नवंबर आते ही उत्तर भारत में रातें ठंडी होने लगती हैं और दिसंबर-जनवरी में शीतलहर के दिनों में घर के अंदर भी ठिठुरन महसूस होती है। ज्यादातर लोग इसका हल रूम हीटर या ब्लोअर में ढूंढते हैं, लेकिन इनसे बिजली का बिल तेजी से बढ़ता है और बंद कमरे में लगातार चलाने से हवा भी सूखी हो जाती है। अच्छी बात यह है कि घर की बनावट और रोज की कुछ आदतों में छोटे बदलाव करके कमरे को काफी हद तक गर्म रखा जा सकता है। ये उपाय सस्ते हैं और ज्यादातर घर में मौजूद चीजों से हो जाते हैं।
गर्मी कहां से निकलती है
घर की गर्मी सबसे ज्यादा दरवाजों और खिड़कियों की दरारों, कांच, छत और फर्श के जरिए बाहर निकलती है। ठंडी हवा इन्हीं रास्तों से अंदर आती है। इसलिए सबसे पहले इन्हीं जगहों पर ध्यान देना असरदार होता है।

धूप का पूरा फायदा उठाएं
- सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक जिन खिड़कियों पर धूप आती है, उनके पर्दे हटा दें
- धूप को फर्श और दीवारों पर पड़ने दें, ये गर्मी सोखकर शाम तक धीरे-धीरे छोड़ते हैं
- धूप ढलते ही खिड़कियां बंद करें और पर्दे खींच दें, ताकि जमा हुई गर्मी बाहर न जाए
- छत पर धूप आती हो, तो बिस्तर, रजाई और गद्दे वहां सुखाएं, धूप लगी रजाई रात में ज्यादा गर्म लगती है
मोटे पर्दे लगाएं
पतले पर्दों की जगह सर्दियों में मोटे कपड़े के पर्दे लगाएं। गहरे रंग के और अस्तर वाले पर्दे ठंडी हवा को बेहतर रोकते हैं। पर्दे खिड़की से थोड़े लंबे और चौड़े हों, ताकि किनारों से हवा न आए। पुराने कंबल या शॉल को भी अस्थायी पर्दे की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।
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दरारें बंद करें
- दरवाजे के नीचे की खाली जगह से सबसे ज्यादा ठंडी हवा आती है, यहां पुराने कपड़े को लपेटकर बनाया गया लंबा तकिया यानी ड्राफ्ट स्टॉपर रखें
- खिड़की के फ्रेम की दरारों में बाजार में मिलने वाली रबर या फोम की पट्टी चिपकाएं
- टूटे कांच को तुरंत बदलवाएं, अस्थायी तौर पर मोटी पारदर्शी पन्नी लगाई जा सकती है
- जो कमरे इस्तेमाल नहीं होते, उनके दरवाजे बंद रखें
फर्श को ढकें
सीमेंट, मार्बल या टाइल का फर्श सर्दियों में बहुत ठंडा हो जाता है और पैरों से शरीर की गर्मी खींचता है। फर्श पर दरी, कालीन या चटाई बिछाने से कमरा गर्म महसूस होता है। गांवों में पुआल पर दरी बिछाने का पुराना तरीका भी असरदार है। घर में ऊनी मोजे और चप्पल पहनें।
फर्नीचर की जगह बदलें
सोफा या बिस्तर बाहरी दीवार और खिड़की से सटा हो, तो उसे थोड़ा अंदर की ओर खिसका दें। बाहरी दीवारें रात में बहुत ठंडी हो जाती हैं। बैठने की जगह कमरे के बीच या अंदरूनी दीवार की तरफ रखें। हीटर या खिड़की के सामने भारी फर्नीचर न रखें, ताकि गर्मी पूरे कमरे में फैल सके।
रसोई की गर्मी का इस्तेमाल
खाना बनाते समय रसोई गर्म हो जाती है। अगर रसोई घर के बीच में है, तो खाना बनने के दौरान और उसके बाद कुछ देर दरवाजा खुला रखने से आसपास का हिस्सा गर्म होता है। लेकिन गैस चूल्हा जलाकर कमरा गर्म करने की गलती कभी न करें।
हीटर चलाएं तो सावधानी से
- आईएसआई मार्क वाला हीटर ही खरीदें
- सोते समय हीटर बंद कर दें
- अंगीठी या कोयले की सिगड़ी बंद कमरे में बिल्कुल न जलाएं, इससे निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस बिना गंध के जानलेवा हो सकती है
- हीटर को पर्दे, कपड़ों और बिस्तर से दूर रखें
- कमरे में थोड़ी हवा आने की जगह जरूर छोड़ें
- थर्मोस्टैट वाले हीटर बिजली कम खाते हैं
बच्चों और बुजुर्गों का खास ध्यान
छोटे बच्चे और बुजुर्ग ठंड से जल्दी प्रभावित होते हैं। उनके कमरे को घर का सबसे गर्म कमरा बनाएं, यानी वह कमरा जहां दिन में धूप आती हो और बाहरी दीवारें कम हों। रात में उनके बिस्तर पर सोने से पहले गर्म पानी की बोतल कुछ देर रख देने से बिस्तर गुनगुना हो जाता है, लेकिन सोते समय बोतल हटा दें। भारत मौसम विज्ञान विभाग शीतलहर की चेतावनी जारी करता है, ऐसी चेतावनी के दिनों में बुजुर्गों को सुबह जल्दी और देर रात बाहर निकलने से बचाना चाहिए।
कपड़ों की परतें
घर के अंदर एक मोटे स्वेटर की बजाय दो-तीन पतली परतें ज्यादा गर्म रखती हैं, क्योंकि परतों के बीच हवा फंसकर इंसुलेशन का काम करती है। सिर, कान और पैर ढके रखें, क्योंकि इनसे शरीर की गर्मी तेजी से निकलती है।
बिना बिजली के कमरा गर्म कैसे करें
दिन में धूप अंदर आने दें, शाम को मोटे पर्दे खींचें, दरवाजों की दरारें बंद करें और फर्श पर दरी बिछाएं। इन चार उपायों से काफी फर्क पड़ता है।
क्या कमरे में अंगीठी जलाना सुरक्षित है
बंद कमरे में अंगीठी या कोयला जलाना खतरनाक है। इससे कार्बन मोनोऑक्साइड बनती है, जो दम घुटने से मौत का कारण बन सकती है।





