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नई कार की डिलीवरी से पहले PDI: धनतेरस-दिवाली पर कार लेते समय शोरूम में क्या-क्या जांचें, कागज और चेकलिस्ट

धनतेरस और दिवाली पर गाड़ियों की डिलीवरी सबसे ज्यादा होती है और शोरूम में भीड़ रहती है। ऐसे में जल्दबाजी में जांच छूट जाती है। जानिए प्री-डिलीवरी इंस्पेक्शन में क्या देखें, कौन से कागज लें और गड़बड़ी मिलने पर क्या करें।

नई कार की डिलीवरी से पहले PDI चेकलिस्ट का ग्राफिक
ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • धनतेरस 6 नवंबर को है और इस दिन बहुत से परिवार नई कार की डिलीवरी लेना शुभ मानते हैं।
  • प्री-डिलीवरी इंस्पेक्शन वह जांच है, जिसमें ग्राहक या डीलर गाड़ी सौंपने से पहले देखते हैं कि वह हर तरह से ठीक है।
  • डिलीवरी से पहले मिली गड़बड़ी को डीलर को लिखित में दें और उसके ठीक होने के बाद ही गाड़ी लें।
  • नहीं। डीलर की एक्सेसरी या एक्सटेंडेड वारंटी लेना आपकी मर्जी है।

धनतेरस 6 नवंबर को है और इस दिन बहुत से परिवार नई कार की डिलीवरी लेना शुभ मानते हैं। उस दिन शोरूम में भारी भीड़ होती है और डिलीवरी जल्दी-जल्दी होती है। ऐसे में कार की जांच अधूरी रह जाती है और बाद में खरोंच या खराबी की शिकायत मुश्किल हो जाती है। इसलिए डिलीवरी से पहले की जांच, यानी PDI, जरूरी है। जानिए नई कार की डिलीवरी से पहले क्या-क्या देखें।

PDI क्या है

प्री-डिलीवरी इंस्पेक्शन वह जांच है, जिसमें ग्राहक या डीलर गाड़ी सौंपने से पहले देखते हैं कि वह हर तरह से ठीक है। संभव हो तो धनतेरस से एक-दो दिन पहले शोरूम जाकर अपनी अलॉट हुई कार की जांच कर लें।

मुख्य बातें: नई कार की डिलीवरी से पहले PDI चेकलिस्ट का ग्राफिक
ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

बाहर से जांच

  • दिन की रोशनी में पूरी कार के चारों ओर घूमकर देखें
  • खरोंच, डेंट, पेंट के रंग में फर्क या दोबारा पेंट के निशान
  • दरवाजों, बोनट और डिक्की के बीच का गैप बराबर हो
  • शीशे, हेडलैंप और टेललैंप में दरार न हो
  • चारों टायर एक ही ब्रांड के हों और स्पेयर टायर भी देखें

पहचान की जांच

  • ओडोमीटर पर बहुत कम किलोमीटर हों, ज्यादा हों तो कारण पूछें
  • गाड़ी का VIN या चेसिस नंबर और इंजन नंबर बिल व कागजों से मिलाएं
  • VIN से बनने का महीना और साल पता चलता है, पुराना स्टॉक हो तो पहले से बात करें

यह भी पढ़ें: कार लोन लेने से पहले क्या देखें: ब्याज दर, अवधि, डाउन पेमेंट और डीलर फाइनेंस की शर्तें | धनतेरस पर क्या न खरीदें: 6 नवंबर को खरीदारी से जुड़ी मान्यताएं, परंपरा और समझदारी की बातें

अंदर की जांच

  • सीट, डैशबोर्ड और छत पर दाग या कट
  • AC, म्यूजिक सिस्टम, पावर विंडो, सेंट्रल लॉक
  • सारे लाइट, इंडिकेटर, हॉर्न और वाइपर
  • डैशबोर्ड पर कोई चेतावनी लाइट न जले
  • जिस वेरिएंट के पैसे दिए हैं, उसके सारे फीचर मौजूद हों

इंजन और किट

  • बोनट खोलकर तेल या पानी के रिसाव के निशान देखें
  • टूल किट, जैक, फर्स्ट एड किट और मैनुअल
  • दोनों चाबियां
  • थोड़ी दूर टेस्ट ड्राइव करें, अजीब आवाज या ब्रेक की दिक्कत नोट करें

कागजात

  • टैक्स इनवॉइस, जिसमें सही वेरिएंट, रंग और चेसिस नंबर हो
  • बीमा पॉलिसी की प्रति
  • अस्थायी पंजीकरण या स्थायी पंजीकरण के आवेदन की रसीद
  • वारंटी और सर्विस बुकलेट
  • एक्सेसरी और ऑफर की लिखित सूची

पंजीकरण के बाद परिवहन विभाग के पोर्टल पर भी गाड़ी का ब्योरा देखा जा सकता है।

गड़बड़ी मिले तो

डिलीवरी से पहले मिली गड़बड़ी को डीलर को लिखित में दें और उसके ठीक होने के बाद ही गाड़ी लें। डीलर बात न सुने तो कंपनी के ग्राहक सेवा केंद्र में शिकायत करें। राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915 या consumerhelpline.gov.in पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

क्या अतिरिक्त एक्सेसरी लेना जरूरी है?

नहीं। डीलर की एक्सेसरी या एक्सटेंडेड वारंटी लेना आपकी मर्जी है। इसे जबरदस्ती गाड़ी के साथ नहीं जोड़ा जा सकता।

बीमा और फाइनेंस

गाड़ी कर्ज पर ली है तो लोन के कागज में बैंक का नाम, ब्याज दर और EMI की रकम जांचें। बीमा और फाइनेंस, दोनों के कागज की प्रति अपने पास रखें। डिलीवरी के समय की फोटो और वीडियो भी बना लें, ताकि बाद में कोई विवाद हो तो सबूत रहे।

स्रोत: परिवहन सेवा, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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