UP LPG Connection: उत्तर प्रदेश के कई परिवार नया रसोई गैस कनेक्शन लेने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन फिलहाल रास्ता बंद है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने एलपीजी आपूर्ति में कमी के चलते मार्च से नए घरेलू कनेक्शन और डबल बॉटल कनेक्शन यानी डीबीसी पर रोक लगा रखी है। नतीजा यह है कि नए ठिकाने पर शिफ्ट हुए लोग या बढ़े परिवार उधार के सिलिंडर पर निर्भर हो गए हैं।
अलीगढ़ जिले में इंडेन, भारत गैस और एचपी गैस की एजेंसियों पर आवेदन लंबित हैं। मौजूदा उपभोक्ताओं को सिलिंडर देने को प्राथमिकता दी जा रही है। जिले में सात लाख पचास हजार से अधिक एलपीजी उपभोक्ता हैं। बुकिंग का अंतराल भी बढ़ गया है।
UP LPG Connection: नए घरेलू LPG कनेक्शन पर रोक क्यों लगी?
पेट्रोलियम मंत्रालय ने वैश्विक आपूर्ति में आई कमी के कारण नए घरेलू कनेक्शन जारी करना बंद कर दिया। होर्मुज क्षेत्र में संकट के बाद समुद्री रास्ते से भारत तक एलपीजी खेप पहुंचने में 43 से 52 दिन लग रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार मौजूदा उपभोक्ताओं को पहले सिलिंडर उपलब्ध कराया जा रहा है।
जिले में करीब 60 गैस एजेंसियां हैं। प्रत्येक एजेंसी पर औसतन चार से दस नए कनेक्शन के आवेदन लंबित बताए जा रहे हैं। डीबीसी के लिए भी उपभोक्ताओं ने आवेदन कर रखे हैं। अलीगढ़ एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष कमला कांत तिवारी ने कहा कि मंत्रालय की रोक जारी है और एजेंसियों पर नए कनेक्शन को लेकर लगातार पूछताछ हो रही है।
यह स्थिति उन परिवारों के लिए मुश्किल है जिनका घर बढ़ा है या जो नौकरी के सिलसिले में नए पते पर गए हैं। नया कनेक्शन न मिलने से रोजमर्रा का खाना पकाना प्रभावित हो रहा है।
सिलिंडर बुकिंग अब कितने दिन में हो रही है?
पहले शहरी क्षेत्र में सामान्य उपभोक्ताओं के लिए बुकिंग अंतराल करीब 14 दिन था। अब इसे बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है। 14.2 किलोग्राम के घरेलू सिलिंडर की निर्धारित कीमत 960 रुपये है।
आपूर्ति प्रभावित होने का सीधा असर रिफिल पर पड़ा है। कंपनियां कहती हैं कि सीमित स्टॉक को मौजूदा ग्राहकों तक पहुंचाना जरूरी है। इसलिए नए आवेदनों को फिलहाल रोका गया है। उपभोक्ताओं को ज्यादा इंतजार करना पड़ रहा है और कई घरों में सिलिंडर खत्म होने पर पड़ोसी या रिश्तेदार से उधार लेना पड़ रहा है।
बुकिंग में यह बदलाव रोजमर्रा की योजना को प्रभावित करता है। जो परिवार पहले दो सप्ताह में सिलिंडर ले लेते थे उन्हें अब करीब साढ़े तीन सप्ताह तक इंतजार करना पड़ सकता है।
UP LPG Connection: छोटे सिलिंडर का विकल्प कितना महंगा है?
नए कनेक्शन के इंतजार के बीच कंपनियां पांच और दस किलोग्राम के पारदर्शी सिलिंडर का विकल्प दे रही हैं। ये व्यावसायिक दरों पर मिलते हैं। बीस किलोग्राम के सिलिंडर की कीमत 4450 रुपये बताई गई है। पांच किलोग्राम वाले की कीमत 1600 रुपये है।
रिफिल के लिए दस किलो सिलिंडर पर 1400 रुपये और पांच किलो पर 767 रुपये देने होंगे। सामान्य परिवारों के लिए यह विकल्प महंगा साबित हो रहा है क्योंकि घरेलू 14.2 किलो सिलिंडर 960 रुपये में मिलता है। छोटे सिलिंडर बार बार भरवाने पड़ते हैं और कुल खर्च बढ़ जाता है।
जो लोग नया कनेक्शन नहीं ले पा रहे वे इस महंगे विकल्प की ओर देख रहे हैं। फिर भी यह स्थायी समाधान नहीं है क्योंकि दरें व्यावसायिक श्रेणी की हैं।
घर बैठे ई-केवाईसी कैसे पूरी करें?
मौजूदा उपभोक्ता घर बैठे ई-केवाईसी कर सकते हैं। इंडेन के लिए इंडेन ऑयल वन ऐप, भारत गैस के लिए हेलो बीपीसीएल और एचपी गैस के लिए एचपी पे ऐप डाउनलोड करना होता है। मोबाइल में आधार फेस आरडी ऐप भी इंस्टॉल करना पड़ता है।
संबंधित गैस कंपनी के ऐप में ई-केवाईसी का विकल्प चुनकर आधार आधारित फेस स्कैन पूरा किया जाता है। अगर ऐप से प्रक्रिया पूरी नहीं होती तो अधिकृत गैस एजेंसी जाना होता है। साथ में आधार कार्ड, गैस पासबुक और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर रखना जरूरी है।
गैस एजेंसियों पर ई-केवाईसी को लेकर उपभोक्ताओं की शिकायतें भी आई हैं। कुछ लोग समय पर प्रक्रिया पूरी नहीं कर रहे हैं। एजेंसियों पर भीड़ और पूछताछ दोनों बढ़ी हुई है क्योंकि नए कनेक्शन की मांग थमी नहीं है।
UP LPG Connection: उपभोक्ताओं पर क्या असर पड़ रहा है?
रोक जारी रहने से नए परिवार और शिफ्ट हुए लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। एजेंसियों पर आवेदन जमा हैं लेकिन मंजूरी नहीं मिल रही। मौजूदा उपभोक्ताओं को प्राथमिकता मिल रही है इसलिए पुराने कनेक्शन वाले अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में हैं।
कमला कांत तिवारी के अनुसार एजेंसियों पर नए कनेक्शन को लेकर लगातार संपर्क हो रहा है। आपूर्ति सामान्य होने तक यह दबाव बना रह सकता है। छोटे व्यावसायिक सिलिंडर का सहारा लेना कई घरों के बजट पर बोझ डाल रहा है।
ई-केवाईसी समय पर पूरी करने से मौजूदा कनेक्शन सुचारू रह सकते हैं। नए आवेदकों को मंत्रालय की ओर से रोक हटने का इंतजार करना होगा। वैश्विक आपूर्ति और समुद्री खेप का समय सामान्य होने पर स्थिति बदल सकती है। फिलहाल उपभोक्ताओं को उपलब्ध विकल्पों और बढ़े इंतजार के साथ काम चलाना पड़ रहा है।
जिले की करीब 60 एजेंसियां मौजूदा स्टॉक को प्राथमिकता के आधार पर बांट रही हैं। सात लाख पचास हजार से अधिक उपभोक्ताओं की जरूरत पूरी करना एजेंसियों की पहली जिम्मेदारी बनी हुई है। नए कनेक्शन और डीबीसी तब तक रुके रहेंगे जब तक मंत्रालय रोक नहीं हटाता।
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