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विश्व मौसम विज्ञान संगठन WMO क्या है: कब बना, 193 सदस्य, भारत का IMD और मौसम की भविष्यवाणी में भूमिका

तूफान की चेतावनी से लेकर जलवायु रिपोर्ट तक, कई देशों का मौसम तंत्र WMO के ढांचे में जुड़ा है। जानिए यह संगठन क्या करता है।

आसमान में बादल और मौसम उपग्रह का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • मौसम किसी एक देश की सीमा में बंधा नहीं रहता। बंगाल की खाड़ी में बनने वाला चक्रवात कई देशों पर असर डाल सकता है और दूर के समुद्र में होने वाले बदलाव भारत के मानसून को प्रभावित कर सकते हैं।
  • WMO की वेबसाइट के अनुसार संगठन के 193 सदस्य हैं, जिनमें 187 देश और 6 क्षेत्र शामिल हैं।
  • WMO हर साल वैश्विक जलवायु की स्थिति पर रिपोर्ट जारी करता है, जिसमें तापमान, समुद्र स्तर, ग्लेशियर और चरम मौसम की घटनाओं की जानकारी होती है।
  • IMD के दस्तावेज के अनुसार 1 जुलाई 1988 से नई दिल्ली केंद्र को चक्रवातों के लिए क्षेत्रीय विशेष मौसम विज्ञान केंद्र यानी RSMC का दर्जा मिला।

मौसम किसी एक देश की सीमा में बंधा नहीं रहता। बंगाल की खाड़ी में बनने वाला चक्रवात कई देशों पर असर डाल सकता है और दूर के समुद्र में होने वाले बदलाव भारत के मानसून को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए देशों के बीच मौसम की जानकारी साझा करना बेहद जरूरी है। इसी काम के लिए विश्व मौसम विज्ञान संगठन यानी World Meteorological Organization, जिसे WMO कहते हैं, बना। इस लेख में जानिए WMO का इतिहास, ढांचा और काम।

WMO कब बना

WMO की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार संगठन का कन्वेंशन 23 मार्च 1950 को लागू हुआ और इसी दिन WMO अस्तित्व में आया। इसी की याद में हर साल 23 मार्च को विश्व मौसम विज्ञान दिवस मनाया जाता है। इससे पहले 1873 में अंतरराष्ट्रीय मौसम विज्ञान संगठन बना था, जिसे WMO का पूर्ववर्ती माना जाता है। बाद में WMO संयुक्त राष्ट्र की विशेष एजेंसी बना।

मुख्य बातें: आसमान में बादल और मौसम उपग्रह का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सदस्य और मुख्यालय

WMO की वेबसाइट के अनुसार संगठन के 193 सदस्य हैं, जिनमें 187 देश और 6 क्षेत्र शामिल हैं। इसका मुख्यालय स्विट्जरलैंड के जिनेवा शहर में है। सदस्यों की सर्वोच्च संस्था विश्व मौसम विज्ञान कांग्रेस है, जो नीतियां तय करती है, जबकि कार्यकारी परिषद रोज के कामकाज पर नजर रखती है। संगठन का प्रमुख महासचिव होता है।

भारत और WMO

भारत 1950 से WMO का सदस्य है और भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD इसमें देश का प्रतिनिधित्व करता है। संयुक्त राष्ट्र भारत की वेबसाइट के अनुसार WMO ने IMD की 150वीं वर्षगांठ के कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया। IMD उत्तर हिंद महासागर क्षेत्र में उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के लिए क्षेत्रीय विशेष मौसम विज्ञान केंद्र की भूमिका निभाता है। इसके तहत वह बांग्लादेश, म्यांमार, श्रीलंका, थाईलैंड, मालदीव और दूसरे पड़ोसी देशों को चक्रवात से जुड़ी सलाह देता है।

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WMO के मुख्य काम

  • दुनिया भर में मौसम, जलवायु और पानी से जुड़े आंकड़ों का मुफ्त और तेज आदान प्रदान सुनिश्चित करना।
  • मौसम अवलोकन के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक तय करना, ताकि अलग अलग देशों के आंकड़े एक जैसे हों।
  • चक्रवात, बाढ़, सूखा और लू जैसी आपदाओं की पूर्व चेतावनी प्रणाली को मजबूत करना।
  • जलवायु परिवर्तन पर वैज्ञानिक रिपोर्ट तैयार करना।
  • विकासशील देशों की मौसम सेवाओं की क्षमता बढ़ाना।

तूफानों के नाम

उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के नाम तय करने की व्यवस्था भी WMO के क्षेत्रीय ढांचे से जुड़ी है। उत्तर हिंद महासागर क्षेत्र के चक्रवातों के नाम इस क्षेत्र के देशों के सुझाए नामों की सूची से क्रम से रखे जाते हैं। इससे चेतावनी देने और लोगों तक जानकारी पहुंचाने में आसानी होती है।

जलवायु रिपोर्ट

WMO हर साल वैश्विक जलवायु की स्थिति पर रिपोर्ट जारी करता है, जिसमें तापमान, समुद्र स्तर, ग्लेशियर और चरम मौसम की घटनाओं की जानकारी होती है। WMO और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ने मिलकर 1988 में जलवायु परिवर्तन पर अंतर सरकारी पैनल यानी IPCC की स्थापना की थी, जिसकी रिपोर्ट जलवायु नीति पर दुनिया भर की बहस का आधार बनती हैं।

WMO बनने की कहानी

WMO बुलेटिन के अनुसार 1947 में वॉशिंगटन में 31 देशों ने नए संगठन के कन्वेंशन पर हस्ताक्षर किए थे। 50 देशों की पुष्टि के बाद 23 मार्च 1950 को WMO की स्थापना हुई और 1951 में यह संयुक्त राष्ट्र की विशेष एजेंसी बना। WMO के अनुसार IPCC को 2007 में नोबेल शांति पुरस्कार मिला था।

चक्रवात के नाम कैसे रखे जाते हैं

IMD के दस्तावेज के अनुसार 1 जुलाई 1988 से नई दिल्ली केंद्र को चक्रवातों के लिए क्षेत्रीय विशेष मौसम विज्ञान केंद्र यानी RSMC का दर्जा मिला। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बनने वाले चक्रवातों के नाम सितंबर 2004 से रखे जा रहे हैं। अब 13 सदस्य देशों के सुझाए नामों की सूची इस्तेमाल होती है। नाम क्रम से दिए जाते हैं और एक बार इस्तेमाल हुआ नाम दोबारा नहीं रखा जाता। RSMC नई दिल्ली ही इन चक्रवातों को नाम देता है।

छात्रों के लिए जरूरी तथ्य

प्रतियोगी परीक्षाओं में WMO से जुड़े सवाल अक्सर पूछे जाते हैं। स्थापना की तारीख, मुख्यालय, विश्व मौसम विज्ञान दिवस और भारत की ओर से प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था जैसे तथ्य याद रखना उपयोगी है।

WMO/ESCAP पैनल

बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के चक्रवातों पर सहयोग के लिए 1972 में WMO/ESCAP पैनल बना। WMO के अनुसार भारत, बांग्लादेश, म्यांमार, पाकिस्तान, श्रीलंका और थाईलैंड 1972 से इसके सदस्य हैं। बाद में मालदीव, ओमान, यमन, ईरान, कतर, सऊदी अरब और UAE भी इसमें शामिल हुए।

WMO की स्थापना कब हुई

23 मार्च 1950 को इसका कन्वेंशन लागू हुआ।

WMO का मुख्यालय कहां है

जिनेवा, स्विट्जरलैंड में।

WMO में कितने सदस्य हैं

193, जिनमें 187 देश और 6 क्षेत्र हैं।

भारत की ओर से WMO में कौन प्रतिनिधित्व करता है

भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD।

स्रोत: WMO: World Meteorological Day, WMO: Members, WMO: ESCAP Panel on Tropical Cyclones, WMO: Milestones, IMD RSMC New Delhi: Tropical cyclone names (PDF), UN India: WMO joins IMD 150th celebration

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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