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कबड्डी के नियम आसान भाषा में: रेड, बोनस लाइन, सुपर टैकल, लोना और डू ऑर डाई रेड क्या होती है

गांव की मिट्टी से प्रो लीग तक पहुंची कबड्डी देखने में आसान लगती है, लेकिन इसके नियम बारीक हैं। जानिए खेल की पूरी समझ।

कबड्डी कोर्ट पर रेड करते खिलाड़ी का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • कबड्डी भारत के सबसे पुराने और लोकप्रिय देसी खेलों में से एक है।
  • जब कोई खिलाड़ी विपक्षी पाले में अंक लेने के लिए जाता है तो उसे रेडर और उसके प्रयास को रेड कहते हैं।
  • अगर डिफेंडर रेडर को पकड़ लें और 30 सेकंड पूरे होने तक या उसके कैंट टूटने तक अपने पाले में रोक लें, तो रेडर आउट होता है और डिफेंडिंग टीम को एक अंक मिलता है।
  • अगर किसी टीम की लगातार दो रेड खाली जाएं, यानी उनमें कोई अंक न मिले, तो तीसरी रेड डू ऑर डाई रेड होती है।

कबड्डी भारत के सबसे पुराने और लोकप्रिय देसी खेलों में से एक है। गांव के मैदानों में खेले जाने वाले इस खेल ने प्रो कबड्डी लीग के जरिये टीवी और स्टेडियम तक का सफर तय किया है। देखने में यह खेल सीधा लगता है, एक खिलाड़ी विपक्षी पाले में जाता है, किसी को छूकर लौटने की कोशिश करता है और बाकी उसे पकड़ने की कोशिश करते हैं। लेकिन अंक कैसे मिलते हैं, बोनस कब मिलता है और सुपर टैकल क्या होता है, ये नियम कई दर्शकों को उलझा देते हैं। यहां एमेच्योर कबड्डी फेडरेशन ऑफ इंडिया यानी AKFI के नियमों के आधार पर कबड्डी को आसान भाषा में समझते हैं।

कोर्ट और खिलाड़ी

AKFI के नियमों के अनुसार पुरुषों के लिए कबड्डी कोर्ट 13 मीटर लंबा और 10 मीटर चौड़ा होता है, जबकि महिलाओं के लिए 12 मीटर x 8 मीटर। कोर्ट को बीच की मिडलाइन दो बराबर हिस्सों में बांटती है, हर हिस्सा एक टीम का पाला होता है। हर टीम के 7 खिलाड़ी मैदान पर उतरते हैं और कुछ खिलाड़ी विकल्प के तौर पर बाहर रहते हैं।

कोर्ट के दोनों किनारों पर एक-एक मीटर की पट्टी होती है जिसे लॉबी कहते हैं। सामान्य तौर पर लॉबी में जाना आउट माना जाता है, लेकिन रेडर और डिफेंडर के बीच संपर्क यानी स्ट्रगल होने के बाद लॉबी भी खेल क्षेत्र का हिस्सा बन जाती है।

मुख्य बातें: कबड्डी कोर्ट पर रेड करते खिलाड़ी का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

रेड क्या है

जब कोई खिलाड़ी विपक्षी पाले में अंक लेने के लिए जाता है तो उसे रेडर और उसके प्रयास को रेड कहते हैं। रेडर को पूरी रेड के दौरान बिना सांस तोड़े लगातार और साफ आवाज में कबड्डी-कबड्डी बोलना होता है, जिसे कैंट कहते हैं। AKFI के नियमों के अनुसार एक रेड अधिकतम 30 सेकंड की होती है।

रेडर अगर विपक्षी पाले में किसी डिफेंडर को छूकर सुरक्षित अपने पाले में लौट आए, तो जितने डिफेंडरों को उसने छुआ, उतने अंक उसकी टीम को मिलते हैं और वे डिफेंडर आउट हो जाते हैं।

बाॅक लाइन और बोनस लाइन

विपक्षी पाले में मिडलाइन के समानांतर एक रेखा होती है जिसे बाॅक लाइन कहते हैं। पुरुषों के लिए यह मिडलाइन से 3.75 मीटर दूर होती है। रेडर के लिए इसे पार करना जरूरी है। अगर रेडर किसी को छुए बिना और बाॅक लाइन पार किए बिना लौट आए तो वह आउट माना जा सकता है।

बाॅक लाइन से एक मीटर आगे बोनस लाइन होती है। जब विपक्षी पाले में 6 या 7 डिफेंडर मौजूद हों, तब रेडर अगर बोनस लाइन पार कर ले, यानी एक पैर बोनस लाइन के पार जमीन पर हो और दूसरा पैर हवा में, तो उसे बोनस अंक मिलता है। बोनस अंक लेने के बाद अगर रेडर पकड़ा जाए, तब भी बोनस का अंक उसकी टीम के खाते में रहता है।

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टैकल और सुपर टैकल

अगर डिफेंडर रेडर को पकड़ लें और 30 सेकंड पूरे होने तक या उसके कैंट टूटने तक अपने पाले में रोक लें, तो रेडर आउट होता है और डिफेंडिंग टीम को एक अंक मिलता है। इसे टैकल कहते हैं।

जब डिफेंडिंग टीम के पास मैदान पर सिर्फ तीन या उससे कम खिलाड़ी हों और वे रेडर को पकड़ लें, तो इसे सुपर टैकल कहते हैं। AKFI के नियमों के मुताबिक सुपर टैकल पर डिफेंडिंग टीम को 2 अंक मिलते हैं। यह नियम कमजोर हालत वाली टीम को वापसी का मौका देता है।

आउट और रिवाइवल

कबड्डी में आउट हुए खिलाड़ी हमेशा के लिए बाहर नहीं होते। जब कोई टीम विपक्ष के किसी खिलाड़ी को आउट करती है, तो उस टीम का एक आउट खिलाड़ी वापस मैदान में आ जाता है। इसे रिवाइवल कहते हैं। खिलाड़ी उसी क्रम में लौटते हैं जिस क्रम में वे आउट हुए थे।

लोना यानी ऑल आउट

अगर कोई टीम विपक्ष के सभी 7 खिलाड़ियों को आउट कर दे, तो उसे लोना या ऑल आउट कहते हैं। AKFI के नियमों के अनुसार लोना करने वाली टीम को 2 अतिरिक्त अंक मिलते हैं और ऑल आउट हुई पूरी टीम फिर से मैदान में लौट आती है। मैच में लोना अक्सर निर्णायक मोड़ साबित होता है।

डू ऑर डाई रेड

अगर किसी टीम की लगातार दो रेड खाली जाएं, यानी उनमें कोई अंक न मिले, तो तीसरी रेड डू ऑर डाई रेड होती है। इसमें रेडर को अंक लेना ही होता है, वरना वह आउट माना जाता है। यह नियम खेल को तेज बनाता है, ताकि टीमें सिर्फ समय न बिताएं।

गोल्डन रेड

नॉकआउट मुकाबलों में तय समय के बाद भी स्कोर बराबर रहे तो टाई-ब्रेकर के नियम लागू होते हैं। AKFI के नियमों में गोल्डन रेड का प्रावधान है, जिसमें अंक लेने वाली टीम मैच जीत जाती है।

अंक तालिका एक नजर में

  • रेड में हर छुए गए डिफेंडर पर: 1 अंक
  • बोनस लाइन पार करने पर: 1 अंक
  • टैकल: 1 अंक
  • सुपर टैकल: 2 अंक
  • लोना: 2 अतिरिक्त अंक

कबड्डी में एक टीम में कितने खिलाड़ी होते हैं

मैदान पर हर टीम के 7 खिलाड़ी होते हैं, बाकी खिलाड़ी विकल्प के रूप में बाहर रहते हैं।

बोनस अंक कब नहीं मिलता

बोनस अंक तभी मिलता है जब विपक्षी पाले में 6 या 7 डिफेंडर मौजूद हों। इससे कम डिफेंडर होने पर बोनस लाइन का नियम लागू नहीं होता।

स्रोत: Amateur Kabaddi Federation of India: Rules of Kabaddi, Pro Kabaddi: Kabaddi Rules (archived)

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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