किसी दुकान या रेस्टोरेंट का बिल देखें, तो उस पर GST जरूर लिखा मिलता है। वस्तु एवं सेवा कर यानी GST भारत की अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था है, जो 1 जुलाई 2017 से लागू है। इसने पहले के कई केंद्रीय और राज्य करों, जैसे उत्पाद शुल्क, सेवा कर और वैट, की जगह ली। जानिए GST कैसे काम करता है और एक ग्राहक के तौर पर आपके लिए क्या जानना जरूरी है।
GST क्या है
GST एक ऐसा कर है, जो वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति पर लगता है। इसे “एक देश, एक कर” की सोच के साथ लाया गया था। GST उपभोग आधारित कर है, यानी टैक्स उस राज्य को मिलता है, जहां सामान या सेवा का उपभोग होता है। उत्पादन से लेकर बिक्री तक हर चरण में GST लगता है, लेकिन इनपुट टैक्स क्रेडिट की व्यवस्था के कारण टैक्स पर टैक्स नहीं लगता।

CGST, SGST, UTGST और IGST
- CGST: केंद्र सरकार का हिस्सा, राज्य के अंदर होने वाली बिक्री पर
- SGST: राज्य सरकार का हिस्सा, राज्य के अंदर होने वाली बिक्री पर
- UTGST: केंद्र शासित प्रदेशों में SGST की जगह
- IGST: एक राज्य से दूसरे राज्य में बिक्री और आयात पर, जिसे केंद्र वसूलकर राज्यों से साझा करता है
उदाहरण के लिए, अगर लखनऊ की दुकान से लखनऊ का ग्राहक सामान खरीदता है, तो बिल पर CGST और SGST अलग-अलग दिखेंगे। अगर दिल्ली की कंपनी से लखनऊ में सामान मंगाया जाए, तो IGST लगेगा।
GST काउंसिल की भूमिका
GST की दरें, छूट और नियम GST काउंसिल तय करती है। इसका गठन 2016 के 101वें संविधान संशोधन के बाद अनुच्छेद 279A के तहत हुआ। केंद्रीय वित्त मंत्री इसकी अध्यक्षता करते हैं और सभी राज्यों के वित्त मंत्री या उनके प्रतिनिधि इसके सदस्य होते हैं। अलग-अलग वस्तुओं और सेवाओं पर अलग दरें लगती हैं और कई जरूरी चीजों को छूट दी गई है। दरें समय-समय पर बदलती हैं, इसलिए किसी सामान की मौजूदा दर CBIC की आधिकारिक वेबसाइट पर देखें।
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इनपुट टैक्स क्रेडिट क्या है
जब कोई व्यापारी कच्चा माल या सेवा खरीदता है, तो उस पर GST देता है। आगे सामान बेचते समय वह ग्राहक से GST लेता है। इनपुट टैक्स क्रेडिट के तहत व्यापारी अपनी खरीद पर दिए गए GST को बिक्री पर बनने वाले GST में से घटा सकता है। इससे पूरी श्रृंखला में केवल जोड़े गए मूल्य पर ही टैक्स लगता है।
ग्राहक के लिए जरूरी बातें
पंजीकृत व्यापारी के बिल पर उसका 15 अंकों का GSTIN लिखा होना चाहिए। आप GST पोर्टल पर “सर्च टैक्सपेयर” विकल्प में GSTIN डालकर देख सकते हैं कि नंबर असली और सक्रिय है या नहीं। जो व्यापारी GST में पंजीकृत नहीं है, वह ग्राहक से GST नहीं वसूल सकता। कंपोजिशन योजना वाले छोटे व्यापारी भी ग्राहक से अलग से GST नहीं ले सकते। हमेशा पक्का बिल लें। बिल में गड़बड़ी लगे, तो राज्य या केंद्र के GST विभाग में शिकायत की जा सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या हर व्यापारी को GST में पंजीकरण कराना जरूरी है?
नहीं, कारोबार तय सीमा से ज्यादा होने या कुछ खास परिस्थितियों में पंजीकरण जरूरी होता है। सीमा और नियम GST पोर्टल पर देखें।
स्रोत: GST पोर्टल, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC): GST। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।





