सर्दियों में जैसे ही बाजार में ताजी हरी मटर आती है, उत्तर भारत के कई घरों में मटर कचौड़ी बनाने का सिलसिला शुरू हो जाता है। उत्तर प्रदेश, खासकर बनारस और लखनऊ, और राजस्थान में मटर कचौड़ी नाश्ते का खास हिस्सा है। इसे आलू की रसेदार सब्जी, हरी चटनी या गरम चाय के साथ परोसा जाता है। अच्छी मटर कचौड़ी की पहचान है कि बाहर से खस्ता हो, अंदर से भरी हुई हो और ठंडी होने पर भी नरम न पड़े। इस लेख में जानिए घर पर मटर कचौड़ी बनाने का पूरा तरीका और उसे खस्ता बनाने के आसान टिप्स।
आटे के लिए सामग्री
दो कप मैदा लें। चाहें तो एक कप मैदा और एक कप गेहूं का आटा भी मिला सकते हैं, इससे कचौड़ी थोड़ी कम खस्ता लेकिन ज्यादा पौष्टिक बनती है। इसके साथ छह बड़े चम्मच घी या तेल मोयन के लिए, आधा छोटा चम्मच नमक, एक चौथाई छोटा चम्मच अजवाइन और गूंथने के लिए गुनगुना पानी चाहिए।

भरावन के लिए सामग्री
दो कप ताजी हरी मटर के दाने, एक इंच अदरक, दो हरी मिर्च, एक बड़ा चम्मच तेल, आधा छोटा चम्मच जीरा, एक चुटकी हींग, आधा छोटा चम्मच सौंफ दरदरी पिसी, एक छोटा चम्मच धनिया पाउडर, आधा छोटा चम्मच गरम मसाला, आधा छोटा चम्मच अमचूर, स्वाद के मुताबिक नमक, दो बड़े चम्मच बेसन और बारीक कटा हरा धनिया लें। बेसन भरावन को सूखा और बंधा हुआ रखने में मदद करता है।
मोयन का सही अनुपात
खस्ता कचौड़ी का सबसे बड़ा राज मोयन है। आम तौर पर एक कप मैदे पर तीन बड़े चम्मच घी डालें। घी को मैदे में नमक और अजवाइन के साथ अच्छी तरह मसलें। जब मुट्ठी में लेकर दबाने पर मैदा लड्डू की तरह बंध जाए और छोड़ने पर बिखर जाए, तो समझिए मोयन सही है। अगर मैदा बंध न रहा हो, तो थोड़ा घी और डालें।
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आटा कैसे गूंथें
अब थोड़ा थोड़ा गुनगुना पानी डालकर नरम लेकिन सख्त आटा गूंथें। आटा पूरी के आटे से थोड़ा नरम होना चाहिए। इसे बहुत ज्यादा न मसलें, वरना खस्तापन कम हो सकता है। आटे को गीले कपड़े से ढककर कम से कम 20 से 30 मिनट के लिए रख दें। इससे आटा सेट होता है और बेलने में आसानी होती है।
भरावन तैयार करें
मटर के दानों को मिक्सी में अदरक और हरी मिर्च के साथ बिना पानी डाले दरदरा पीस लें। बहुत बारीक पेस्ट न बनाएं। कड़ाही में तेल गरम करें, उसमें जीरा, हींग और सौंफ डालें। फिर पिसी मटर डालकर मध्यम आंच पर पांच से सात मिनट भूनें, जब तक उसकी नमी कम न हो जाए। अब बेसन डालकर दो मिनट और भूनें। इसके बाद धनिया पाउडर, गरम मसाला, अमचूर और नमक मिलाएं। आखिर में हरा धनिया डालें और भरावन को पूरी तरह ठंडा होने दें। गरम भरावन भरने से कचौड़ी फट सकती है।
कचौड़ी भरना
आटे की नींबू के आकार की लोइयां बना लें। भरावन की भी उतनी ही छोटी गोलियां बना लें। एक लोई को हथेली पर रखकर किनारों से पतला और बीच से थोड़ा मोटा करें, कटोरी जैसा आकार दें। इसमें भरावन की गोली रखें और किनारों को ऊपर लाकर पोटली की तरह बंद करें। ऊपर का ज्यादा आटा तोड़कर हटा दें। अब इसे हल्के हाथ से दबाकर चपटा करें। चाहें तो हल्के हाथ से बेलन से बेल सकते हैं, लेकिन ज्यादा दबाव न डालें।
धीमी आंच पर तलना
कड़ाही में तेल गरम करें, लेकिन बहुत तेज नहीं। तेल में आटे का छोटा टुकड़ा डालें। अगर वह धीरे धीरे ऊपर आए, तो तापमान सही है। कचौड़ियां डालें और आंच धीमी रखें। कुछ मिनट बाद वे अपने आप फूलकर ऊपर आने लगेंगी। फिर उन्हें पलटें और धीमी से मध्यम आंच पर सुनहरा और खस्ता होने तक तलें। एक बार में 12 से 15 मिनट लग सकते हैं। जल्दबाजी में तेज आंच पर तलने से कचौड़ी बाहर से जल्दी भूरी हो जाती है और अंदर से कच्ची रह जाती है।
किसके साथ परोसें
मटर कचौड़ी को आलू टमाटर की रसेदार सब्जी, हरी धनिया पुदीना चटनी, मीठी इमली की चटनी या दही के साथ परोसें। बनारस में इसे अक्सर आलू की तीखी सब्जी और जलेबी के साथ खाया जाता है।
ध्यान देने वाली बातें
तलने के बाद बचे तेल को बार बार गरम करके इस्तेमाल न करें। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी FSSAI तेल को बार बार गरम करने से बचने की सलाह देता है। कचौड़ी तली हुई चीज है, इसलिए इसे कभी कभार ही खाएं। फ्रोजन मटर का इस्तेमाल करें तो पहले उसे पिघलाकर अच्छी तरह सुखा लें।
कचौड़ी खस्ता कैसे बनती है
आटे में सही मोयन डालने और धीमी आंच पर तलने से।
भरावन में बेसन क्यों डालते हैं
नमी सोखने और भरावन को बांधने के लिए।
कचौड़ी फट क्यों जाती है
गरम भरावन भरने या किनारे ठीक से बंद न करने से।
एक कचौड़ी तलने में कितना समय लगता है
धीमी आंच पर करीब 12 से 15 मिनट।
स्रोत: FSSAI: Eat Right India, FSSAI: Reuse of Cooking Oil Guidelines, ICAR: Vegetable Pea Crop





