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मालवेयर से बचाव: फोन और कंप्यूटर में वायरस के संकेत, खतरनाक ऐप की पहचान और सफाई के तरीके

मालवेयर क्या है, फोन और कंप्यूटर में इसके संकेत, APK फाइल और ऐप अनुमतियों का खतरा, बचाव के उपाय और साइबर स्वच्छता केंद्र के मुफ्त टूल।

मालवेयर से बचाव के तरीके बताने वाला ग्राफिक
ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • फोन अचानक धीमा हो जाए, बैटरी तेजी से खत्म होने लगे या ऐसे विज्ञापन दिखने लगें जो पहले नहीं थे, तो यह मालवेयर का संकेत हो सकता है।
  • मालवेयर शब्द "मैलिशियस सॉफ्टवेयर" से बना है। इसमें कई तरह के खतरनाक प्रोग्राम आते हैं, जैसे वायरस, ट्रोजन, स्पाइवेयर, एडवेयर और रैनसमवेयर।
  • मालवेयर अक्सर अनजान लिंक, ईमेल अटैचमेंट, व्हाट्सऐप या SMS पर भेजी गई APK फाइल, मुफ्त फिल्म या गेम वाली संदिग्ध वेबसाइट और पायरेटेड सॉफ्टवेयर के जरिए आता है।
  • संदिग्ध ऐप को तुरंत अनइंस्टॉल करें। अगर कोई ऐप डिलीट नहीं हो रहा, तो सेटिंग में जाकर उसकी विशेष अनुमतियां, जैसे डिवाइस एडमिन या एक्सेसिबिलिटी, हटाएं और फिर डिलीट करें।

फोन अचानक धीमा हो जाए, बैटरी तेजी से खत्म होने लगे या ऐसे विज्ञापन दिखने लगें जो पहले नहीं थे, तो यह मालवेयर का संकेत हो सकता है। मालवेयर ऐसा खतरनाक सॉफ्टवेयर है, जो आपकी जानकारी चुराने, डिवाइस को नुकसान पहुंचाने या आपसे पैसे ऐंठने के लिए बनाया जाता है। जानिए मालवेयर से बचाव कैसे करें।

मालवेयर क्या है

मालवेयर शब्द “मैलिशियस सॉफ्टवेयर” से बना है। इसमें कई तरह के खतरनाक प्रोग्राम आते हैं, जैसे वायरस, ट्रोजन, स्पाइवेयर, एडवेयर और रैनसमवेयर। स्पाइवेयर चुपचाप आपकी गतिविधियों पर नजर रखता है, ट्रोजन किसी उपयोगी ऐप के रूप में आता है और रैनसमवेयर फाइलें लॉक करके फिरौती मांगता है। भारत में कई ठगी के मामलों में लोगों को बिजली बिल, KYC अपडेट या शादी के कार्ड के नाम पर APK फाइल भेजकर फोन में मालवेयर डलवाया गया है।

मुख्य बातें: मालवेयर से बचाव के तरीके बताने वाला ग्राफिक
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मालवेयर के संकेत

  • फोन या कंप्यूटर का बिना वजह बहुत धीमा होना
  • बैटरी और मोबाइल डेटा का अचानक बहुत ज्यादा खर्च
  • बार-बार पॉप-अप विज्ञापन दिखना
  • ऐसे ऐप दिखना, जिन्हें आपने इंस्टॉल नहीं किया
  • आपके नाम से दोस्तों को अजीब मैसेज जाना
  • बैंक या UPI ऐप में अनजान लेनदेन या OTP आना

मालवेयर कैसे आता है

मालवेयर अक्सर अनजान लिंक, ईमेल अटैचमेंट, व्हाट्सऐप या SMS पर भेजी गई APK फाइल, मुफ्त फिल्म या गेम वाली संदिग्ध वेबसाइट और पायरेटेड सॉफ्टवेयर के जरिए आता है। कई बार नकली ऐप असली ऐप जैसे नाम और लोगो के साथ आते हैं। पब्लिक कंप्यूटर में लगाई गई पेन ड्राइव से भी मालवेयर फैल सकता है।

यह भी पढ़ें: डेटा बैकअप कैसे लें: फोन और कंप्यूटर की फाइलें सुरक्षित रखने का 3-2-1 तरीका | फिशिंग क्या है: नकली ईमेल, SMS और लिंक कैसे पहचानें, क्लिक कर दिया हो तो तुरंत क्या करें

बचाव के उपाय

  • ऐप हमेशा आधिकारिक ऐप स्टोर से ही डाउनलोड करें
  • फोन की सेटिंग में “अनजान स्रोत से ऐप इंस्टॉल” का विकल्प बंद रखें
  • किसी भी मैसेज में आई APK फाइल न खोलें, चाहे वह किसी परिचित के नाम से हो
  • ऐप इंस्टॉल करते समय उसकी अनुमतियां देखें, जैसे टॉर्च ऐप को SMS या संपर्क की अनुमति की जरूरत नहीं
  • फोन, कंप्यूटर और ऐप को समय पर अपडेट करें
  • कंप्यूटर में भरोसेमंद एंटीवायरस रखें और पायरेटेड सॉफ्टवेयर से बचें
  • जरूरी डेटा का नियमित बैकअप लें

मालवेयर का शक हो तो क्या करें

संदिग्ध ऐप को तुरंत अनइंस्टॉल करें। अगर कोई ऐप डिलीट नहीं हो रहा, तो सेटिंग में जाकर उसकी विशेष अनुमतियां, जैसे डिवाइस एडमिन या एक्सेसिबिलिटी, हटाएं और फिर डिलीट करें। बैंकिंग और ईमेल के पासवर्ड किसी दूसरे सुरक्षित डिवाइस से बदलें। CERT-In के साइबर स्वच्छता केंद्र की वेबसाइट पर मालवेयर हटाने के मुफ्त टूल और सुरक्षा सुझाव उपलब्ध हैं। गंभीर मामले में फोन का बैकअप लेकर फैक्टरी रीसेट किया जा सकता है। पैसे कटे हों, तो तुरंत 1930 पर कॉल करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या आईफोन में भी मालवेयर आ सकता है?

खतरा कम होता है, लेकिन फिशिंग लिंक और नकली प्रोफाइल के जरिए जोखिम बना रहता है। सावधानी हर डिवाइस पर जरूरी है।

स्रोत: साइबर स्वच्छता केंद्र, CERT-In, CERT-In। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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