Aaj Ka Mausam 25 September 2026: सितंबर के अंतिम सप्ताह की शुरुआत के साथ ही भारतीय उपमहाद्वीप के मौसम चक्र में एक असाधारण और तीव्र बदलाव देखने को मिल रहा है। यद्यपि देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मानसून की क्रमिक वापसी का दौर प्रारंभ हो चुका है, किंतु बंगाल की खाड़ी में सक्रिय हुए शक्तिशाली मौसमी तंत्र ने मध्य, पूर्वी और उत्तरी भारत के मौसम की दिशा पूरी तरह बदल दी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा 25 सितंबर 2026 के लिए जारी ताजा अखिल भारतीय मौसम बुलेटिन के अनुसार, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में गरज-चमक, आकाशीय बिजली और तेज झोंकेदार हवाओं के साथ मूसलाधार बारिश होने की गंभीर संभावना जताई गई है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र में बने गहरे दबाव (Deep Depression) के तटीय भूभाग में प्रवेश करने के बाद उससे उठा विशाल नमी का दायरा आंतरिक राज्यों की ओर अग्रसर हो रहा है। इसके प्रभाव से कई मैदानी और तटीय इलाकों में सामान्य जनजीवन, सड़क यातायात और कृषि कार्य प्रभावित हो सकते हैं। आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों और स्थानीय जिला प्रशासनों को संवेदनशील क्षेत्रों में पूर्ण सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
Aaj Ka Mausam 25 September 2026: दिल्ली-एनसीआर में मानसूनी विदाई के बाद का मिजाज
देश की राजधानी दिल्ली और उससे सटे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा और गाजियाबाद) में 25 सितंबर को मौसम का मिजाज देश के अन्य हिस्सों की तुलना में काफी अलग रहने वाला है। मौसम विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून ने सामान्य तिथि (25 सितंबर) से करीब दो दिन पूर्व, यानी 23 सितंबर 2026 को ही दिल्ली से औपचारिक विदाई ले ली है। इस पूरे मानसूनी सीजन में 1 जून से 23 सितंबर के मध्य दिल्ली की प्राथमिक सफदरजंग वेधशाला में 728.6 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जो दीर्घावधि औसत 629.7 मिमी से करीब 16 प्रतिशत अधिक रही।
मानसून की वापसी के उपरांत 25 सितंबर को दिल्ली के आसमान में मुख्य रूप से आंशिक रूप से बादल छाए रहने का अनुमान है। राजधानी और आसपास के शहरी क्षेत्रों के लिए उत्तर प्रदेश जैसी बहुत भारी वर्षा या जलभराव की कोई चेतावनी नहीं है। दिन के समय धूप और बादलों की आवाजाही के बीच तापमान में हल्की गिरावट महसूस होगी, जबकि सुबह और रात के समय वातावरण अपेक्षाकृत ठंडा और सुहावना रहेगा। अधिकतम तापमान 33 से 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23 से 24 डिग्री सेल्सियस के आसपास बने रहने की संभावना है।
उत्तर प्रदेश में बारिश का प्रचंड दौर: पूर्वी यूपी में बहुत भारी वर्षा का अलर्ट
दिल्ली से उलट उत्तर प्रदेश में 25 सितंबर को मौसमी गतिविधियां अपने चरम पर रहने का अनुमान है। मौसम विभाग ने राज्य को दो अलग-अलग चेतावनी श्रेणियों में विभाजित किया है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के अधिकांश जनपदों के लिए ‘वेरी हेवी रेन’ (Very Heavy Rain) की चेतावनी जारी की गई है, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के संभागों में भारी वर्षा के साथ तीव्र गरज-चमक (Thunderstorm) और आंधी-तूफान (Squall) का अलर्ट दिया गया है। राज्य में बारिश का यह दौर 26 और 27 सितंबर तक जारी रहने की संभावना जताई गई है।
मौसम विभाग के अनुसार लखनऊ, कानपुर, अयोध्या, उन्नाव, बाराबंकी, रायबरेली, बहराइच, बांदा, चित्रकूट, झांसी, वाराणसी, गोरखपुर, देवरिया, सोनभद्र, मिर्जापुर, मेरठ, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, मथुरा और आगरा सहित आसपास के जनपदों में तेज बौछारों के साथ 45 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से हवाएं चल सकती हैं। खुले स्थानों, जलजमाव वाले रास्तों और पुराने कच्चे ढांचों के आसपास रहने वाले नागरिकों को आकाशीय बिजली चमकने के दौरान सुरक्षित पक्के भवनों की शरण लेने की सलाह दी गई है।
लखनऊ का मौसम: घने बादलों के बीच गिरेगा पारा, दिन भर बौछारों के आसार
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के लिए आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र ने 25 सितंबर के लिए आमतौर पर घने बादलों से ढके आसमान और रुक-रुक कर मध्यम से भारी बारिश का स्थानीय पूर्वानुमान व्यक्त किया है। बादलों के निरंतर जमावड़े और बारिश के झोंकों के चलते शहर के दैनिक तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की जा सकती है।
लखनऊ में 25 सितंबर को न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस और दिन का अधिकतम तापमान गिरकर मात्र 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास सिमटने का अनुमान है। तापमान के इस स्तर पर आने से शहरवासियों को उमस भरी गर्मी से बड़ी राहत मिलेगी और वातावरण में ठंडक का अहसास होगा। मौसम केंद्र ने आगाह किया है कि 26 और 27 सितंबर को भी राजधानी में गरज-चमक का प्रभाव बना रह सकता है, इसलिए दैनिक आवागमन करने वाले यात्रियों को घर से निकलने से पूर्व मौसम की स्थिति जांचने की सलाह दी गई है।
ओडिशा और मध्य भारत में रेड अलर्ट: गहरे दबाव का जमीनी असर
25 सितंबर को देश भर में सर्वाधिक मौसमी उथल-पुथल ओडिशा और उससे सटे मध्य भारतीय राज्यों में दर्ज होने की आशंका है। बंगाल की खाड़ी के उत्तरी और पश्चिमी-मध्य भाग में सक्रिय गहरा दबाव जैसे ही ओडिशा और उत्तरी आंध्र तट के पार आगे बढ़ रहा है, इसके चलते दक्षिणी और तटीय ओडिशा के कई जिलों में भारी से अत्यधिक भारी वर्षा की स्थिति बन गई है। कोरापुट, मलकानगिरी, गजपति, गंजाम और रायगडा जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी रखा गया है।
इस मौसमी तंत्र का सीधा असर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ पर भी व्यापक रूप से पड़ेगा। इन दोनों राज्यों के अधिकांश संभागों में लगातार मूसलाधार बारिश होने से निचली बस्तियों में जलभराव और मौसमी नदियों-नालों के जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि हो सकती है। कृषि क्षेत्रों में तैयार खरीफ फसलों की सुरक्षा के लिए किसानों को खेतों से अतिरिक्त पानी की निकासी की अग्रिम व्यवस्था करने के सुझाव दिए गए हैं।
बिहार और पश्चिम बंगाल: गरज-चमक के साथ सक्रिय रहेगा मौसमी दायरा
पूर्वी भारत के दो प्रमुख राज्यों—बिहार और पश्चिम बंगाल—में भी 25 सितंबर को मौसम काफी अशांत बना रहेगा। बंगाल की खाड़ी से लगातार आ रही मानसूनी आर्द्रता के कारण बिहार के दक्षिणी और मध्यवर्ती जिलों में घने बादल छाए रहेंगे और कुछ स्थानों पर आंधी के साथ आकाशीय बिजली गिरने का जोखिम रहेगा। आपदा प्रबंधन विभाग ने विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में किसानों और मजदूरों को वज्रपात के समय पेड़ों के नीचे या खुले खेतों में न रहने की चेतावनी दी है।
पश्चिम बंगाल के गांगेय तटीय जिलों—दक्षिण 24 परगना, पूर्व मेदिनीपुर, हावड़ा और कोलकाता—में हल्की से मध्यम दर्जे की निरंतर वर्षा के साथ कुछ स्थानों पर भारी वर्षा के दौर देखने को मिल सकते हैं। तटीय जलक्षेत्र में समुद्र की स्थिति बेहद खराब रहने के कारण मछुआरों को गहरे समुद्र में न जाने के निर्देश दिए गए हैं और प्रमुख बंदरगाहों पर आवश्यक सतर्कता संकेत जारी रखे गए हैं।
Aaj Ka Mausam 25 September 2026: मानसून की वापसी और चक्रवाती दबाव का अंतर्विरोध
आम तौर पर सितंबर के तीसरे और चौथे सप्ताह में पश्चिमी राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के ऊपर से शुष्क उत्तर-पश्चिमी हवाएं चलने लगती हैं, जो मानसूनी बादलों को पीछे धकेलती हैं। किंतु इस वर्ष बंगाल की खाड़ी में देर से बने गहरे निम्न दबाव के क्षेत्र ने पूर्वी हवाओं के प्रवाह को पुनः सक्रिय कर दिया है। इसी भौगोलिक टकराव के कारण जहां दिल्ली-हरियाणा की सीमा पर शुष्कता बढ़ रही है, वहीं उत्तर प्रदेश और मध्य भारत के ऊपर विपरीत दिशा से आ रही नम हवाएं भीषण बारिश का चक्रव्यूह तैयार कर रही हैं।
यह मौसमी विरोधाभास आने वाले तीन से चार दिनों तक सक्रिय रहेगा, जिसके बाद ही देश के मध्य और पूर्वी हिस्सों में बारिश का वेग धीरे-धीरे शांत होगा। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि जब तक यह सिस्टम मध्य भारत के ऊपर पूरी तरह कमजोर होकर बिखर नहीं जाता, तब तक मैदानी राज्यों में वर्षा और तेज हवाओं का सिलसिला रुक-रुक कर जारी रहेगा।
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