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नकली शॉपिंग वेबसाइट की पहचान कैसे करें: भारी छूट के लालच से बचने और सुरक्षित खरीदारी के तरीके

नकली शॉपिंग वेबसाइट और सोशल मीडिया विज्ञापनों की पहचान, URL और संपर्क जानकारी की जांच, सुरक्षित भुगतान, कैश ऑन डिलीवरी की सावधानी और ठगी पर शिकायत कैसे करें।

नकली शॉपिंग वेबसाइट की पहचान के तरीके बताने वाला ग्राफिक
ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • त्योहारों के मौसम में ऑनलाइन सेल का इंतजार हर कोई करता है, और ठग भी इसी मौके का फायदा उठाते हैं।
  • कई ठगी सोशल मीडिया विज्ञापनों से शुरू होती है। विज्ञापन पर क्लिक करने के बजाय ब्रांड का आधिकारिक ऐप या वेबसाइट खुद खोलकर वही ऑफर खोजें।
  • कैश ऑन डिलीवरी में पैसे पहले नहीं जाते, लेकिन कुछ मामलों में अनजान पार्सल भेजकर पैसे वसूले जाते हैं।
  • पैसे कटते ही तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

त्योहारों के मौसम में ऑनलाइन सेल का इंतजार हर कोई करता है, और ठग भी इसी मौके का फायदा उठाते हैं। सोशल मीडिया पर 90 प्रतिशत छूट वाले विज्ञापन, मशहूर ब्रांड जैसे दिखने वाले पेज और आकर्षक वेबसाइटें लोगों से पैसे लेकर सामान नहीं भेजतीं या घटिया सामान भेज देती हैं। जानिए नकली शॉपिंग वेबसाइट की पहचान कैसे करें।

नकली वेबसाइट के आम संकेत

  • बाजार भाव से बहुत कम, अविश्वसनीय कीमतें और “सिर्फ कुछ मिनट बाकी” जैसा दबाव
  • वेब पता यानी URL में असली ब्रांड के नाम से मिलती-जुलती स्पेलिंग, अतिरिक्त अक्षर या अजीब डोमेन
  • संपर्क के लिए सिर्फ मोबाइल नंबर या व्हाट्सऐप, कोई पूरा पता या कंपनी की जानकारी नहीं
  • रिटर्न, रिफंड और प्राइवेसी नीति का न होना या कॉपी किया हुआ, गलतियों भरा टेक्स्ट
  • सिर्फ UPI या सीधे बैंक ट्रांसफर से एडवांस भुगतान की मांग
  • बहुत नई वेबसाइट, जिसके बारे में इंटरनेट पर कोई भरोसेमंद जानकारी न मिले
मुख्य बातें: नकली शॉपिंग वेबसाइट की पहचान के तरीके बताने वाला ग्राफिक
ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सोशल मीडिया विज्ञापनों से सावधानी

कई ठगी सोशल मीडिया विज्ञापनों से शुरू होती है। विज्ञापन पर क्लिक करने के बजाय ब्रांड का आधिकारिक ऐप या वेबसाइट खुद खोलकर वही ऑफर खोजें। पेज पर कमेंट बंद हों या सिर्फ तारीफ वाले कमेंट हों, तो सतर्क रहें। ध्यान रखें कि वेबसाइट पर ताले का निशान यानी HTTPS होना सिर्फ इतना बताता है कि कनेक्शन सुरक्षित है, इससे वेबसाइट के असली होने की गारंटी नहीं मिलती।

सुरक्षित खरीदारी के तरीके

  • जानी-पहचानी शॉपिंग वेबसाइट या ब्रांड के आधिकारिक प्लेटफॉर्म से ही खरीदें
  • नई वेबसाइट से पहली बार खरीद रहे हों, तो इंटरनेट पर उसके नाम के साथ “रिव्यू” या “फ्रॉड” लिखकर खोजें
  • भुगतान के लिए ऐसे तरीके चुनें, जिनमें शिकायत और रिफंड का विकल्प हो
  • कार्ड की जानकारी हर वेबसाइट पर सेव न करें और ऑनलाइन लेनदेन की सीमा तय रखें
  • UPI पर पैसे लेने के लिए कभी PIN नहीं डालना होता, यह याद रखें
  • डिलीवरी के नाम पर आए लिंक या “रिफंड के लिए ऐप डाउनलोड करें” जैसे मैसेज पर भरोसा न करें

यह भी पढ़ें: मालवेयर से बचाव: फोन और कंप्यूटर में वायरस के संकेत, खतरनाक ऐप की पहचान और सफाई के तरीके | फिशिंग क्या है: नकली ईमेल, SMS और लिंक कैसे पहचानें, क्लिक कर दिया हो तो तुरंत क्या करें

कैश ऑन डिलीवरी में भी सावधानी

कैश ऑन डिलीवरी में पैसे पहले नहीं जाते, लेकिन कुछ मामलों में अनजान पार्सल भेजकर पैसे वसूले जाते हैं। जो सामान आपने ऑर्डर नहीं किया, उसका भुगतान न करें। कई प्लेटफॉर्म डिलीवरी के समय OTP मांगते हैं, यह OTP केवल अपने ही ऑर्डर के लिए और पार्सल मिलने पर दें।

ठगी हो जाए तो क्या करें

पैसे कटते ही तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। अपने बैंक को भी तुरंत सूचना दें, ताकि जरूरत हो तो कार्ड ब्लॉक किया जा सके। वेबसाइट का पता, भुगतान का स्क्रीनशॉट और लेनदेन की जानकारी संभालकर रखें। जल्दी शिकायत करने से पैसे रोके जाने की संभावना बढ़ती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या बड़ी छूट हमेशा धोखा होती है?

नहीं, असली सेल में भी अच्छी छूट मिलती है, लेकिन बहुत ज्यादा छूट दिखे तो वेबसाइट की जांच जरूर करें।

स्रोत: राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल, गृह मंत्रालय, CERT-In। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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