ताज़ा खबर
ग्रेट बैरियर रीफ: दुनिया का सबसे बड़ा प्रवाल भित्ति तंत्र, 2300 किलोमीटर में फैले हजारों रीफ और बार बार की कोरल ब्लीचिंग का खतरा What Is ASEAN? Members, How It Works and Why It Matters for India’s Act East Policy BREAKING: दिल्ली में प्रदूषण रोकने के लिए नई पाबंदियां, कल से बदलेंगे नियम राष्ट्रीय बांस मिशन: बांस की खेती, नर्सरी और प्रोसेसिंग यूनिट पर सरकारी मदद, खेत में उगे बांस को पेड़ की श्रेणी से बाहर करने का फायदा BREAKING: दिल्ली की हवा 8 साल में सबसे साफ, AQI आंकड़ों ने सबको चौंकाया Govardhan Puja and Annakut: The Story of Krishna Lifting the Hill and How the Festival Is Celebrated शादी के मौसम में खर्च कैसे संभालें: उपहार, कपड़े और यात्रा के लिए बजट, बचत और कर्ज से बचने के तरीके BREAKING: ED detains SP leader Azam Khan from outside Rampur jail after bail
ट्रेंडिंग
आपका पैसा

ELSS क्या है: 3 साल लॉक इन वाला टैक्स सेविंग म्यूचुअल फंड, नए आयकर कानून में कटौती और LTCG के नियम

ELSS को टैक्स बचाने वाला इक्विटी फंड कहा जाता है। जानिए यह कैसे काम करता है और किन बातों का ध्यान रखें।

म्यूचुअल फंड निवेश और ग्राफ का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • टैक्स बचाने के लिए लोग अक्सर PPF, जीवन बीमा या टैक्स सेविंग FD जैसे विकल्प चुनते हैं।
  • ELSS में निवेश किया गया पैसा 3 साल तक नहीं निकाला जा सकता। टैक्स बचत वाले विकल्पों में यह सबसे छोटे लॉक इन में से माना जाता है।
  • 3 साल के लॉक इन के बाद यूनिट बेचने पर होने वाला मुनाफा लंबी अवधि का पूंजीगत लाभ यानी LTCG माना जाता है।
  • जो लोग पुरानी टैक्स व्यवस्था में हैं, कम से कम 3 से 5 साल या उससे ज्यादा समय के लिए निवेश कर सकते हैं और बाजार के उतार चढ़ाव को सह सकते हैं, उनके लिए ELSS एक विकल्प हो सकता है।

टैक्स बचाने के लिए लोग अक्सर PPF, जीवन बीमा या टैक्स सेविंग FD जैसे विकल्प चुनते हैं। इन्हीं में एक विकल्प ELSS भी है, जो शेयर बाजार से जुड़ा म्यूचुअल फंड है। ELSS का पूरा नाम इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम है। इसे टैक्स बचत और लंबी अवधि में पूंजी बढ़ाने, दोनों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इस लेख में जानिए ELSS कैसे काम करता है, इसके टैक्स नियम क्या हैं और निवेश से पहले किन बातों का ध्यान रखें।

ELSS क्या है

SEBI की निवेशक जागरूकता वेबसाइट के अनुसार ELSS एक इक्विटी आधारित म्यूचुअल फंड है, जिसमें 3 साल का अनिवार्य लॉक इन होता है। ऐसे फंड को अपने पैसे का कम से कम 80 प्रतिशत हिस्सा शेयरों और शेयरों से जुड़े साधनों में लगाना होता है। यानी इसमें रिटर्न शेयर बाजार के उतार चढ़ाव पर निर्भर करता है।

मुख्य बातें: म्यूचुअल फंड निवेश और ग्राफ का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

3 साल का लॉक इन

ELSS में निवेश किया गया पैसा 3 साल तक नहीं निकाला जा सकता। टैक्स बचत वाले विकल्पों में यह सबसे छोटे लॉक इन में से माना जाता है। तुलना के लिए, PPF की अवधि 15 साल और टैक्स सेविंग FD का लॉक इन 5 साल का होता है। 3 साल पूरे होने के बाद भी पैसा निकालना जरूरी नहीं है, आप चाहें तो निवेश जारी रख सकते हैं।

SIP में लॉक इन कैसे गिना जाता है

वैल्यू रिसर्च के अनुसार ELSS में SIP से निवेश करने पर हर किस्त का अपना अलग 3 साल का लॉक इन होता है। मान लीजिए आपने जनवरी 2027 से हर महीने SIP शुरू की, तो जनवरी 2027 की किस्त जनवरी 2030 में खुलेगी, फरवरी 2027 की किस्त फरवरी 2030 में, और इसी तरह आगे। इसलिए SIP बंद करने के बाद भी पूरी रकम एक साथ नहीं निकलती।

यह भी पढ़ें: दिवाली पर बच्चों को शेयर या म्यूचुअल फंड गिफ्ट करें: नाबालिग का खाता, अभिभावक के नियम और टैक्स | SIP क्या है: म्यूचुअल फंड में हर महीने निवेश कैसे काम करता है, शुरुआत से पहले जानें जरूरी बातें

टैक्स कटौती: नया कानून

एक अप्रैल 2026 से आयकर अधिनियम 2025 लागू हो चुका है। ClearTax के अनुसार नए कानून में पुरानी धारा 80C की जगह धारा 123 और अनुसूची XV ने ली है। इसमें कुल कटौती की सीमा 1.5 लाख रुपये ही है और ELSS, PPF, जीवन बीमा प्रीमियम, बच्चों की ट्यूशन फीस और होम लोन का मूलधन जैसे विकल्प इसमें शामिल हैं। सबसे अहम बात यह है कि यह कटौती केवल पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनने वालों को मिलती है। नई टैक्स व्यवस्था में ELSS निवेश पर कोई कटौती नहीं है।

रिडेम्प्शन पर टैक्स

3 साल के लॉक इन के बाद यूनिट बेचने पर होने वाला मुनाफा लंबी अवधि का पूंजीगत लाभ यानी LTCG माना जाता है। मौजूदा नियमों के अनुसार एक वित्त वर्ष में इक्विटी से 1.25 लाख रुपये तक का LTCG टैक्स फ्री है। इससे ज्यादा मुनाफे पर 12.5 प्रतिशत टैक्स लगता है। डिविडेंड मिलने पर वह आपकी आय में जुड़ता है और स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है।

जोखिम समझें

ELSS में रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती। शेयर बाजार गिरने पर फंड की वैल्यू भी गिर सकती है और 3 साल बाद भी नुकसान में होना संभव है। इसलिए इसे केवल टैक्स बचाने का साधन न समझें। अगर आप बाजार का जोखिम नहीं ले सकते, तो PPF या दूसरी सुरक्षित योजनाएं बेहतर हो सकती हैं।

ELSS कैसे चुनें

  • फंड का लंबी अवधि का प्रदर्शन देखें, केवल पिछले एक साल का नहीं।
  • एक्सपेंस रेश्यो यानी फंड का सालाना खर्च देखें। डायरेक्ट प्लान में यह आम तौर पर कम होता है।
  • फंड मैनेजर और फंड हाउस की साख पर ध्यान दें।
  • बहुत सारे ELSS फंड में थोड़ा थोड़ा निवेश करने की जगह एक या दो अच्छे फंड चुनें।

निवेश कैसे करें

ELSS में म्यूचुअल फंड कंपनी की वेबसाइट, पंजीकृत वितरक या निवेश ऐप के जरिए निवेश किया जा सकता है। इसके लिए KYC पूरा होना जरूरी है। एकमुश्त निवेश या हर महीने SIP, दोनों विकल्प मौजूद हैं। टैक्स बचत के लिए वित्त वर्ष के आखिरी महीनों में जल्दबाजी करने की जगह साल की शुरुआत से SIP करना बेहतर माना जाता है।

किसके लिए सही

जो लोग पुरानी टैक्स व्यवस्था में हैं, कम से कम 3 से 5 साल या उससे ज्यादा समय के लिए निवेश कर सकते हैं और बाजार के उतार चढ़ाव को सह सकते हैं, उनके लिए ELSS एक विकल्प हो सकता है। नई टैक्स व्यवस्था वालों के लिए यह एक सामान्य इक्विटी फंड की तरह ही है।

ELSS का लॉक इन कितना है

3 साल।

क्या नई टैक्स व्यवस्था में ELSS पर कटौती मिलती है

नहीं, कटौती केवल पुरानी व्यवस्था में है।

ELSS पर LTCG टैक्स कितना है

एक वित्त वर्ष में 1.25 लाख रुपये से ज्यादा मुनाफे पर 12.5 प्रतिशत।

SIP में ELSS का लॉक इन कैसे गिना जाता है

हर किस्त का अलग 3 साल का लॉक इन होता है।

सलाह लें: म्यूचुअल फंड निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश से पहले योजना से जुड़े दस्तावेज पढ़ें और किसी SEBI पंजीकृत निवेश सलाहकार या टैक्स विशेषज्ञ से सलाह लें।

स्रोत: SEBI Investor: A guide to ELSS, ClearTax: Section 123 of Income Tax Act 2025, Value Research: ELSS lock in for SIP

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

अपनी राय लिखें

WhatsApp Facebook X