भारत में खेती का बड़ा हिस्सा आज भी बारिश पर निर्भर है और कई इलाकों में भूजल तेजी से नीचे जा रहा है। ऐसे में कम पानी में ज्यादा पैदावार लेना किसानों के लिए सबसे बड़ी जरूरत बन गया है। इसी मकसद से केंद्र सरकार ने 2015 16 में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना यानी PMKSY शुरू की। इसका नारा है हर खेत को पानी और पर ड्रॉप मोर क्रॉप, यानी हर बूंद से ज्यादा फसल। इस लेख में जानिए योजना के घटक, ड्रिप और स्प्रिंकलर पर मिलने वाली सब्सिडी और आवेदन का तरीका।
योजना के मुख्य घटक
PMKSY कई पुरानी सिंचाई योजनाओं को मिलाकर बनाई गई। इसके मुख्य हिस्से हैं:
- त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम, जिसमें बड़ी और मध्यम सिंचाई परियोजनाओं को जल्दी पूरा करने पर जोर है।
- हर खेत को पानी, जिसमें छोटे सिंचाई स्रोत, तालाबों की मरम्मत और नहरों से खेत तक पानी पहुंचाने का काम होता है।
- पर ड्रॉप मोर क्रॉप, जिसमें ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा दिया जाता है।
- वाटरशेड विकास, जिसमें बारिश के पानी को रोकने और मिट्टी के कटाव को कम करने का काम होता है।
अलग अलग घटक जल शक्ति मंत्रालय, कृषि मंत्रालय और ग्रामीण विकास मंत्रालय के विभाग चलाते हैं।

पर ड्रॉप मोर क्रॉप क्या है
इस घटक का सबसे सीधा फायदा किसान को मिलता है। ड्रिप सिंचाई में पानी पाइपों और छोटे ड्रिपर के जरिए बूंद बूंद करके सीधे पौधे की जड़ों तक पहुंचता है। स्प्रिंकलर में पानी फव्वारे की तरह बारिश जैसा छिड़का जाता है। पारंपरिक नाली सिंचाई के मुकाबले इन तरीकों में पानी की काफी बचत होती है, खाद भी पानी के साथ दी जा सकती है और खरपतवार कम उगते हैं। कई अध्ययनों में इससे पैदावार बढ़ने और बिजली व मजदूरी की बचत की बात सामने आई है।
कितनी सब्सिडी मिलती है
केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली लगाने पर छोटे और सीमांत किसानों को इकाई लागत का करीब 55 प्रतिशत और दूसरे किसानों को करीब 45 प्रतिशत वित्तीय सहायता दी जाती है। इस सहायता में केंद्र और राज्य दोनों का हिस्सा होता है। कई राज्य अपनी ओर से अतिरिक्त टॉप अप सब्सिडी देते हैं, जिससे कुछ राज्यों में छोटे किसानों को कुल 80 से 90 प्रतिशत तक सहायता मिल जाती है। सहायता की सीमा प्रति किसान तय क्षेत्रफल तक होती है। अपने राज्य की ताजा दर कृषि या उद्यान विभाग से पता करें।
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कौन ले सकता है फायदा
- जिस किसान के नाम खेती की जमीन हो।
- पट्टे पर खेती करने वाले किसान भी कुछ राज्यों में पात्र होते हैं, शर्तों के साथ।
- स्वयं सहायता समूह, किसान उत्पादक संगठन और सहकारी समितियां भी आवेदन कर सकती हैं।
- खेत में पानी का कोई स्रोत होना चाहिए, जैसे ट्यूबवेल, कुआं, तालाब या नहर।
आवेदन कैसे करें
ज्यादातर राज्यों में सूक्ष्म सिंचाई के लिए ऑनलाइन पोर्टल है, जो कृषि या उद्यान विभाग चलाता है।
- राज्य के पोर्टल पर किसान पंजीकरण करें।
- सूक्ष्म सिंचाई के लिए आवेदन चुनें और खेत का ब्योरा भरें।
- विभाग की सूची में शामिल किसी पंजीकृत कंपनी को चुनें।
- कंपनी खेत का सर्वे करके डिजाइन और अनुमान तैयार करती है।
- मंजूरी के बाद सिस्टम लगाया जाता है और विभाग उसका सत्यापन करता है।
- सत्यापन के बाद सब्सिडी किसान के खाते में या तय प्रक्रिया के अनुसार भेजी जाती है।
जरूरी दस्तावेज
- आधार कार्ड।
- जमीन के कागज जैसे खतौनी या 7/12।
- बैंक पासबुक।
- पानी के स्रोत का प्रमाण।
- पासपोर्ट साइज फोटो।
किन फसलों में ज्यादा फायदा
ड्रिप सिंचाई फल बागानों, सब्जियों, गन्ना, कपास और केला जैसी फसलों में ज्यादा कारगर मानी जाती है। स्प्रिंकलर गेहूं, चना, सरसों और दालों जैसी घनी बोई जाने वाली फसलों में उपयोगी है। हल्की और रेतीली मिट्टी वाले इलाकों में इन दोनों तरीकों का फायदा ज्यादा दिखता है।
रखरखाव जरूरी
ड्रिप सिस्टम लगवाने के बाद उसका रखरखाव भी जरूरी है। पानी को फिल्टर से साफ करना, समय समय पर पाइप धोना और ड्रिपर बंद होने पर साफ करना चाहिए। कंपनी से रखरखाव की ट्रेनिंग जरूर लें। चूहों और धूप से पाइपों को बचाने का भी ध्यान रखें।
सावधानी
सब्सिडी के नाम पर कोई बिचौलिया पैसे मांगे तो उससे सावधान रहें। आवेदन सिर्फ आधिकारिक पोर्टल या विभाग के कार्यालय से ही करें। सिस्टम लगाने वाली कंपनी विभाग की सूची में पंजीकृत होनी चाहिए, वरना सब्सिडी नहीं मिलती।
सौर पंप के साथ जोड़ें
कई किसान सूक्ष्म सिंचाई को सौर पंप के साथ जोड़ कर बिजली और डीजल दोनों का खर्च बचा रहे हैं। सौर पंप के लिए पीएम कुसुम योजना के तहत अलग सहायता मिलती है।
PMKSY कब शुरू हुई
2015 16 में।
ड्रिप पर छोटे किसानों को कितनी सहायता मिलती है
केंद्रीय दिशानिर्देशों में करीब 55 प्रतिशत, कई राज्य अतिरिक्त सहायता भी देते हैं।
आवेदन कहां करें
राज्य के कृषि या उद्यान विभाग के पोर्टल पर।
स्रोत: PMKSY: Pradhan Mantri Krishi Sinchayee Yojana, Per Drop More Crop: Department of Agriculture, PIB: PMKSY





