ताज़ा खबर
ग्रेट बैरियर रीफ: दुनिया का सबसे बड़ा प्रवाल भित्ति तंत्र, 2300 किलोमीटर में फैले हजारों रीफ और बार बार की कोरल ब्लीचिंग का खतरा What Is ASEAN? Members, How It Works and Why It Matters for India’s Act East Policy BREAKING: दिल्ली में प्रदूषण रोकने के लिए नई पाबंदियां, कल से बदलेंगे नियम राष्ट्रीय बांस मिशन: बांस की खेती, नर्सरी और प्रोसेसिंग यूनिट पर सरकारी मदद, खेत में उगे बांस को पेड़ की श्रेणी से बाहर करने का फायदा BREAKING: दिल्ली की हवा 8 साल में सबसे साफ, AQI आंकड़ों ने सबको चौंकाया Govardhan Puja and Annakut: The Story of Krishna Lifting the Hill and How the Festival Is Celebrated शादी के मौसम में खर्च कैसे संभालें: उपहार, कपड़े और यात्रा के लिए बजट, बचत और कर्ज से बचने के तरीके BREAKING: ED detains SP leader Azam Khan from outside Rampur jail after bail
ट्रेंडिंग
भारत

CBSE Class 6 Three Language Policy: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा से राहत

CBSE Class 6 Three Language Policy

सारांश

  • CBSE Class 6 Three Language Policy: सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 6 के विद्यार्थियों को तीन-भाषा नीति में राहत दी।
  • भविष्य की कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा को लेकर राहत दी गई है।
  • तीसरी भाषा की स्कूल स्तर पर पढ़ाई जारी रहेगी।
  • आंतरिक मूल्यांकन में कम अंक आने पर केवल इसी आधार पर छात्र को फेल नहीं किया जाएगा।
  • कक्षा 7 से 9 के छात्रों को दी गई संक्रमणकालीन राहत के आधार पर कक्षा 6 को भी शामिल किया गया।
  • फैसले का संबंध CBSE की Three Language Policy से है।
  • सरकार और CBSE ने नई भाषा व्यवस्था लागू करने की तैयारियों की जानकारी अदालत को दी।
  • छात्रों पर अचानक नई परीक्षा व्यवस्था लागू करने के बजाय चरणबद्ध बदलाव पर जोर दिया गया।
  • अभिभावकों को आगे के आधिकारिक दिशा-निर्देशों के लिए CBSE की सूचना का इंतजार करना चाहिए।

CBSE Class 6 Three Language Policy: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा लागू की जा रही त्रि-भाषा सूत्र (Three Language Policy) को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत ने सोमवार को लाखों स्कूली विद्यार्थियों और अभिभावकों के हित में अत्यंत महत्वपूर्ण व ऐतिहासिक दिशा-निर्देश जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि वर्तमान शैक्षणिक सत्र में कक्षा 6 में अध्ययनरत विद्यार्थियों को भविष्य में कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा के दौरान तीसरी भाषा की अनिवार्य बोर्ड परीक्षा देने के दबाव से मुक्त रखा जाएगा। इस न्यायिक हस्तक्षेप के उपरांत, मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों को कक्षा 10 में पहुंचने पर केवल स्कूल स्तर के आंतरिक मूल्यांकन (Internal Assessment) से गुजरना होगा, जिससे मुख्य बोर्ड परीक्षा परिणाम में तीसरी भाषा के अंक अनिवार्य रूप से बाध्यकारी नहीं रहेंगे।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की तीन सदस्यीय विशेष पीठ ने यह व्यवस्था उन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दी, जिनमें बीच सत्र में भाषा नीति में किए जाने वाले परिवर्तनों के चलते विद्यार्थियों के मानसिक तनाव और शैक्षणिक भ्रम का मुद्दा उठाया गया था। शीर्ष अदालत ने रेखांकित किया कि जो छात्र पहले से एक स्थापित पाठ्यक्रम और भाषा संरचना के तहत प्रवेश ले चुके हैं, उन पर अचानक नए नियम थोपना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुकूल नहीं होगा।

CBSE Class 6 Three Language Policy: कक्षा 6 के विद्यार्थियों को क्यों मिली छूट? समानता के विधिक आधार पर फैसला

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि केंद्र सरकार और सीबीएसई ने पूर्व में एक हलफनामा दाखिल कर कक्षा 7, 8 और 9 के छात्रों को नए त्रि-भाषा नियमों की अनिवार्य बोर्ड परीक्षा से छूट प्रदान कर दी थी। इन कक्षाओं के छात्रों के लिए तीसरी भाषा का मूल्यांकन केवल आंतरिक आधार पर तय किया गया था, ताकि उन्हें 10वीं की बोर्ड परीक्षा में अतिरिक्त भाषा विषय का बोझ न उठाना पड़े।

शीर्ष अदालत की पीठ ने कड़ा संज्ञान लेते हुए कहा कि जब कक्षा 7 से 9 के छात्रों को यह संक्रमणकालीन सुरक्षा (Transitional Relief) प्रदान की जा चुकी है, तो ठीक उसी श्रेणी और पृष्ठभूमि में पढ़ रहे मौजूदा कक्षा 6 के विद्यार्थियों को इस लाभ से वंचित रखना पूर्णतः अतार्किक और भेदभावपूर्ण होगा। अदालत ने कहा कि कक्षा 6 में प्रवेश ले चुके विद्यार्थी भी उसी पुरानी व्यवस्था का हिस्सा थे, अतः उन्हें भी बिना किसी विधिक भेदभाव के समान सुरक्षा कवच मिलना अनिवार्य है।

पढ़ाई जारी रहेगी, बोर्ड परीक्षा का दबाव समाप्त: समझें फैसले का व्यावहारिक असर

अभिभावकों और शिक्षकों के लिए इस अदालती निर्देश के तकनीकी स्वरूप को समझना अत्यंत आवश्यक है। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का अर्थ यह कतई नहीं है कि विद्यालयों के पाठ्यक्रम से तीसरी भाषा को पूरी तरह विलोपित कर दिया गया है। छात्र विद्यालय स्तर पर पूर्व निर्धारित भाषा—चाहे वह संस्कृत हो, कोई क्षेत्रीय भाषा हो अथवा अन्य विदेशी या भारतीय भाषा—का नियमित अध्ययन करते रहेंगे।

बदलाव केवल यह हुआ है कि जब ये छात्र आगामी वर्षों में कक्षा 10 की अंतिम अखिल भारतीय माध्यमिक विद्यालय परीक्षा (AISSE) में बैठेंगे, तब प्रश्नपत्रों की मुख्य बोर्ड परीक्षा सूची में तीसरी भाषा को अनिवार्य उत्तीर्ण विषय के रूप में शामिल नहीं किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, अदालत ने कड़े शब्दों में यह भी विनिर्दिष्ट किया है कि यदि कोई छात्र आंतरिक मूल्यांकन या स्कूल स्तर पर तीसरी भाषा में अपेक्षित मानक अंक हासिल नहीं कर पाता है, तो केवल इस आधार पर उसे अनुत्तीर्ण (Fail) घोषित नहीं किया जाएगा और न ही उसे अगली कक्षा में पदोन्नत होने से रोका (Detain) जा सकेगा।

केंद्र सरकार और सीबीएसई का पक्ष: 99% स्कूल तैयार, किंतु छात्रों का हित सर्वोपरि

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए विधि अधिकारियों ने न्यायालय को अवगत कराया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के आलोक में त्रि-भाषा फार्मूले को देश भर के स्कूलों में प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक ढांचागत तैयारियां तेजी से पूरी की जा रही हैं। सरकार ने पीठ को सूचित किया कि सीबीएसई से संबद्ध लगभग 99 प्रतिशत निजी व सरकारी विद्यालय इस नई व्यवस्था को लागू करने हेतु पूरी तरह तैयार हैं और पर्याप्त संख्या में भाषा शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया भी गतिमान है।

तथापि, पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रशासनिक स्तर पर स्कूलों की तत्परता अपनी जगह महत्वपूर्ण हो सकती है, किंतु न्यायपालिका का प्राथमिक सरोकार उन मासूम विद्यार्थियों के मनोवैज्ञानिक और शैक्षणिक कल्याण से है जो पहले से व्यवस्था में पंजीकृत हैं। अदालत ने कहा कि भाषा नीति का उद्देश्य ज्ञान का क्षितिज विस्तृत करना है, न कि छात्रों पर परीक्षा का अनावश्यक भय थोपकर उनके मुख्य शैक्षणिक प्रदर्शन को बाधित करना। इसी कारण अदालत ने चरणबद्ध कार्यान्वयन (Phased Implementation) पर बल देते हुए कक्षा 6 को भी इस बार की एकमुश्त राहत के दायरे में शामिल किया।

अभिभावकों और शिक्षाविदों ने ली राहत की सांस: मुख्य विषयों पर केंद्रित रहेगा ध्यान

सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय का देश भर के अभिभावक संघों, शैक्षणिक विशेषज्ञों और सीबीएसई स्कूलों के प्रधानाचार्यों ने व्यापक स्वागत किया है। लंबे समय से यह चिंता व्यक्त की जा रही थी कि माध्यमिक स्तर पर गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, अंग्रेजी और मुख्य क्षेत्रीय भाषा के गहन पाठ्यक्रम के साथ-साथ एक नई तीसरी भाषा की बोर्ड स्तरीय तैयारी करना विद्यार्थियों के बौद्धिक संतुलन को बिगाड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूल स्तर पर आंतरिक आकलन की व्यवस्था बहाल रहने से छात्र बिना किसी तनाव और फेल होने के भय के सहज रूप से तीसरी भाषा की बुनियादी समझ विकसित कर सकेंगे। साथ ही, इससे विद्यार्थियों को बोर्ड परीक्षा के मुख्य 5 कोर विषयों की तैयारी और उच्चतर माध्यमिक कक्षाओं (11वीं-12वीं) में प्रवेश के लिए अपने समग्र प्रतिशत को सुधारने के लिए पर्याप्त समय और मानसिक एकाग्रता प्राप्त होगी।

CBSE Class 6 Three Language Policy:  चरणबद्ध सुधारों और व्यावहारिक नीति-निर्माण की मिसाल

सुप्रीम कोर्ट का यह न्यायिक निर्देश इस बात का सटीक उदाहरण प्रस्तुत करता है कि कैसे दूरदर्शी शैक्षणिक नीतियों को जमीनी धरातल पर उतारते समय छात्रों की व्यावहारिक परिस्थितियों और मानवीय संवेदनाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की मूल भावना का सम्मान करते हुए भी अदालत ने यह सुनिश्चित किया है कि नीतिगत बदलाव किसी भी वर्तमान छात्र के शैक्षणिक भविष्य के लिए संकट न बनें।

अब सीबीएसई बोर्ड द्वारा शीघ्र ही इस संबंध में एक विस्तृत प्रशासनिक परिपत्र (Official Circular) और अंकन योजना (Grading Scheme) जारी की जाएगी, जिसमें कक्षा 6 से 9 तक के विद्यार्थियों के आंतरिक मूल्यांकन के तौर-तरीके स्पष्ट किए जाएंगे। सभी संबद्ध विद्यालयों और अभिभावकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी असत्यापित अफवाह से दूर रहते हुए केवल सीबीएसई के आधिकारिक पोर्टल पर जारी होने वाले दिशा-निर्देशों का ही अनुसरण करें।

आधिकारिक जानकारी के लिए देखें: सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया

स्रोत: सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया (sci.gov.in)

यह भी पढ़ें

लेखक

Netsha Singh

नेत्शा सिंह डेमोक्रेटिक भारत लाइव में हिंदी न्यूज़ कंटेंट राइटर हैं। वे सरकारी योजनाओं, आपका पैसा, देश की खबरों और धर्म-आस्था से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। डिजिटल न्यूज़ लेखन में उन्हें लगभग एक साल का अनुभव है; इससे पहले वे खबर नगरी और ऑनलाइन ताज़ा खबर के साथ काम कर चुकी हैं और यूट्यूब पर समसामयिक विषयों पर कंटेंट भी बनाती हैं।

टिप्पणियां (5)

अपनी राय लिखें

WhatsApp Facebook X