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डिजिटल अरेस्ट ठगी से कैसे बचें: वीडियो कॉल पर नकली पुलिस, कानून में ऐसी कोई गिरफ्तारी नहीं, 1930 पर तुरंत शिकायत

कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई चीज नहीं है। फिर भी इस नाम पर लोगों से लाखों रुपये ठगे जा रहे हैं।

मोबाइल पर संदिग्ध वीडियो कॉल और चेतावनी का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • पिछले कुछ सालों में साइबर ठगी का एक नया तरीका तेजी से फैला है, जिसे डिजिटल अरेस्ट कहा जाता है।
  • भारत के किसी कानून में वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार करने या घर में बंद रखने का प्रावधान नहीं है।
  • अगर पैसे ट्रांसफर हो गए हों, तो बिना देर किए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें।
  • इस ठगी के शिकार अक्सर बुजुर्ग, रिटायर कर्मचारी और अकेले रहने वाले लोग होते हैं।

पिछले कुछ सालों में साइबर ठगी का एक नया तरीका तेजी से फैला है, जिसे डिजिटल अरेस्ट कहा जाता है। इसमें अपराधी खुद को पुलिस, CBI, कस्टम, नारकोटिक्स विभाग या किसी जांच एजेंसी का अफसर बताते हैं और वीडियो कॉल पर लोगों को घंटों तक डराकर रखते हैं। फिर केस से नाम हटाने या जांच के नाम पर पैसे ट्रांसफर करवा लेते हैं। सरकार और पुलिस बार बार साफ कर चुकी है कि कानून में डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई चीज नहीं है। इस लेख में जानिए यह ठगी कैसे होती है, इसके संकेत क्या हैं और शिकार होने पर तुरंत क्या करें।

ठगी कैसे शुरू होती है

आम तौर पर पहला कॉल किसी कूरियर कंपनी, टेलीकॉम विभाग या बैंक के नाम से आता है। कहा जाता है कि आपके नाम से भेजे गए पार्सल में ड्रग्स, नकली पासपोर्ट या गैरकानूनी सामान मिला है, या आपके आधार और मोबाइल नंबर का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है। फिर कॉल को किसी नकली पुलिस अफसर से जोड़ दिया जाता है। वह वीडियो कॉल पर वर्दी में दिखता है और पीछे थाने जैसा सेटअप होता है।

मुख्य बातें: मोबाइल पर संदिग्ध वीडियो कॉल और चेतावनी का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

डराने के तरीके

  • नकली गिरफ्तारी वारंट, कोर्ट के आदेश या एजेंसी के लेटर भेजे जाते हैं।
  • कहा जाता है कि आप जांच में हैं और किसी से बात नहीं कर सकते।
  • वीडियो कॉल बंद न करने और कमरे से बाहर न जाने को कहा जाता है।
  • परिवार को बताने पर उन्हें भी फंसाने की धमकी दी जाती है।
  • जांच पूरी होने तक पैसे किसी सरकारी खाते में जमा करने को कहा जाता है, जो असल में ठगों का खाता होता है।

सच्चाई क्या है

भारत के किसी कानून में वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार करने या घर में बंद रखने का प्रावधान नहीं है। पुलिस या कोई जांच एजेंसी पूछताछ के लिए लिखित नोटिस देती है और व्यक्ति को थाने या दफ्तर बुलाया जाता है। कोई भी असली एजेंसी जांच के नाम पर आपसे किसी खाते में पैसे ट्रांसफर करने को नहीं कहती। अक्टूबर 2024 में प्रधानमंत्री ने भी मन की बात कार्यक्रम में इस ठगी के बारे में लोगों को सावधान किया था और रुको, सोचो, एक्शन लो का मंत्र दिया था।

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पहचान के संकेत

  • अनजान नंबर से कॉल, खासकर अंतरराष्ट्रीय या +91 के अलावा किसी कोड से।
  • वीडियो कॉल पर पूछताछ और तुरंत फैसला लेने का दबाव।
  • आधार, बैंक खाते और OTP की जानकारी मांगना।
  • पैसे जमा करने के बाद लौटाने का वादा।
  • किसी से बात न करने की सख्त हिदायत।

कॉल आए तो क्या करें

सबसे पहले घबराएं नहीं और कॉल काट दें। कोई निजी या बैंक की जानकारी न दें। अगर कोई खुद को अफसर बताता है, तो उस एजेंसी के आधिकारिक नंबर पर खुद फोन करके पुष्टि करें। परिवार के किसी सदस्य या भरोसेमंद व्यक्ति को तुरंत बताएं। ठग सबसे ज्यादा अकेलेपन और डर का फायदा उठाते हैं।

पैसे चले गए तो तुरंत शिकायत

अगर पैसे ट्रांसफर हो गए हों, तो बिना देर किए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें। शुरुआती घंटों में शिकायत करने पर पैसा रोकने की संभावना बढ़ जाती है, क्योंकि बैंक संदिग्ध खाते को फ्रीज कर सकते हैं। साथ ही cybercrime.gov.in पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें। अपने बैंक को भी तुरंत सूचना दें।

शिकायत के लिए क्या रखें

  • कॉल करने वाले नंबर और वीडियो कॉल का स्क्रीनशॉट।
  • भेजे गए नकली दस्तावेज।
  • पैसे ट्रांसफर की रसीद, UTR नंबर और खाते का ब्योरा।
  • कॉल का समय और तारीख।

संदिग्ध कॉल की रिपोर्ट

अगर ठगी नहीं हुई लेकिन संदिग्ध कॉल या मैसेज आया, तो दूरसंचार विभाग के संचार साथी पोर्टल पर चक्षु सुविधा के जरिए उसकी रिपोर्ट कर सकते हैं। इससे ऐसे नंबरों पर कार्रवाई में मदद मिलती है।

बुजुर्गों को खास तौर पर बताएं

इस ठगी के शिकार अक्सर बुजुर्ग, रिटायर कर्मचारी और अकेले रहने वाले लोग होते हैं। घर के बड़ों को साफ बताएं कि पुलिस फोन पर गिरफ्तारी नहीं करती और कोई भी पैसे मांगे तो पहले परिवार से बात करें।

बैंक और ऐप की सुरक्षा सेटिंग

अपने मोबाइल बैंकिंग और UPI ऐप में लेन देन की दैनिक सीमा जरूरत के हिसाब से कम रखें। बैंक से आने वाले हर SMS और ईमेल अलर्ट पर नजर रखें। स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस वाले ऐप किसी अनजान के कहने पर कभी डाउनलोड न करें, क्योंकि इनसे ठग आपके फोन की स्क्रीन देख सकते हैं। सोशल मीडिया पर अपनी निजी जानकारी, यात्रा की योजना और परिवार की डिटेल कम से कम साझा करें। ठग अक्सर इन्हीं जानकारियों से भरोसा जीतने की कोशिश करते हैं। अगर कोई कॉल करने वाला आपका पूरा नाम, पता या आधार के कुछ अंक बता दे, तो भी यह मत मानिए कि वह असली अफसर है।

क्या डिजिटल अरेस्ट कानूनी है

नहीं, कानून में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।

ठगी होने पर कहां शिकायत करें

1930 हेल्पलाइन पर और cybercrime.gov.in पर।

संदिग्ध कॉल की रिपोर्ट कहां करें

संचार साथी पोर्टल की चक्षु सुविधा पर।

स्रोत: National Cyber Crime Reporting Portal, Sanchar Saathi: Chakshu, PIB: Advisory on digital arrest

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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