हर साल गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्म पुरस्कारों की घोषणा होती है। इनमें बड़े नामों के साथ कई ऐसे लोग भी होते हैं, जो गांवों और छोटे कस्बों में चुपचाप समाज के लिए काम कर रहे हैं। पद्म पुरस्कार भारत के सबसे प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों में गिने जाते हैं। जानिए ये कैसे दिए जाते हैं और इनके लिए नामांकन की प्रक्रिया क्या है।
पद्म पुरस्कार की तीन श्रेणियां
गृह मंत्रालय की पद्म पुरस्कार वेबसाइट के अनुसार ये सम्मान तीन श्रेणियों में दिए जाते हैं:
- पद्म विभूषण: असाधारण और विशिष्ट सेवा के लिए
- पद्म भूषण: उच्च कोटि की विशिष्ट सेवा के लिए
- पद्म श्री: किसी भी क्षेत्र में विशिष्ट सेवा के लिए
इनकी शुरुआत 1954 में हुई थी। ये पुरस्कार कला, सामाजिक कार्य, सार्वजनिक मामले, विज्ञान और इंजीनियरिंग, व्यापार और उद्योग, चिकित्सा, साहित्य और शिक्षा, खेल और सिविल सेवा जैसे कई क्षेत्रों में दिए जाते हैं।

कौन पात्र है
जाति, पेशा, पद या लिंग के भेदभाव के बिना कोई भी व्यक्ति पद्म पुरस्कार के लिए पात्र हो सकता है। नियमों के अनुसार सरकारी कर्मचारी, जिनमें सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के कर्मचारी भी शामिल हैं, आमतौर पर पात्र नहीं होते, लेकिन डॉक्टरों और वैज्ञानिकों के लिए छूट है। पुरस्कार आमतौर पर जीवित व्यक्तियों को दिए जाते हैं, हालांकि बहुत योग्य मामलों में मरणोपरांत सम्मान पर भी विचार किया जा सकता है। विदेशी नागरिकों और प्रवासी भारतीयों को भी यह सम्मान मिल सकता है।
नामांकन की प्रक्रिया
पद्म पुरस्कारों के लिए नामांकन और सिफारिशें ऑनलाइन राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल पर की जाती हैं। हर साल नामांकन के लिए एक तय अवधि होती है, जिसकी घोषणा गृह मंत्रालय करता है। कोई भी नागरिक किसी योग्य व्यक्ति का नाम सुझा सकता है और व्यक्ति खुद का नामांकन भी कर सकता है। नामांकन में उस व्यक्ति के काम और उपलब्धियों का पूरा ब्योरा देना होता है। सरकार ने “पीपल्स पद्म” की सोच के साथ लोगों से जमीनी स्तर पर काम करने वाले प्रतिभाशाली व्यक्तियों के नाम भेजने की अपील की है।
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चयन, घोषणा और सम्मान समारोह
प्राप्त नामांकनों पर प्रधानमंत्री की ओर से हर साल गठित पद्म पुरस्कार समिति विचार करती है। समिति की सिफारिशें प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के पास अंतिम मंजूरी के लिए जाती हैं। पुरस्कारों की घोषणा गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर होती है। राष्ट्रपति भवन में होने वाले समारोह में राष्ट्रपति ये सम्मान प्रदान करते हैं। पुरस्कार पाने वाले को राष्ट्रपति के हस्ताक्षर वाली सनद और एक पदक मिलता है। इन पुरस्कारों के साथ कोई नकद राशि नहीं दी जाती।
उपाधि नहीं है पद्म सम्मान
संविधान का अनुच्छेद 18 उपाधियों पर रोक लगाता है। सुप्रीम कोर्ट ने 1995 के बालाजी राघवन मामले में कहा कि भारत रत्न और पद्म पुरस्कार उपाधि नहीं हैं, इसलिए इन्हें नाम के आगे या पीछे उपाधि की तरह नहीं लिखा जाना चाहिए। भारत रत्न देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जिसकी प्रक्रिया पद्म पुरस्कारों से अलग है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या पद्म पुरस्कार के साथ पैसे मिलते हैं?
नहीं, इन पुरस्कारों के साथ कोई नकद राशि नहीं दी जाती।
स्रोत: पद्म पुरस्कार, गृह मंत्रालय, राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।





