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Chirag Paswan: चिराग पासवान का चुनाव आयोग को सलाह, SIR विवाद में बात मजबूती से रखें

Chirag Paswan
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सारांश

  • चिराग पासवान ने SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग को अपनी बात मजबूती से रखने की सलाह दी।
  • उन्होंने कहा कि आयोग को जनता के मन में उठ रहे सवालों को स्पष्ट करना चाहिए।
  • चिराग ने चुनाव प्रक्रिया में जनता के भरोसे को महत्वपूर्ण बताया।
  • यह बयान CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की विपक्षी मांगों के बीच आया है।
  • चुनाव आयोग ने SIR को लेकर सामने आई असहमति की रिपोर्ट पर अपना पक्ष रखा है।
  • आयोग का कहना है कि आंतरिक टिप्पणियां और अलग-अलग सुझाव संस्थागत निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

Chirag Paswan: SIR विवाद और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरोध के बीच केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने चुनाव आयोग से कहा है कि वह अपनी बातें मजबूती से रखे। उनका तर्क है कि आयोग पर सवाल उठें तो जवाब भी आयोग को देना चाहिए, ताकि जनता का विश्वास टूटे नहीं।

कांग्रेस समेत विपक्ष आज दिल्ली और राज्यों में आयोग के खिलाफ प्रदर्शन कर रहा है। दिल्ली में कार्यालय बाहर विरोध होगा। 28 तारीख से जिला कमेटियों को कलेक्ट्रेट तक मार्च के निर्देश दिए गए हैं। बिहार में आरजेडी जिला मुख्यालयों पर उतरेगी। दिल्ली के जंतर मंतर पर एआईएसए का प्रदर्शन होना है।

कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दोनों सदनों में महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस अगले दो हफ्तों के भीतर दिया जा सकता है। ड्राफ्ट तैयार हो रहा है। नोटिस के लिए सत्र चलना जरूरी नहीं बताया गया।

Chirag Paswan: चिराग पासवान ने चुनाव आयोग से क्या कहा?

राहुल गांधी की इस्तीफा मांग के संदर्भ में चिराग पासवान ने कहा कि अगर आयोग पर ऐसे सवाल खड़े हो रहे हैं तो यह जिम्मेदारी भी आयोग की है कि वह अपने पक्ष को मजबूती से रखे। चुनाव आयोग को जनता का विश्वास बनाए रखना है। चुनावी प्रक्रिया पर संदेह खड़ा होना गलत है। इसलिए बात साफ और मजबूत हो, ताकि जनता के मन में शंका न रहे।

यह सलाह विपक्ष के हमले का जवाब आयोग की ओर से आने की अपेक्षा है। केंद्रीय मंत्री ने इस्तीफा मांग को खारिज करने वाला अलग फैसला नहीं सुनाया। उन्होंने प्रक्रिया पर जनता का भरोसा बनाए रखने को प्राथमिक बताया। सवाल उठना और जवाब न देना, दोनों को वे गलत दिशा मानते दिखे।

एसआईआर विवाद पहले से चल रहा है। विपक्ष कटौती और पक्षपात का आरोप लगाता है। आयोग सुधार और सर्वसम्मति की भाषा इस्तेमाल करता है। चिराग पासवान उसी खाली जगह को भरने की बात कर रहे हैं जहां आरोप तेज हैं और आधिकारिक व्याख्या कम सुनाई देती है।

आज देश भर में विरोध की रूपरेखा क्या है?

कांग्रेस आज दिल्ली समेत राज्यों में सड़क पर है। दिल्ली में चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर प्रदर्शन होगा। राज्यों में आयोग के दफ्तरों के सामने विरोध होगा। 28 तारीख से सभी जिला कमेटियों को कलेक्ट्रेट तक मार्च निकालने के निर्देश हैं। यानी राजधानी के बाद जिला मुख्यालय वाला दूसरा चरण तय है।

बिहार में राष्ट्रीय जनता दल आज जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करेगी। दिल्ली के जंतर मंतर पर एआईएसए उतरेगी। विरोध एक दिन का एकल कार्यक्रम नहीं रह गया। केंद्र, राज्य कार्यालय, जिला कलेक्ट्रेट और छात्र मंच चार स्तरों पर फैल रहा है।

इस्तीफा मांग और महाभियोग की तैयारी सड़क कार्यक्रम के साथ चल रही है। प्रदर्शन दबाव बनाने का औजार है। संसदीय नोटिस कानूनी औजार है। दोनों एक ही मांग के इर्द गिर्द हैं, ज्ञानेश कुमार के पद से हटने या उनके विरुद्ध औपचारिक प्रस्ताव तक पहुंचने की।

Chirag Paswan: महाभियोग नोटिस की तैयारी कहां तक है?

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने SIR का किया बचाव, बोले- 'घुसपैठियों को वोट  का दुरुपयोग नहीं करने दिया जाएगा' - India TV Hindiकांग्रेस मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ संसद के दोनों सदनों में महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस लाएगी। विपक्षी दलों से संपर्क भी किया गया है। सूत्रों के अनुसार इसे अगले दो हफ्तों के भीतर पेश किया जाएगा। प्रस्ताव का ड्राफ्ट अभी तैयार हो रहा है। कुछ ही दिनों में दोनों सदनों में मोशन का नोटिस देने की योजना है।

स्रोत यह भी कहता है कि नोटिस देने के लिए सत्र की कार्यवाही जारी रहना जरूरी नहीं। यानी सदन चल रहा हो या न हो, नोटिस की तैयारी रुकने वाली नहीं बताई गई। यह कांग्रेस सूत्रों का दावा है, पटल पर रखा गया प्रस्ताव नहीं। ड्राफ्ट पूरा होने और अन्य दलों के लिखित समर्थन की स्थिति इस खबर में नहीं है।

महाभियोग संवैधानिक प्रक्रिया है। नोटिस देना पहला कदम है, पारित होना बहुत बाद का। फिलहाल सार्वजनिक जानकारी तैयारी और समयसीमा के इरादे तक है।

आयोग के अंदर मतभेद वाले दावे पर आधिकारिक जवाब क्या है?

एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि आयोग के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। एसआईआर को लेकर ज्ञानेश कुमार और बाकी दो चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद की खबरें आईं। विपक्ष ने इसे बड़ा मुद्दा बनाया।

चुनाव आयोग का जवाब यह है कि किसी भी संस्थान में विचार विमर्श के दौरान अलग मत और टिप्पणियां सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। उसके सभी आदेश पिछले एक वर्ष में आयोग के सर्वसम्मत निर्णयों का परिणाम हैं। यानी असहमति की खबर को आयोग चर्चा मानता है, दरार नहीं।

रिपोर्ट दावा है, आयोग सफाई है। दोनों को मिलाकर नतीजा नहीं निकाला जा सकता कि आंतरिक वोट कितने टूटे। विपक्ष रिपोर्ट को हथियार बना रहा है। चिराग पासवान आयोग से सार्वजनिक सफाई मजबूत करने को कह रहे हैं। तीनों परतें एक दूसरे से जुड़ी हैं। एसआईआर विवाद का राजनीतिक तापमान इन्हीं तीन परतों से बढ़ रहा है।

Chirag Paswan: इस सलाह और विरोध का एक साथ क्या मतलब है?

एक ओर विपक्ष सड़क, जिला मार्च, जंतर मंतर और महाभियोग नोटिस से दबाव बना रहा है। दूसरी ओर केंद्रीय मंत्री आयोग को चुप न रहने की सलाह दे रहे हैं। तीसरी ओर आयोग कह रहा है फैसले सर्वसम्मत हैं। चिराग पासवान का वाक्य विपक्ष से टकराने से ज्यादा संस्था से संवाद मांगता है। वे कह रहे हैं सवाल उठे तो जवाब भी उतना ही साफ हो कि जनता की शंका टिके नहीं।

आज का प्रदर्शन दिल्ली कार्यालय और राज्य दफ्तरों तक है। 28 से कलेक्ट्रेट चरण शुरू होगा। दो हफ्तों में नोटिस का इरादा है। एसआईआर विवाद इन तारीखों के बीच ठंडा पड़ने वाला नहीं दिखता। आयोग यदि अपनी व्याख्या और विस्तार से रखे, जैसा मंत्री कह रहे हैं, तो बहस आंकड़ों और प्रक्रिया पर लौट सकती है। यदि सड़क और नोटिस ही हावी रहे, तो बहस व्यक्ति और इस्तीफे पर टिकी रहेगी। फिलहाल दोनों पटरियां साथ चल रही हैं।

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About The Author

Adarsh Pandey Author at Democratic Bharat Live

लेखक

Adarsh Pandey

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