प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी माता से संबंधित एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई वीडियो के प्रसार के मामले में दिल्ली पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया है। दिल्ली पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस स्पेशल सेल ने इस प्रकरण में बिहार कांग्रेस को एक आधिकारिक नोटिस जारी किया है। इस कानूनी कार्रवाई के तहत दिल्ली पुलिस ने अमित कुमार मंडल को 5 नवंबर 2026 को पूछताछ के लिए नई दिल्ली तलब किया है। यह पूरा मामला सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो से जुड़ा है जिसे लेकर सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस जांच में जुटी हैं।

दिल्ली पुलिस की विशेष सेल द्वारा पटना में कार्रवाई
दिल्ली पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस स्पेशल सेल की एक टीम इस मामले की गहराई से जांच करने के लिए बिहार की राजधानी पटना पहुंची। पुलिस टीम ने अपनी कार्रवाई के दौरान पटना स्थित बिहार कांग्रेस के प्रदेश मुख्यालय, जिसे सदाकत आश्रम के नाम से जाना जाता है, वहां का दौरा किया। पुलिस अधिकारियों ने सदाकत आश्रम के मुख्य द्वार के बाहर इस मामले से संबंधित कानूनी नोटिस चस्पा कर दिया है। यह कदम उस समय उठाया गया जब पुलिस को इस मामले में डिजिटल साक्ष्यों और संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ की आवश्यकता महसूस हुई। दिल्ली पुलिस की यह टीम विशेष रूप से उस सोशल मीडिया पोस्ट की उत्पत्ति और उसके प्रसार की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही है जो प्रधानमंत्री और उनकी माता के एआई जनित वीडियो से संबंधित है।
अमित कुमार मंडल को पूछताछ के लिए समन
दिल्ली पुलिस द्वारा जारी किए गए इस नोटिस में अमित कुमार मंडल को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया है कि वे जांच प्रक्रिया में शामिल हों। नोटिस के अनुसार, अमित कुमार मंडल को 5 नवंबर 2026 को सुबह 11:00 बजे दिल्ली पुलिस के समक्ष उपस्थित होना होगा। उन्हें नई दिल्ली के भरत नगर, न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी स्थित काउंटर इंटेलिजेंस स्पेशल सेल के कार्यालय में रिपोर्ट करने के लिए कहा गया है। पुलिस इस पूछताछ के माध्यम से उस डिजिटल पदचिह्न का पता लगाना चाहती है जिसके जरिए यह वीडियो सार्वजनिक पटल पर आया। जांच अधिकारी इस बात पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं कि इस वीडियो को बनाने और इसे सोशल मीडिया पर प्रसारित करने में किन व्यक्तियों की भूमिका रही है।
डिजिटल साक्ष्य और मोबाइल हैंडसेट की अनिवार्यता
जांच के दायरे को बढ़ाते हुए दिल्ली पुलिस ने अमित कुमार मंडल से कुछ महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य और उपकरण भी मांगे हैं। नोटिस में यह स्पष्ट किया गया है कि उन्हें अपने साथ वह सिम कार्ड लाना होगा जो संबंधित मोबाइल नंबर से जुड़ा है। इसके अतिरिक्त, पुलिस ने उन सभी मोबाइल हैंडसेट की भी मांग की है जिनका उपयोग 1 जुलाई 2025 से लेकर अब तक उस विशेष नंबर के साथ किया गया है। यह मांग इसलिए की गई है ताकि तकनीकी फॉरेंसिक जांच के जरिए यह पता लगाया जा सके कि किन उपकरणों का उपयोग सोशल मीडिया हैंडल को संचालित करने के लिए किया गया था। पुलिस उन सभी उपकरणों का विश्लेषण करना चाहती है जो इस समय सीमा के भीतर सक्रिय थे, ताकि वीडियो के प्रसार की पूरी श्रृंखला को समझा जा सके।
सोशल मीडिया हैंडल और अधिकृत व्यक्तियों की जांच
यह पूरा विवाद कांग्रेस पार्टी के बिहार इकाई के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल @INCBihar से जुड़ा हुआ है। दिल्ली पुलिस ने इस हैंडल के उपयोग को लेकर विस्तृत जानकारी मांगी है। पुलिस ने बिहार कांग्रेस से उन व्यक्तियों के नामों की सूची मांगी है जो 1 जुलाई 2025 से 31 दिसंबर 2025 के बीच इस एक्स अकाउंट को संचालित करने के लिए अधिकृत थे। इसके साथ ही, उस व्यक्ति की पहचान भी सुनिश्चित करने को कहा गया है जो वर्तमान में इस हैंडल का आधिकारिक इस्तेमाल कर रहा है। पुलिस यह जानना चाहती है कि उस विशिष्ट अवधि के दौरान सोशल मीडिया की जिम्मेदारी किन हाथों में थी और क्या वीडियो पोस्ट करने की अनुमति आधिकारिक स्तर पर दी गई थी।
जांच का दायरा और भविष्य की कार्यवाही
दिल्ली पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस स्पेशल सेल इस मामले में बहुत बारीकी से साक्ष्य एकत्र कर रही है। नोटिस में दी गई तारीख यानी 5 नवंबर 2026 को होने वाली पूछताछ इस मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है। पुलिस का मुख्य उद्देश्य उस मोबाइल नंबर और उससे जुड़े डेटा की पुष्टि करना है जो बिहार कांग्रेस के डिजिटल अभियानों से जुड़ा बताया जा रहा है। जांच टीम इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि क्या इस एआई वीडियो के निर्माण में किसी बाहरी एजेंसी या सॉफ्टवेयर का उपयोग किया गया था। आने वाले दिनों में, अमित कुमार मंडल द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेजों और उनके बयानों के आधार पर दिल्ली पुलिस अपनी आगे की रणनीति तय करेगी। वर्तमान में, पुलिस का पूरा ध्यान डिजिटल साक्ष्यों के संकलन और संबंधित सोशल मीडिया हैंडल के प्रबंधन ढांचे को समझने पर केंद्रित है।
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स्रोत: Aaj Tak





