पीलीभीत जिले की सदर विधानसभा सीट की मतदाता सूची में अनियमितताएं पाए जाने के बाद चुनाव आयोग ने बड़ी कार्रवाई की है। आयोग ने एसडीएम रैंक के दो अधिकारियों, मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही जिले की सभी चार विधानसभा सीटों की वोटर लिस्ट के पुन: सत्यापन के निर्देश जारी किए गए हैं। आयोग ने इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर तलब की है।

चुनाव आयोग की सख्त कार्रवाई का विवरण
उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में मतदाता सूची के प्रबंधन में गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद भारत निर्वाचन आयोग ने एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। पीलीभीत की सदर विधानसभा सीट की वोटर लिस्ट में पाई गई अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। इस मामले में आयोग ने तत्काल प्रभाव से दो एसडीएम रैंक के अधिकारियों को निलंबित करने का आदेश जारी किया है। निलंबित किए गए अधिकारियों के नाम मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी हैं, जो निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। निर्वाचन आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि इन दोनों अधिकारियों की बहाली आयोग की पूर्व अनुमति के बिना नहीं की जा सकेगी, जो इस मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को दर्शाता है। आयोग का यह निर्णय प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अधिकारियों पर कार्रवाई और एफआईआर में नई धाराएं
प्रशासनिक निलंबन के साथ-साथ इस मामले में कानूनी प्रक्रिया को भी तेज कर दिया गया है। मतदाता पंजीकरण केंद्र में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार के खिलाफ पहले से ही एक प्राथमिकी दर्ज है। अब निर्वाचन आयोग ने इस एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 198 को जोड़ने का कड़ा निर्देश दिया है। यह ध्यान देने योग्य तथ्य है कि इस प्राथमिकी में निलंबित अधिकारी मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी के नाम भी शामिल हैं। आयोग के इस निर्देश से यह स्पष्ट होता है कि वह केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर ही नहीं, बल्कि उन पर्यवेक्षी अधिकारियों पर भी जिम्मेदारी तय कर रहा है जिनकी देखरेख में यह त्रुटियां हुई हैं। इस कानूनी कार्रवाई का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता को भंग करने वाले किसी भी प्रयास को रोकना है और भविष्य के लिए एक मिसाल कायम करना है।
जिले की सभी सीटों पर मतदाता सूची का पुन: सत्यापन
सदर विधानसभा क्षेत्र में मिली गड़बड़ियों के मद्देनजर निर्वाचन आयोग ने इसे केवल एक क्षेत्र तक सीमित न मानकर पूरे जिले की जांच करने का निर्णय लिया है। पीलीभीत के जिला निर्वाचन अधिकारी को यह विशेष निर्देश दिया गया है कि वे जिले की सभी चारों विधानसभा सीटों की मतदाता सूचियों का नए सिरे से सत्यापन करें। इस व्यापक जांच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिले के किसी भी अन्य क्षेत्र में इस प्रकार की कोई त्रुटि शेष न रहे। आयोग ने इस पूरी सत्यापन प्रक्रिया को संपन्न करने और उसकी विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के लिए मात्र एक सप्ताह का समय निर्धारित किया है। यह कदम मतदाता सूची की पारदर्शिता और शुद्धता को बनाए रखने के लिए उठाया गया है ताकि आने वाले समय में किसी भी प्रकार के विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो। आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची में किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए संबंधित अधिकारियों को सीधे तौर पर जिम्मेदार माना जाएगा।
समय सीमा और रिपोर्ट सौंपने के निर्देश
निर्वाचन आयोग ने न केवल भविष्य की जांच के निर्देश दिए हैं, बल्कि अब तक की गई कार्रवाई पर भी त्वरित रिपोर्ट मांगी है। दोषी पाए गए कर्मचारियों और अधिकारियों के विरुद्ध जो भी अनुशासनात्मक कदम उठाए गए हैं, उनकी विस्तृत रिपोर्ट तीन दिनों के भीतर आयोग के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी। आयोग की यह तत्परता दर्शाती है कि वह चुनावी डेटा के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या लापरवाही को बर्दाश्त करने के पक्ष में नहीं है। इस जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि वोटर लिस्ट में हुई इन गड़बड़ियों के पीछे किन लोगों की मुख्य भूमिका थी और क्या यह किसी संगठित प्रयास का हिस्सा था या फिर केवल प्रशासनिक अक्षमता का परिणाम था। आयोग ने जिला प्रशासन को यह सुनिश्चित करने को कहा है कि जांच की प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी हो।
निर्वाचन प्रक्रिया की शुचिता का संरक्षण
एसडीएम स्तर के अधिकारियों पर की गई यह कार्रवाई पूरे राज्य के प्रशासनिक अमले के लिए एक कड़ा संदेश है। निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी का पद लोकतांत्रिक ढांचे में अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि उनके कंधों पर यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी होती है कि मतदाता सूची पूरी तरह से त्रुटिहीन हो। निर्वाचन आयोग द्वारा की गई इस कार्रवाई से यह संदेश गया है कि चुनावी ड्यूटी में किसी भी प्रकार की कोताही अक्षम्य है। पीलीभीत की चारों सीटों पर होने वाले पुन: सत्यापन के परिणाम आने वाले दिनों में जिले की चुनावी व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को स्पष्ट करेंगे। आयोग की इस सख्त निगरानी से भविष्य में मतदाता सूचियों के निर्माण और उनके रख-रखाव में अधिक सावधानी बरते जाने की उम्मीद है। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक पात्र मतदाता का नाम सूची में हो और किसी भी अपात्र व्यक्ति का नाम वहां न रहे।
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स्रोत: Aaj Tak





