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Hariyali Teej Mehndi Design: जानिए इस पावन पर्व का धार्मिक महत्व, सिंधरा की परंपरा और मेहंदी की रस्म के पीछे का गहरा राज

Hariyali Teej Mehndi Design
Hariyali Teej Mehndi Design

सारांश

  • Hariyali Teej Mehndi Design: श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला हरियाली तीज का त्योहार उत्तर भारत में पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
  • माता गौरी की इस कठोर साधना और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने श्रावण शुक्ल तृतीया के दिन ही उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था।
  • इसके साथ ही तीज के दिन सास को बायाना देने की बेहद पवित्र परंपरा भी प्रचलित है।
  • तीज के आगमन से पहले ही महिलाएं अपने हाथों पर तरह-तरह की पारंपरिक और आधुनिक मेहंदी डिजाइनों को सजाती हैं।

Hariyali Teej Mehndi Design: श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला हरियाली तीज का त्योहार उत्तर भारत में पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इसे श्रावणी तीज के नाम से भी जाना जाता है, जो मुख्य रूप से अखंड सौभाग्य, प्रेम और अटूट विश्वास का प्रतीक माना गया है। इस खास दिन पर सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। वहीं दूसरी ओर अविवाहित कन्याएं मनचाहा और योग्य जीवनसाथी पाने की कामना के साथ यह पावन व्रत करती हैं। हरियाली तीज का यह अवसर न केवल पूजा-पाठ तक सीमित रहता है, बल्कि यह पारंपरिक रिश्तों को प्रगाढ़ बनाने और पारिवारिक सौहार्द को मजबूत करने का भी एक सुंदर माध्यम बनता है।

Hariyali Teej Mehndi Design: हरियाली तीज का पौराणिक संदर्भ और धार्मिक मान्यताएं

पौराणिक कथाओं के अनुसार हरियाली तीज का संबंध भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन से गहराई से जुड़ा हुआ है। माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी।

माता गौरी की इस कठोर साधना और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने श्रावण शुक्ल तृतीया के दिन ही उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। इसी कारण इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा की जाती है।

सिंधरा और बायाना की अनोखी पारंपरिक रस्म

हरियाली तीज केवल एक धार्मिक व्रत नहीं है, बल्कि यह रिश्तों में मिठास और सम्मान बढ़ाने का एक बहुत बड़ा सामाजिक अवसर भी है। इस त्योहार के अवसर पर मायके पक्ष की ओर से बेटियों और बहुओं के लिए विशेष सिंधरा भेजा जाता है।

सिंधरा की इस पारंपरिक थाली में घेवर, गुझिया, फेनी और पारंपरिक पकवानों के साथ-साथ श्रृंगार की सामग्रियां भेजी जाती हैं। यह रस्म नवविवाहित महिलाओं के लिए अत्यंत आनंददायक और स्मरणीय होती है।

इसके साथ ही तीज के दिन सास को बायाना देने की बेहद पवित्र परंपरा भी प्रचलित है। बहुएं अपनी सास को सम्मान स्वरूप वस्त्र, मिष्ठान और उपहार भेंट करती हैं।

यह सुंदर प्रथा सास और बहू के बीच आपसी प्रेम, आदर और सामंजस्य को मजबूत करती है। इस आदान-प्रदान से घर-परिवार में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

Hariyali Teej Mehndi Design: सुहाग का प्रतीक और हाथों में रचती मेहंदी

सावन के इस पावन पर्व पर महिलाओं के बीच सोलह श्रृंगार करने और हाथों में सुंदर मेहंदी रचाने का विशेष आकर्षण देखने को मिलता है। मेहंदी को सुहाग और सौभाग्य का परम प्रतीक माना जाता है।

तीज के आगमन से पहले ही महिलाएं अपने हाथों पर तरह-तरह की पारंपरिक और आधुनिक मेहंदी डिजाइनों को सजाती हैं। यह न केवल सुंदरता बढ़ाती है, बल्कि उत्सव के वातावरण को उल्लासपूर्ण बनाती है।

हरियाली तीज का यह महापर्व आपसी मनमुटाव, कटुता और नकारात्मक विचारों का त्याग करने का एक पवित्र अवसर भी प्रदान करता है। इस दिन महिलाएं परिवार में शांति और निष्ठा बनाए रखने का संकल्प लेती हैं।

सावन की फुहारों के बीच भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त कर हरियाली तीज का यह उत्सव हर घर-आंगन में खुशियां, समृद्धि और अटूट प्रेम का संदेश लेकर आता है।

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लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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