UPI MDR Charge Rules: UPI भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR को लेकर व्यापारियों में चल रही चिंता के बीच वित्त मंत्रालय ने तीन बड़े फैसले लिए हैं। मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि व्यापारिक संगठन CAIT के साथ जल्द बैठक होगी, भारतीय बैंक संघ IBA को जागरूकता अभियान चलाने का काम दिया जाएगा और ऐसा तंत्र बनाया जाएगा जिससे व्यापारी MDR का बोझ ग्राहकों पर न डालें।
ये कदम उन आशंकाओं के बीच आए हैं कि 15 अक्टूबर से लागू होने वाली व्यवस्था से दुकानदारों पर अतिरिक्त खर्च बढ़ेगा और अंत में ग्राहक प्रभावित होंगे। सरकार का कहना है कि ग्राहकों के हित में गारंटी दी जाएगी और बैंकों को भी निर्देश दिए गए हैं कि व्यापारी इस खर्च को ग्राहक से न वसूलें।
UPI MDR Charge Rules: वित्त मंत्रालय ने UPI MDR पर क्या तीन फैसले लिए?
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार पहला फैसला यह है कि वित्त मंत्रालय देश के बड़े व्यापारिक संगठन CAIT यानी Confederation of All India Traders के अधिकारियों से जल्द बैठक करेगा। इस बैठक में UPI और MDR से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी ताकि व्यापारियों की आशंकाएं सामने आ सकें और सरकार अपनी व्यवस्था स्पष्ट कर सके।
दूसरा फैसला भारतीय बैंक संघ IBA से जुड़ा है। मंत्रालय IBA से कहेगा कि UPI और MDR पर जागरूकता अभियान चलाया जाए। अलग अलग क्षेत्रीय भाषाओं में विज्ञापन जारी कर व्यापारियों को बताया जाएगा कि MDR की व्यवस्था क्या है, किन लेनदेन पर शुल्क लगता है और किन पर नहीं लगता। सरकार का लक्ष्य भ्रम दूर करना है, न कि सिर्फ नियम दोहराना।
तीसरा फैसला ग्राहकों की सुरक्षा से जुड़ा है। ऐसा मैकेनिज्म तैयार करने का काम IBA को दिया जाएगा जिससे यह सुनिश्चित हो कि व्यापारी MDR का खर्च ग्राहक पर न डालें। बैंकों को भी निर्देश दिया गया है कि व्यापारी इस बोझ को ग्राहकों पर स्थानांतरित न करें। सरकार के तथ्यों के मुताबिक किसी उत्पाद का MRP डेबिट कार्ड या UPI से भुगतान करने पर नहीं बदलता। व्यापारियों ने अब तक डेबिट कार्ड पर लगने वाले MDR को उसी MRP के भीतर वहन किया है। इसलिए UPI भुगतान में अलग व्यवस्था क्यों हो, यह सवाल सरकार के तर्क का आधार है।
MDR क्या सरकार का टैक्स है या बैंकों का शुल्क?
MDR को लेकर सबसे बड़ा भ्रम यही है कि लोग इसे कर, सेस या सरचार्ज समझ रहे हैं। सरकार के तथ्यों के अनुसार MDR न तो टैक्स है, न सेस और न सरचार्ज। इसकी एक रुपये की रकम भी भारत सरकार को नहीं जाती और न ही यह Consolidated Fund of India में जमा होती है। यह राशि भुगतान प्रणाली के भीतर ही रहती है।
इसलिए इसे सरकारी राजस्व का स्रोत मानना गलत है। यह पेमेंट सिस्टम के संचालन से जुड़ा शुल्क है, जिसे व्यापारियों और बैंकों के बीच व्यवस्था के तहत तय किया गया है। सरकार बार बार यही स्पष्ट कर रही है कि ग्राहक से सीधे MDR नहीं लिया जाएगा।
UPI MDR Charge Rules: किन UPI लेनदेन पर MDR नहीं लगेगा?
सरकार के मुताबिक करीब 96 प्रतिशत UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन MDR से प्रभावित नहीं होंगे। दो हजार रुपये तक के सभी UPI मर्चेंट भुगतान पर MDR शून्य रहेगा। व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P UPI भुगतान किसी भी राशि पर मुफ्त रहेगा।
छोटे व्यापारियों को UPI QR के जरिए महीने में एक लाख रुपये तक मिलने वाली राशि पर भी MDR नहीं लगेगा। RuPay डेबिट कार्ड लेनदेन पर भी MDR शून्य रहेगा। यानी रोजमर्रा के छोटे छोटे भुगतान और छोटे दुकानदारों का बड़ा हिस्सा इस शुल्क से बाहर रहेगा।
दो हजार रुपये से ऊपर सिर्फ तय Person to Merchant यानी P2M लेनदेन पर MDR लागू होगा। सामान्य दर 0.4 प्रतिशत होगी। पचहत्तर हजार रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर अधिकतम MDR तीन सौ रुपये होगा। रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे जरूरी क्षेत्रों में दो हजार रुपये से ऊपर के लेनदेन पर सिर्फ पांच रुपये का फ्लैट MDR होगा।
15 अक्टूबर की समयसीमा बढ़ेगी या नहीं?
वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार 15 अक्टूबर की समयसीमा को आगे बढ़ाने को लेकर फिलहाल कोई चर्चा नहीं हुई है। पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से भी UPI MDR की समीक्षा का कोई प्रस्ताव नहीं आया है। सूत्रों ने यह भी स्पष्ट किया कि UPI MDR का अमेरिका से कोई संबंध नहीं है। जहां जहां UPI चालू है, वहां लागू नियमों के तहत MDR लागू होगा।
व्यापारियों की चिंता मुख्य रूप से इसी डेडलाइन और शुल्क की दर को लेकर है। सरकार का रुख फिलहाल यह है कि समयसीमा पर कोई आधिकारिक पुनर्विचार नहीं चल रहा, बल्कि बैठक, जागरूकता और ग्राहक सुरक्षा तंत्र पर काम हो रहा है।
UPI MDR Charge Rules: ग्राहकों और व्यापारियों पर इसका क्या असर पड़ेगा?
सरकार का दावा है कि ग्राहक से MDR नहीं लिया जाएगा। बैंकों को निर्देश दिया गया है कि व्यापारी इसका बोझ ग्राहकों पर न डालें। अगर यह व्यवस्था व्यवहार में लागू रही तो दुकान पर MRP वही रहेगा, चाहे भुगतान UPI से हो या डेबिट कार्ड से।
व्यापारियों के लिए स्थिति मिश्रित है। दो हजार रुपये तक के अधिकांश लेनदेन और छोटे व्यापारियों के एक लाख रुपये मासिक QR लेनदेन शुल्क मुक्त रहेंगे। बड़े मूल्य के P2M लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत या अधिकतम तीन सौ रुपये का शुल्क लगेगा। जरूरी क्षेत्रों में फ्लैट पांच रुपये की दर तय है। सरकार का तर्क है कि डेबिट कार्ड पर व्यापारी पहले से MDR वहन करते आए हैं, इसलिए UPI पर अलग नियम की मांग उचित नहीं।
व्यापारिक संगठन CAIT के साथ प्रस्तावित बैठक इसी अंतर को पाटने की कोशिश है। IBA का क्षेत्रीय भाषा अभियान उन दुकानदारों तक जानकारी पहुंचाने के लिए है जो अंग्रेजी या आधिकारिक परिपत्र नहीं पढ़ते। अगर जागरूकता अभियान प्रभावी रहा तो भ्रम कम हो सकता है। अगर व्यापारी फिर भी शुल्क ग्राहक से वसूलने लगें तो बैंक निर्देश और नया मैकेनिज्म उसी समस्या को रोकने के लिए बनाया जा रहा है।
UPI भारत में रोजमर्रा के भुगतान का सबसे बड़ा डिजिटल माध्यम बन चुका है। छोटे लेनदेन मुफ्त रखने और बड़े लेनदेन पर सीमित शुल्क लगाने का मॉडल सरकार के अनुसार सिस्टम की लागत और ग्राहक सुविधा के बीच संतुलन है। मंत्रालय के तीन फैसलों का मकसद यही संतुलन व्यापारियों को समझाना और ग्राहकों पर बोझ न पड़ने देना है। 15 अक्टूबर की तारीख फिलहाल बरकरार बताई जा रही है, इसलिए बैठक और अभियान की गति ही तय करेगी कि बाजार में कितना विश्वास बनता है।
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