरु हर कृष्ण जी
  • गुरु तेग बहादुर जी
  • गुरु गोबिंद सिंह जी
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गुरु नानक देव जी की शिक्षाएं

गुरु नानक देव जी ने एक ईश्वर, सबकी बराबरी और सच्चे आचरण का संदेश दिया। उनकी शिक्षाओं को तीन मूल सिद्धांतों में समझा जाता है: नाम जपना यानी ईश्वर का स्मरण, किरत करना यानी ईमानदारी से मेहनत की कमाई, और वंड छकना यानी अपनी कमाई दूसरों के साथ बांटना। उन्होंने जाति और ऊंच-नीच के भेदभाव का विरोध किया और दूर-दूर तक यात्राएं करके अपना संदेश फैलाया।

अन्य गुरुओं का प्रमुख योगदान

गुरु अंगद देव जी को गुरमुखी लिपि को लोकप्रिय बनाने का श्रेय दिया जाता है। गुरु अमर दास जी ने लंगर की परंपरा को मजबूत किया, जिसमें हर व्यक्ति बिना भेदभाव एक साथ बैठकर भोजन करता है। गुरु राम दास जी ने अमृतसर नगर बसाया। गुरु अर्जन देव जी ने गुरुओं और कई संतों की वाणी को आदि ग्रंथ के रूप में संकलित किया और हरमंदिर साहिब का निर्माण कराया, जिसे स्वर्ण मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। गुरु हरगोबिंद जी ने मीरी और पीरी, यानी सांसारिक और आध्यात्मिक जिम्मेदारी के संतुलन का संदेश दिया। गुरु हर राय जी करुणा और प्रकृति प्रेम के लिए जाने जाते हैं, और गुरु हर कृष्ण जी ने बहुत कम उम्र में बीमारों की सेवा की। गुरु तेग बहादुर जी ने धर्म की स्वतंत्रता के लिए बलिदान दिया, इसलिए उन्हें “हिंद की चादर” कहा जाता है।

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गुरु गोबिंद सिंह जी और खालसा

दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी ने 1699 में बैसाखी के दिन आनंदपुर साहिब में खालसा पंथ की स्थापना की। उन्होंने पांच प्यारों को अमृत छकाया और सिखों को पांच ककार धारण करने का निर्देश दिया: केश, कंघा, कड़ा, कच्छेरा और कृपाण। उन्होंने आदि ग्रंथ में गुरु तेग बहादुर जी की वाणी जोड़ी।

गुरु ग्रंथ साहिब

गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने बाद किसी व्यक्ति को गुरु बनाने के बजाय गुरु ग्रंथ साहिब को सदा के लिए गुरु घोषित किया। इसमें सिख गुरुओं के साथ कई हिंदू और मुस्लिम संतों की वाणी भी शामिल है, जो सबकी बराबरी के संदेश को दिखाती है। गुरुद्वारों में गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश और सम्मान इसी परंपरा का हिस्सा है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

गुरुपर्व क्या होता है?

गुरुओं के प्रकाश पर्व या शहीदी दिवस जैसे खास दिनों को गुरुपर्व कहा जाता है, जैसे गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व।

स्रोत: शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC)। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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