Bareilly Agniveer Recruitment Scam: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में भारतीय सेना की प्रतिष्ठित जाट रेजीमेंट सेंटर (JRC) में चल रही अग्निवीर भर्ती रैली के दौरान भोले-भाले युवाओं को ठगी का शिकार बनाने वाले एक बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ है। कैंट थाना पुलिस और सेना की खुफिया शाखा ‘मिलिट्री इंटेलिजेंस’ (MI) ने एक संयुक्त और गोपनीय अभियान चलाकर भर्ती में फर्जीवाड़ा करने वाले गिरोह के पांच सक्रिय सदस्यों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपी भर्ती स्थल के आसपास सक्रिय रहकर दूर-दराज के जिलों से आए अभ्यर्थियों को शारीरिक दक्षता परीक्षा, शारीरिक माप-तौल (PST) और कठिन मेडिकल परीक्षण में पास कराने का झूठा आश्वासन देकर उनसे लाखों रुपये ऐंठने का प्रयास कर रहे थे।
सुरक्षा एजेंसियों ने आरोपियों के पास से छह स्मार्टफोन, नकद धनराशि, संदिग्ध लेनदेन के डिजिटल प्रमाण, फर्जी दस्तावेज, कूटरचित पहचान पत्र और दो वाहन बरामद किए हैं। इस मामले में एक अन्य प्रमुख सहयोगी के फरार होने की जानकारी मिली है, जिसकी तलाश में पुलिस की टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। सेना और स्थानीय पुलिस की इस त्वरित व सटीक कार्रवाई से भर्ती रैली के दौरान युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले एक संगठित गिरोह की जड़ों पर कड़ा प्रहार हुआ है।
Bareilly Agniveer Recruitment Scam: जाट रेजीमेंट सेंटर के हरभजन गेट पर संयुक्त छापेमारी
प्राप्त जानकारी के अनुसार जाट रेजीमेंट सेंटर में 14 सितंबर से 30 सितंबर तक उत्तर प्रदेश के 12 जिलों के अभ्यर्थियों के लिए विशाल अग्निवीर भर्ती रैली का आयोजन किया जा रहा है। हजारों की संख्या में युवाओं के बरेली पहुंचने के कारण भर्ती केंद्र के आसपास लगातार भारी भीड़ और हलचल बनी हुई थी। इसी बीच मिलिट्री इंटेलिजेंस को पुख्ता इनपुट प्राप्त हुआ कि कुछ संदिग्ध बिचौलिए भर्ती स्थल के बाहर सक्रिय हैं और अभ्यर्थियों को सेना के वरिष्ठ अधिकारियों से सीधी जान-पहचान का झांसा देकर अपने जाल में फंसा रहे हैं।
मिलिट्री इंटेलिजेंस से सटीक सूचना साझा किए जाने के उपरांत कैंट थाना पुलिस और सैन्य खुफिया विंग के विशेष दस्ते ने जाट रेजीमेंट सेंटर के संवेदनशील हरभजन गेट के समीप रणनीतिक घेराबंदी की। वहां संदिग्ध अवस्था में खड़े होकर कुछ अभ्यर्थियों को बरगला रहे पांच व्यक्तियों को सुरक्षाबलों ने तत्काल दबोच लिया। मौके पर हुई कड़ी पूछताछ में यह बात सामने आई कि यह गिरोह भर्ती की प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर हस्तक्षेप करने में पूरी तरह असमर्थ था, किंतु केवल अभ्यर्थियों के डर और चयन की तीव्र लालसा का फायदा उठाकर उनसे अवैध धन उगाही की पटकथा तैयार कर रहा था।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान और अंतरराज्यीय संपर्कों की पड़ताल
कैंट पुलिस के अनुसार गिरफ्तार किए गए पांचों आरोपियों की पहचान प्रदीप कुमार शर्मा, विशाल यादव, राजवीर उर्फ कैलाश, धर्मेंद्र सिंह और नूर अहमद के रूप में हुई है। प्राथमिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि आरोपी अलग-अलग जनपदों और ग्रामीण इलाकों से ताल्लुक रखते हैं और उन्होंने भर्ती स्थल पर आने वाले युवाओं को लक्षित करने के लिए एक साझा नेटवर्क तैयार किया था।
पुलिस की पूछताछ में गिरोह के एक अन्य फरार सहयोगी का नाम भी सामने आया है, जो कथित तौर पर अभ्यर्थियों से सीधे संपर्क साधने और अग्रिम टोकन राशि एकत्र करने की भूमिका निभाता था। पुलिस अब यह जानने का प्रयास कर रही है कि पकड़े गए आरोपियों का आपराधिक इतिहास क्या रहा है और क्या वे इससे पूर्व भी अन्य राज्यों या जिलों में आयोजित सेना और अर्धसैनिक बलों की रैलियों में इसी प्रकार की धोखाधड़ी में लिप्त रहे हैं।
डिजिटल साक्ष्य और जाली पहचान पत्रों की बरामदगी
गिरफ्तारी के बाद जब पुलिस ने आरोपियों की तलाशी ली, तो उनके कब्जे से छह मोबाइल फोन और 9,100 रुपये की नकद राशि बरामद की गई। इसके अतिरिक्त आरोपियों द्वारा आवागमन के लिए उपयोग में लाई जा रही एक मोटरसाइकिल और एक स्कूटी को भी मोटर वाहन अधिनियम के तहत जब्त कर लिया गया। आरोपियों के मोबाइलों की फॉरेंसिक और प्रारंभिक डिजिटल जांच में सनसनीखेज खुलासे हुए हैं, जिनमें कई अभ्यर्थियों के साथ की गई व्हाट्सएप चैटिंग, मेडिकल और एडमिट कार्ड से जुड़े दस्तावेजों के स्क्रीनशॉट और यूपीआई के माध्यम से हुए ऑनलाइन लेनदेन के स्पष्ट प्रमाण मिले हैं।
जांच अधिकारियों के अनुसार आरोपियों के पास से कुछ संदेहास्पद कागजात और फर्जी पहचान पत्र भी बरामद हुए हैं, जिनकी कूटरचना कर वे खुद को आधिकारिक व्यवस्था से जुड़ा हुआ दिखाने या अपनी वास्तविक पहचान छिपाने का प्रयास करते थे। साइबर सेल की टीम इन मोबाइल नंबरों से जुड़े कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (सीडीआर) और बैंक खातों की विस्तृत जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि गिरोह ने अब तक कितने युवाओं को अपने झांसे में लेकर धन की वसूली की है।
शारीरिक नाप-तौल और मेडिकल में पास कराने का झूठा मायाजाल
अग्निवीर भर्ती प्रक्रिया में दौड़ निकालने के बाद सबसे कठिन चरण शारीरिक माप-तौल (ऊंचाई, सीना) और विस्तृत मेडिकल परीक्षण का होता है, जहां मामूली खामी के चलते भी अभ्यर्थियों को बाहर कर दिया जाता है। गिरोह इसी मनोवैज्ञानिक दबाव का लाभ उठाता था। आरोपी उन अभ्यर्थियों को लक्ष्य बनाते थे जिन्हें अपनी शारीरिक माप या मेडिकल फिटनेस को लेकर हल्का भी संदेह होता था।
वे खुद को सेना के मेडिकल कोर या भर्ती बोर्ड के अधिकारियों का नजदीकी बताकर यह दावा करते थे कि वे फाइल में अनुकूल रिपोर्ट लगवाकर अंतिम चयन सुनिश्चित करा देंगे। इस काम के एवज में प्रत्येक अभ्यर्थी से मोटी रकम तय की जाती थी और अग्रिम के तौर पर कुछ नकद या ऑनलाइन भुगतान ले लिया जाता था। यदि अभ्यर्थी अपनी स्वाभाविक योग्यता के बल पर ही पास हो जाता, तो गिरोह सारा श्रेय खुद लेकर पूरी रकम ऐंठ लेता था, और यदि अभ्यर्थी अनुत्तीर्ण हो जाता, तो आरोपी फोन बंद कर फरार हो जाते थे।
सेना भर्ती पारदर्शी: दलालों के झांसे में न आने की सख्त अपील
इस गंभीर प्रकरण के सामने आने के बाद सेना के भर्ती अधिकारियों और बरेली जिला पुलिस प्रशासन ने संयुक्त रूप से सभी अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों के लिए सख्त चेतावनी और एडवाइजरी जारी की है। सैन्य अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया है कि भारतीय सेना में अग्निवीर की संपूर्ण चयन प्रक्रिया पूर्णतः स्वचालित, कम्प्यूटरीकृत, पारदर्शी और योग्यता (मेरिट) आधारित है। बायोमेट्रिक पहचान और उन्नत निगरानी कैमरों के कारण बाहर का कोई भी व्यक्ति या कथित दलाल भर्ती के किसी भी चरण को रत्ती भर भी प्रभावित नहीं कर सकता।
अधिकारियों ने युवाओं से अपील की है कि वे अपनी कड़ी मेहनत, शारीरिक क्षमता और योग्यता पर ही भरोसा करें। किसी भी अज्ञात व्यक्ति द्वारा चयन की गारंटी देने के नाम पर धन की मांग किए जाने पर तुरंत स्थानीय पुलिस, भर्ती हेल्पडेस्क या सैन्य खुफिया तंत्र को सूचित करें। गैरकानूनी माध्यमों का सहारा लेने वाले अभ्यर्थियों के विरुद्ध भी न केवल उम्मीदवारी रद्द करने, बल्कि धोखाधड़ी में संलिप्तता पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई करने का प्रावधान है।
Bareilly Agniveer Recruitment Scam: व्यापक नेटवर्क की तलाश में पुलिस की कार्रवाई जारी
जाट रेजीमेंट सेंटर बरेली में सामने आया यह मामला इस बात का ज्वलंत प्रमाण है कि देश सेवा का सपना देखने वाले युवाओं की भावनाओं का किस प्रकार असामाजिक तत्वों द्वारा शोषण किया जाता है। कैंट थाना पुलिस ने सभी पांचों नामजद आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जाली दस्तावेज तैयार करने और आपराधिक षड्यंत्र रचने से संबंधित गंभीर धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
पुलिस और मिलिट्री इंटेलिजेंस की संयुक्त टीम अब फरार आरोपी की गिरफ्तारी और इस गिरोह के वित्तीय लेन-देन के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने में जुटी है। इस प्रभावी कार्रवाई ने न केवल चल रही अग्निवीर भर्ती की शुचिता को सुरक्षित रखा है, बल्कि अन्य भर्ती स्थलों पर सक्रिय दलालों और ठगों को भी एक कठोर और स्पष्ट संदेश दिया है।
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