ओडिशा प्रशासन ने उन क्षेत्रों से नागरिकों को स्थानांतरित करने का कार्य तेज कर दिया है जहां चक्रवात मुरासु का खतरा सबसे अधिक है। बंगाल की खाड़ी में मुरासु के एक गंभीर चक्रवाती तूफान के रूप में विकसित होने के बाद राज्य सरकार ने सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता दी है। हालांकि इस तूफान के पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश के तट से टकराने की संभावना है, लेकिन इसके प्रभाव से ओडिशा के दक्षिणी हिस्सों में भारी वर्षा होने का अनुमान लगाया गया है। राज्य के आपदा प्रबंधन तंत्र को पूरी तरह से सक्रिय कर दिया गया है ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटा जा सके।

चक्रवात मुरासु की वर्तमान स्थिति और गति का विवरण
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी किए गए नवीनतम बुलेटिन के अनुसार, गंभीर चक्रवाती तूफान मुरासु 25 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से आगे बढ़ रहा है। मौसम विभाग ने इसकी वर्तमान स्थिति के बारे में विस्तृत जानकारी साझा की है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह तूफान तमिलनाडु के चेन्नई से लगभग 200 किलोमीटर पूर्व-उत्तर-पूर्व दिशा में केंद्रित था। इसके अलावा, यह आंध्र प्रदेश के नेल्लोर से लगभग 210 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण-पूर्व में स्थित था। मौसम वैज्ञानिकों ने इसे मछलीपट्टनम से 270 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिण-पूर्व, कवाली से 220 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण-पूर्व और ओंगोल से 260 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में ट्रैक किया है। तूफान की यह स्थिति दर्शाती है कि यह तट के काफी करीब पहुंच चुका है और इसकी तीव्रता लगातार बनी हुई है।
लैंडफॉल की भविष्यवाणी और हवा की तीव्रता
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, इस चक्रवाती तूफान के उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ने की प्रबल संभावना है। यह सोमवार, 2 नवंबर 2026 की रात 11:30 बजे से मंगलवार, 3 नवंबर 2026 की सुबह 4:00 बजे के बीच दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तट को पार कर सकता है। लैंडफॉल की यह प्रक्रिया नेल्लोर और नरसापुर के बीच, ओंगोल के निकट होने की उम्मीद है। इस दौरान हवा की गति अत्यंत तीव्र रहने का अनुमान है। विशेषज्ञों का कहना है कि लैंडफॉल के समय हवा की निरंतर गति 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटा रह सकती है, जो झोंकों के साथ 120 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। इस उच्च गति वाली हवाओं के कारण तटीय क्षेत्रों में व्यापक प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई है।
ओडिशा में तैयारी और प्रशासन की सतर्कता
ओडिशा के आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने स्थिति की समीक्षा करते हुए कहा कि भले ही तूफान का मुख्य केंद्र आंध्र प्रदेश का तट हो, लेकिन इसका असर ओडिशा के कई हिस्सों पर पड़ेगा। विशेष रूप से राज्य के दक्षिणी जिले जैसे गंजम, गजपति, रायगड़ा, कोरापुट और मलकनगिरी इससे प्रभावित हो सकते हैं। मंत्री ने जानकारी दी कि सभी जिला कलेक्टरों को अलर्ट पर रखा गया है, जबकि दक्षिणी जिलों के अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य सरकार ने संवेदनशील क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी है। इसके साथ ही, आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को और अधिक सुदृढ़ किया गया है ताकि किसी भी प्रकार की जनहानि को रोका जा सके।
बचाव और आपदा प्रबंधन दलों की तैनाती
राज्य में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 300 से अधिक बचाव दलों को पूर्व-नियोजित स्थानों पर तैनात किया गया है। इन दलों में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल यानी एनडीआरएफ, ओडिशा आपदा रैपिड एक्शन फोर्स यानी ओड्राफ और ओडिशा अग्निशमन सेवा के कर्मी शामिल हैं। मंत्री सुरेश पुजारी ने बताया कि जो टीमें चक्रवात अर्नब के दौरान तैनात की गई थीं, उन्हें चक्रवात मुरासु की गंभीरता को देखते हुए उन्हीं स्थानों पर बनाए रखा गया है। यह निरंतरता बचाव कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगी। इसके अतिरिक्त, एक महत्वपूर्ण जानकारी यह भी सामने आई है कि ओडिशा में कुछ उपकरणों की कमी है, जिसके कारण भूस्खलन के पीड़ितों को बचाने के लिए विस्फोटक सामग्री का उपयोग करने पर विचार किया जा सकता है। यह कदम कठिन परिस्थितियों में राहत कार्यों को गति देने के लिए उठाया जा सकता है।
क्षेत्रीय मौसम पूर्वानुमान और जिलों में अलर्ट
मौसम विभाग ने सोमवार, 2 नवंबर 2026 को गजपति और गंजम जिलों के कुछ स्थानों पर भारी बारिश की भविष्यवाणी की है। इन जिलों में गरज के साथ बिजली गिरने और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी संभावना है। इसके अलावा, रायगड़ा, कोरापुट, मलकनगिरी, पुरी और खुर्दा जैसे अन्य जिलों में भी वर्षा होने की उम्मीद जताई गई है। राज्य के कई हिस्सों में पहले से ही हल्की बारिश शुरू हो चुकी है, जिसके आने वाले समय में और तेज होने के संकेत मिले हैं। प्रशासन ने नागरिकों को मौसम की चेतावनियों का पालन करने और सुरक्षित रहने की सलाह दी है।
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स्रोत: The Hindu





