म्यूचुअल फंड में निवेश शुरू करने वाले बहुत से लोग सोचते हैं कि कौन सा फंड चुनें, किस फंड मैनेजर पर भरोसा करें और कैसे पता चले कि फंड बाजार से बेहतर करेगा या नहीं। ऐसे लोगों के लिए इंडेक्स फंड एक आसान विकल्प माना जाता है। इंडेक्स फंड किसी शेयर बाजार इंडेक्स को कॉपी करता है, इसलिए इसमें फंड मैनेजर के फैसलों पर निर्भरता कम होती है। इस लेख में जानिए इंडेक्स फंड क्या है, यह कैसे काम करता है और ETF से इसका क्या अंतर है।
इंडेक्स क्या होता है
शेयर बाजार इंडेक्स कुछ चुनी हुई कंपनियों के शेयरों का समूह होता है, जो बाजार के किसी हिस्से की चाल दिखाता है। जैसे Nifty 50 में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की 50 बड़ी कंपनियां शामिल हैं और Sensex में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की 30 बड़ी कंपनियां। इंडेक्स ऊपर जाने का मतलब है कि उसमें शामिल कंपनियों के शेयर कुल मिलाकर महंगे हुए।

इंडेक्स फंड कैसे काम करता है
इंडेक्स फंड उसी इंडेक्स की कंपनियों में उसी अनुपात में निवेश करता है जिस अनुपात में वे इंडेक्स में होती हैं। उदाहरण के लिए Nifty 50 इंडेक्स फंड उन्हीं 50 कंपनियों में पैसा लगाएगा जो Nifty 50 में हैं। फंड मैनेजर यह तय नहीं करता कि कौन सा शेयर खरीदना या बेचना है, वह सिर्फ इंडेक्स को फॉलो करता है। इसी वजह से इसे पैसिव निवेश कहते हैं। इसका रिटर्न लगभग इंडेक्स के रिटर्न जितना होता है, खर्च घटाने के बाद थोड़ा कम।
एक्टिव फंड से अंतर
एक्टिव फंड में फंड मैनेजर अपने शोध के आधार पर शेयर चुनता है और कोशिश करता है कि रिटर्न इंडेक्स से ज्यादा हो। इसमें बेहतर रिटर्न की संभावना है, लेकिन इंडेक्स से पीछे रहने का जोखिम भी है। एक्टिव फंड का खर्च आम तौर पर इंडेक्स फंड से ज्यादा होता है। इंडेक्स फंड में बाजार से बेहतर करने का लक्ष्य नहीं होता, बल्कि बाजार जितना रिटर्न पाने का लक्ष्य होता है।
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ETF से क्या अंतर है
ETF यानी एक्सचेंज ट्रेडेड फंड भी किसी इंडेक्स को कॉपी करता है। लेकिन SEBI की निवेशक सामग्री के अनुसार ETF शेयर की तरह स्टॉक एक्सचेंज पर दिन भर खरीदा बेचा जाता है और इसके लिए डीमैट और ट्रेडिंग खाता जरूरी है। इंडेक्स फंड को सीधे म्यूचुअल फंड कंपनी से दिन के अंत की NAV पर खरीदा या बेचा जाता है और इसमें SIP करना आसान होता है। द हिंदू के एक विश्लेषण के अनुसार ETF का खर्च अक्सर कम होता है, लेकिन कम कारोबार वाले ETF में खरीद बिक्री में दिक्कत और ब्रोकरेज जैसे अतिरिक्त खर्च हो सकते हैं।
ट्रैकिंग एरर क्या है
इंडेक्स फंड का रिटर्न इंडेक्स से बिल्कुल बराबर नहीं होता। इस अंतर के उतार चढ़ाव को ट्रैकिंग एरर कहते हैं। मिंट की रिपोर्ट के अनुसार SEBI ने इक्विटी इंडेक्स फंड और ETF के लिए ट्रैकिंग एरर की सालाना सीमा 2 प्रतिशत तय की है। ट्रैकिंग एरर जितना कम हो, फंड उतनी अच्छी तरह इंडेक्स को फॉलो कर रहा है। फंड चुनते समय इसे जरूर देखें, यह फंड हाउस की वेबसाइट पर उपलब्ध होता है।
खर्च यानी एक्सपेंस रेश्यो
हर म्यूचुअल फंड अपने प्रबंधन के लिए सालाना शुल्क लेता है, जिसे एक्सपेंस रेश्यो कहते हैं। इंडेक्स फंड का एक्सपेंस रेश्यो आम तौर पर एक्टिव फंड से कम होता है। एक ही इंडेक्स को फॉलो करने वाले दो फंड में कम खर्च वाला फंड लंबे समय में ज्यादा रिटर्न दे सकता है। डायरेक्ट प्लान में खर्च रेगुलर प्लान से कम होता है।
जोखिम समझें
इंडेक्स फंड में भी शेयर बाजार का पूरा जोखिम होता है। अगर बाजार 20 प्रतिशत गिरता है, तो Nifty 50 इंडेक्स फंड भी लगभग उतना ही गिरेगा। इसमें रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है। इसलिए इसे लंबी अवधि के निवेश के रूप में देखें, आम तौर पर पांच साल या उससे ज्यादा के लिए।
टैक्स के नियम
इक्विटी इंडेक्स फंड पर टैक्स के नियम दूसरे इक्विटी फंड जैसे ही होते हैं। एक साल से ज्यादा रखने पर होने वाला मुनाफा लंबी अवधि का पूंजीगत लाभ माना जाता है, जिसमें एक वित्त वर्ष में 1.25 लाख रुपये तक का मुनाफा टैक्स फ्री है और उससे ज्यादा पर 12.5 प्रतिशत टैक्स लगता है।
शुरुआत कैसे करें
KYC पूरा करें, किसी भरोसेमंद फंड हाउस का इंडेक्स फंड चुनें और हर महीने छोटी रकम से SIP शुरू करें। फंड चुनते समय एक्सपेंस रेश्यो, ट्रैकिंग एरर और फंड के आकार पर ध्यान दें।
इंडेक्स फंड क्या है
ऐसा म्यूचुअल फंड जो किसी शेयर बाजार इंडेक्स को कॉपी करता है।
इंडेक्स फंड और ETF में मुख्य अंतर क्या है
ETF एक्सचेंज पर दिन भर ट्रेड होता है और डीमैट खाता चाहिए, इंडेक्स फंड NAV पर खरीदा बेचा जाता है।
ट्रैकिंग एरर की SEBI सीमा क्या है
इक्विटी इंडेक्स फंड और ETF के लिए 2 प्रतिशत सालाना।
क्या इंडेक्स फंड में जोखिम है
हां, इसमें शेयर बाजार का पूरा जोखिम होता है।
सलाह लें: म्यूचुअल फंड निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश से पहले योजना से जुड़े दस्तावेज पढ़ें और किसी SEBI पंजीकृत निवेश सलाहकार से सलाह लें।
स्रोत: SEBI Investor: Introduction to ETFs (PDF), Mint: How new SEBI rules will improve passive funds performance, The Hindu: ETFs vs index funds





