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Pilibhit Tiger Reserve: अब 8 महीने घूम सकेंगे पर्यटक, वीकेंड पर महंगा होगा टिकट

Pilibhit Tiger Reserve

सारांश

  • Pilibhit Tiger Reserve: पर्यटन सत्र: 1 नवंबर 2026 से 30 जून 2027 तक।
  • सत्र में बदलाव: पहले सामान्यतः 15 नवंबर से 15 जून तक पर्यटन होता था।
  • वीकेंड टिकट: शनिवार और रविवार को भारतीय पर्यटकों के लिए ₹200 प्रति व्यक्ति।
  • अन्य दिन: सोमवार से शुक्रवार तक टिकट ₹120 प्रति व्यक्ति।
  • विदेशी पर्यटक: वीकेंड पर टिकट ₹1,000।
  • मुख्य आकर्षण: चूका बीच, जंगल सफारी, बोटिंग, नेचर ट्रेल और बर्ड वॉचिंग।
  • बुकिंग केंद्र: नेहरू ऊर्जा उद्यान, आसाम चौराहा, शहीद सुरेंद्र सिंह पार्क, मुस्तफाबाद गेट और महोफ गेट।
  • सफारी समय: आधिकारिक वेबसाइट पर मौसम के अनुसार अलग-अलग शिफ्ट निर्धारित हैं।
  • चूका बीच: शारदा सागर जलाशय और साल के जंगलों के बीच स्थित प्रमुख पर्यटन स्थल है।
  • ध्यान दें: आपके मूल लेख में कुछ सफारी समय और शुल्क संबंधी विवरण आधिकारिक वेबसाइट पर दिख रहे वर्तमान विवरण से अलग हैं, इसलिए प्रकाशन से पहले उन्हें अपडेट करना उचित होगा।

Pilibhit Tiger Reserve: उत्तर प्रदेश के तराई अंचल में स्थित और समृद्ध जैव विविधता के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विख्यात पीलीभीत टाइगर रिजर्व (PTR) में वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों के लिए राज्य सरकार व वन प्रशासन ने एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। अब इस टाइगर रिजर्व का पर्यटन सत्र पूर्व की भांति केवल सात महीने का न होकर पूरे आठ महीने तक संचालित किया जाएगा। नए प्रशासनिक आदेश के तहत पीलीभीत टाइगर रिजर्व को प्रत्येक वर्ष 1 नवंबर से 30 जून तक सैलानियों के लिए खुला रखने की व्यवस्था लागू कर दी गई है। पूर्ववर्ती व्यवस्था में यह अभयारण्य सामान्य तौर पर 15 नवंबर से प्रारंभ होकर 15 जून तक ही पर्यटकों के लिए सुलभ रहता था।

इस नवीन व्यवस्था में पर्यटन अवधि के विस्तार के साथ-साथ प्रवेश व सफारी शुल्क ढांचे में भी महत्वपूर्ण फेरबदल किया गया है। रिजर्व प्रशासन ने वीकेंड यानी शनिवार और रविवार के लिए डायनेमिक प्राइसिंग प्रणाली को अंगीकार करते हुए इन दो दिनों का शुल्क सप्ताह के अन्य कार्यदिवसों (सोमवार से शुक्रवार) की तुलना में अधिक निर्धारित किया है। नए सत्र के शुभारंभ से पूर्व वन विभाग द्वारा सफारी मार्गों के सुदृढ़ीकरण, साइनेज लगाने और प्रसिद्ध चूका बीच पर स्थित विश्राम गृहों के जीर्णोद्धार का कार्य युद्धस्तर पर पूरा किया जा रहा है।

Pilibhit Tiger Reserve: 1 नवंबर से 30 जून तक संचालित होगा पर्यटन सत्र

तराई के घने जंगलों, प्राकृतिक जलस्रोतों और साल के विशाल वृक्षों से आच्छादित पीलीभीत टाइगर रिजर्व में पर्यटकों की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए पर्यटन कैलेंडर का विस्तार किया गया है। अब सैलानियों को मानसून के आगमन से ठीक पहले यानी जून के अंतिम सप्ताह तक बाघों के दीदार और जंगल की जैव विविधता को निहारने का स्वर्णिम अवसर प्राप्त होगा।

पूर्ववर्ती वर्षों में 15 जून के बाद वन क्षेत्र को बंद कर दिया जाता था, जिससे ग्रीष्मकालीन छुट्टियों में आने वाले कई परिवार सफारी के रोमांच से वंचित रह जाते थे। अब 1 नवंबर से सत्र के औपचारिक उद्घाटन के साथ ही देश-विदेश से आने वाले प्रकृति प्रेमी पूरे आठ महीनों तक जंगल सफारी और वाटर इको-टूरिज्म का लुत्फ उठा सकेंगे। हालांकि संरक्षित वन क्षेत्र होने के कारण भारी वर्षा अथवा मौसमी आपदा की स्थिति में स्थानीय वन संरक्षक के पास विशेष मार्गों को अस्थायी तौर पर बंद करने का विधिक अधिकार सुरक्षित रहेगा।

वीकेंड पर ढीली होगी जेब: शनिवार और रविवार को लागू होगा अतिरिक्त शुल्क

पीलीभीत टाइगर रिजर्व घूमने की योजना बना रहे पर्यटकों के लिए बजट के लिहाज से सबसे अहम बिंदु नया शुल्क ढांचा है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सप्ताहांत के दौरान पर्यटकों के अत्यधिक दबाव को प्रबंधित करने और राजस्व वृद्धि के उद्देश्य से दोहरी शुल्क नीति लागू की गई है। सोमवार से शुक्रवार तक जहां सामान्य निर्धारित दरें प्रभावी रहेंगी, वहीं शनिवार और रविवार को प्रवेश टिकट और सफारी वाहनों का किराया अपेक्षाकृत अधिक वसूला जाएगा।

यदि कोई पर्यटक या परिवार अपने बच्चों के साथ वीकेंड पर भ्रमण का कार्यक्रम बना रहा है, तो उसे बुकिंग के समय इस अतिरिक्त वित्तीय भार का ध्यान रखना होगा। इस मूल्य अंतर का मुख्य ध्येय कार्यदिवसों में पर्यटकों की आवाजाही को संतुलित करना भी है, ताकि सप्ताहांत में जंगल के संवेदनशील वन्यजीव क्षेत्रों में अत्यधिक वाहनों के संकेंद्रण से होने वाले ध्वनि प्रदूषण और मानवीय हस्तक्षेप को नियंत्रित किया जा सके।

ग्रीष्म व शीत ऋतु के अनुसार सफारी समय सारणी का निर्धारण

जंगल सफारी के दौरान वन्यजीवों की सक्रियता और सूर्य के प्रकाश की उपलब्धता के अनुसार पीलीभीत जिला प्रशासन व वन विभाग ने ऋतुवार समय सारणी निर्धारित की है। शीतकाल के दौरान घने कोहरे के चलते सुबह की पाली का समय प्रातः 6:30 बजे से 10:00 बजे तक नियत किया गया है, जबकि दोपहर की पाली अपराह्न 2:30 बजे से सूर्यास्त तक संचालित होती है।

गर्मी के मौसम में जब दिन बड़े होते हैं और तापमान में वृद्धि होती है, तब सुबह की सफारी का समय बदलकर प्रातः 6:00 बजे से 9:30 बजे तक कर दिया जाता है, जबकि दोपहर की पाली 3:30 बजे से सूर्यास्त तक जारी रहती है। पर्यटकों को निर्धारित प्रवेश द्वारों पर सफारी के आरंभ होने से कम से कम आधे घंटे पूर्व अपनी पहचान और ऑनलाइन बुकिंग पर्ची के साथ उपस्थित होना अनिवार्य होता है, क्योंकि वन क्षेत्र के मुख्य फाटकों को तय समय पर सख्त रूप से बंद कर दिया जाता है।

चूका बीच का कायाकल्प: शारदा सागर जलाशय के किनारे वॉटर हट्स को मिला नया रूप

पीलीभीत टाइगर रिजर्व का सबसे अनूठा और लोकप्रिय आकर्षण इसका प्रसिद्ध चूका बीच है। नेपाल सीमा के समीप शारदा सागर जलाशय के तट पर विस्तृत यह मनोरम स्थल समुद्र तट जैसी अनुभूति कराता है, जहां एक ओर अथाह जलराशि और दूसरी ओर घना साल का जंगल पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है। उत्तर प्रदेश इको-टूरिज्म विकास बोर्ड द्वारा यहां वाइल्डलाइफ सफारी के अतिरिक्त नौकायन (बोटिंग), नेचर ट्रेल और बर्ड वॉचिंग की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

आगामी 1 नवंबर से प्रारंभ हो रहे सत्र के लिए चूका बीच पर स्थित विश्राम गृहों का बड़े पैमाने पर जीर्णोद्धार किया जा रहा है। जलाशय के बीच बने प्रसिद्ध वाटर हट और अरण्य कुटीर की काष्ठ संरचनाओं की मरम्मत व वाटरप्रूफिंग का कार्य अंतिम चरण में है। इसके अतिरिक्त क्षेत्रीय जनजातीय संस्कृति को प्रदर्शित करने वाले पारंपरिक थारू हट्स और जमीन से कई फीट ऊंचे पेड़ों पर निर्मित ट्री-टॉप हट्स को आधुनिक साज-सज्जा और बेहतर सुविधाओं के साथ नया रूप दिया जा रहा है।

जैव विविधता का अनूठा संसार: बाघों के अतिरिक्त ये हैं प्रमुख दर्शनीय स्थल

पीलीभीत टाइगर रिजर्व को बाघों के घनत्व में उल्लेखनीय वृद्धि के लिए अंतरराष्ट्रीय ‘TX2’ पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। बाघों के अतिरिक्त यह वन क्षेत्र दुर्लभ हिरणों, हाथियों, तेंदुओं और सैकड़ों प्रजातियों के विदेशी प्रवासी पक्षियों का प्राकृतिक आश्रय स्थल है। पर्यटकों के लिए रिजर्व क्षेत्र के भीतर कई विशिष्ट व्यू-पॉइंट्स स्थापित किए गए हैं।

पर्यटक अपनी सफारी के दौरान क्रोकोडाइल पॉइंट पर धूप सेकते विशाल मगरमच्छों, ऑटर पॉइंट पर जलबिलावों की अठखेलियों, बारहसिंगा ताल में संकटग्रस्त प्रजाति के बारहसिंगों के झुंड और भीम ताल के शांत परिदृश्य का अवलोकन कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त महोफ रेंज में स्थापित नेचर इंटरप्रिटेशन सेंटर में सैलानियों को तराई के पारिस्थितिकी तंत्र, वनों के महत्व और वन्यजीव संरक्षण के वैज्ञानिक पहलुओं से परिचित कराने के लिए दृश्य-श्रव्य माध्यमों की उत्कृष्ट व्यवस्था की गई है।

पारदर्शी ऑनलाइन बुकिंग और अधिकृत केंद्रों का विवरण

रिजर्व प्रशासन ने पर्यटकों को अनाधिकृत एजेंटों, दलालों और फर्जी वेबसाइटों से सावधान रहने की सख्त हिदायत दी है। पूर्व के सत्रों में सफारी और कमरों की बुकिंग के नाम पर पर्यटकों से मनमाना शुल्क वसूलने की शिकायतों के उपरांत निगरानी व्यवस्था को अत्यधिक कड़ा कर दिया गया है।

सैलानी केवल उत्तर प्रदेश इको-टूरिज्म की आधिकारिक राज्य स्तरीय वेबसाइट के माध्यम से ही पीलीभीत टाइगर रिजर्व और चूका बीच के हट्स की वैध ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त स्थानीय स्तर पर पीलीभीत जिला प्रशासन द्वारा अधिकृत किए गए ऑफलाइन बुकिंग केंद्रों—जिनमें नेहरू ऊर्जा उद्यान, आसाम चौराहा, शहीद सुरेंद्र सिंह पार्क पूरनपुर, मुस्तफाबाद गेट और महोफ गेट शामिल हैं—पर जाकर ही सफारी परमिट और गाइड का आवंटन कराना विधिक रूप से मान्य है।

पर्यटकों की संख्या में भारी उछाल: तराई का प्रमुख इको-टूरिज्म हब

पीलीभीत टाइगर रिजर्व की लोकप्रियता का ग्राफ विगत दो वर्षों में तेजी से ऊपर चढ़ा है। आधिकारिक पर्यटन आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023-24 के दौरान जहां 38,183 घरेलू और 164 विदेशी सैलानियों ने पीटीआर का दीदार किया था, वहीं वर्ष 2024-25 में यह संख्या अभूतपूर्व रूप से बढ़कर 56,289 घरेलू और 452 विदेशी पर्यटकों तक पहुंच गई।

पर्यटन सत्र को आठ महीने तक विस्तारित करने से न केवल बाहरी पर्यटकों को भ्रमण के लिए अनुकूल तिथियां चुनने की सुविधा मिलेगी, बल्कि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था, निजी होमस्टे संचालकों, सफारी चालकों और पंजीकृत नेचर गाइड्स के लिए आजीविका के नए व दीर्घकालिक स्रोत भी विकसित होंगे।

Pilibhit Tiger Reserve: निष्कर्ष

1 नवंबर से 30 जून तक आठ महीने के लिए पीलीभीत टाइगर रिजर्व का संचालन उत्तर प्रदेश में प्रकृति आधारित पर्यटन को राष्ट्रीय मानचित्र पर अग्रणी स्थान दिलाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। चूका बीच पर अत्याधुनिक सुविधाओं का विकास और सफारी मार्गों का सुदृढ़ीकरण सैलानियों के अनुभव को अविस्मरणीय बनाएगा। हालांकि वीकेंड पर लागू होने वाले अतिरिक्त शुल्क और मौसम के अनुसार सफारी समय के बदलाव को ध्यान में रखते हुए पर्यटकों को अपनी अग्रिम यात्रा की योजना आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से ही सुनिश्चित करनी चाहिए।

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Netsha Singh Author at Democratic Bharat Live

लेखक

Netsha Singh

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