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Friday Santoshi Mata Puja: शुक्रवार को संतोषी माता की पूजा क्यों करें? जानें आसान पूजा विधि, व्रत के नियम, मंत्र, आरती और धार्मिक लाभ

Friday Santoshi Mata Puja
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Friday Santoshi Mata Puja: सनातन धर्म में प्रत्येक दिन किसी न किसी देवी-देवता के पूजन और आराधना के लिए विशेष माना गया है। शुक्रवार का दिन मुख्य रूप से धन की देवी मां लक्ष्मी से संबंधित होता है, लेकिन इसके साथ ही यह दिन मां संतोषी की साधना और व्रत के लिए भी अत्यंत फलदायी माना जाता है। देश भर में लाखों श्रद्धालु प्रत्येक शुक्रवार को पूरे विधि-विधान के साथ संतोषी माता का व्रत रखते हैं और उनकी कृपा प्राप्त करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संतोषी माता की सच्चे मन से पूजा करने पर साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इससे घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है तथा आर्थिक संकटों का निवारण होता है।

Friday Santoshi Mata Puja: शुक्रवार को संतोषी माता की पूजा का धार्मिक महत्व

मां संतोषी को संतुष्टि, धैर्य और शांति की अधिष्ठात्री देवी माना गया है। शास्त्रों और लोक परंपराओं के अनुसार, शुक्रवार का दिन उनकी आराधना के लिए सर्वश्रेष्ठ है। शुक्रवार के दिन मां संतोषी का पूजन करने से व्यक्ति के भीतर असंतोष, ईर्ष्या और अशांति की भावनाएं समाप्त होती हैं और जीवन में आध्यात्मिक शांति का संचार होता है।
भक्त प्रायः अपनी विशेष मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु 16 शुक्रवार के नियमित व्रत का संकल्प लेते हैं। मान्यता है कि यह व्रत विधिपूर्वक पूर्ण करने पर वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है, संतान सुख की प्राप्ति होती है और रोजगार व व्यापार में आ रही रुकावटें दूर होती हैं। मां संतोषी का पूजन अत्यंत सरल माना गया है, जिसमें गुड़ और भुने चने का भोग मुख्य रूप से अर्पित किया जाता है।

पूजन की पूर्व तैयारी और आवश्यक सामग्री

संतोषी माता के पूजन के लिए शुक्रवार की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त होना चाहिए। इसके उपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण कर घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) या पूर्व दिशा में पूजा स्थल को गंगाजल छिड़ककर शुद्ध कर लें। पूजा की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं और उस पर मां संतोषी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
पूजा सामग्री के रूप में रोली, अक्षत (बिना टूटे चावल), लाल पुष्प, धूप, घी का दीपक, कलश, जल, नारियल, लाल चुनरी तथा प्रसाद के लिए गुड़ और भुना चना एकत्रित कर लें। व्रत रखने वाले साधक को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि दिन भर घर में किसी भी प्रकार का खट्टा पदार्थ न बने और न ही उसका सेवन किया जाए।

Friday Santoshi Mata Puja: चरणबद्ध पूजन विधि

संतोषी माता की पूजा प्रारंभ करते समय सर्वप्रथम प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश का ध्यान करें। इसके बाद माता संतोषी की प्रतिमा के सम्मुख घी का दीपक और धूप प्रज्वलित करें। प्रतिमा पर रोली और अक्षत का तिलक लगाएं तथा लाल पुष्प व चुनरी अर्पित करें।
इसके पश्चात मां संतोषी को गुड़ और भुने चने का नैवेद्य अर्पित करें और अपनी मनोकामना का स्मरण करें। इसके बाद संतोषी माता की पावन व्रत कथा का पाठ करें या श्रवण करें। धार्मिक दृष्टि से व्रत कथा के बिना यह पूजन अधूरा माना जाता है। कथा संपन्न होने के बाद कपूर अथवा घी के दीपक से मां की आरती करें और अंत में उपस्थित सभी परिजनों व श्रद्धालुओं में प्रसाद का वितरण करें।

व्रत और पूजन के दौरान रखी जाने वाली सावधानियां

संतोषी माता के व्रत में नियमों की शुद्धता का विशेष महत्व होता है। व्रत के दिन साधक के लिए किसी भी खट्टी वस्तु (जैसे नींबू, दही, इमली, टमाटर, खट्टे फल) का सेवन पूर्णतः वर्जित होता है। इसके साथ ही परिवार के अन्य सदस्यों को भी उस दिन खट्टे भोजन से परहेज करने की सलाह दी जाती है।
पूजन के दौरान मन में किसी के प्रति द्वेष, क्रोध या असत्य भाषण से बचना चाहिए। यदि 16 शुक्रवार के व्रत के दौरान किसी कारणवश कोई शुक्रवार छूट जाता है, तो उस शुक्रवार को छोड़कर अगले शुक्रवार से गिनती जारी रखी जा सकती है। पितृपक्ष या सूतक के दिनों में यह व्रत प्रारंभ करने से बचना चाहिए।

संतोषी माता के मंत्र और आरती का महत्व

पूजन के समय मां संतोषी के बीज मंत्र अथवा सामान्य मंत्र का जाप करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। साधक ‘ॐ श्रीं संतोषी महामाये नमः’ अथवा ‘ॐ संतोषी मात्रे नमः’ मंत्र का 11, 21 या 108 बार तुलसी या रुद्राक्ष की माला से जाप कर सकते हैं।
मंत्र जाप के पश्चात पारंपरिक आरती ‘जय संतोषी माता, मैया जय संतोषी माता’ का पूरे श्रद्धा भाव के साथ गायन करना चाहिए। आरती के समय शंख और घंटी बजाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं।

Friday Santoshi Mata Puja: संतोषी माता की नियमित पूजा से मिलने वाले फल

नियमित रूप से संतोषी माता की आराधना करने से मानसिक तनाव दूर होता है और साधक को आंतरिक संतुष्टि प्राप्त होती है। जिन परिवारों में आर्थिक तंगी बनी रहती है, उन्हें धन के नए स्रोत प्राप्त होते हैं।
यदि विवाह में अनावश्यक विलंब हो रहा हो, तो 16 शुक्रवार का व्रत करने से शीघ्र विवाह के योग बनते हैं। इसके अतिरिक्त पारिवारिक कलह समाप्त होकर परिजनों के बीच आपसी प्रेम और सौहार्द में वृद्धि होती है। सरल विधि और दृढ़ संकल्प के साथ की गई यह पूजा साधक के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाती है।

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लेखक

Netsha Singh

नेत्शा सिंह डेमोक्रेटिक भारत लाइव में हिंदी न्यूज़ कंटेंट राइटर हैं। वे सरकारी योजनाओं, आपका पैसा, देश की खबरों और धर्म-आस्था से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। डिजिटल न्यूज़ लेखन में उन्हें लगभग एक साल का अनुभव है; इससे पहले वे खबर नगरी और ऑनलाइन ताज़ा खबर के साथ काम कर चुकी हैं और यूट्यूब पर समसामयिक विषयों पर कंटेंट भी बनाती हैं।

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