Aaj Ka Mausam 23 September 2026: सितंबर के अंतिम पखवाड़े में देश के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में मानसूनी गतिविधियों का बिल्कुल भिन्न और मिलाजुला स्वरूप देखने को मिल रहा है। जहां उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में मानसून की सक्रियता में क्षणिक विराम दिखाई दे रहा है, वहीं पूर्वी, मध्य और तटीय भारत में मौसम प्रणालियां नए सिरे से सक्रिय हो रही हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा 23 सितंबर 2026 को जारी दैनिक मौसम बुलेटिन के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और समूचे एनसीआर क्षेत्र में आज किसी भी प्रकार की प्रतिकूल मौसम चेतावनी जारी नहीं की गई है और आसमान मुख्य रूप से साफ रहने का अनुमान है।
दूसरी ओर उत्तर प्रदेश में वर्तमान में जारी शुष्क और उमस भरे वातावरण के बाद आगामी 24 सितंबर से आंधी-तूफान का दौर शुरू होने और 25 से 28 सितंबर के दौरान पूर्वी व पश्चिमी दोनों संभागों में मूसलाधार बारिश का नया दौर शुरू होने की प्रबल संभावना व्यक्त की गई है। पर्वतीय राज्य उत्तराखंड में भी 25 सितंबर के उपरांत अत्यधिक भारी बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जबकि बंगाल की खाड़ी में गहराते मौसमी चक्र के कारण ओडिशा, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र के कई जनपदों में तेज बारिश की चेतावनी दी गई है।
Aaj Ka Mausam 23 September 2026: दिल्ली-एनसीआर में आज साफ रहेगा आसमान
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के उपग्रह नगरों—नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद—में मंगलवार, 22 सितंबर को मौसमी गतिविधियां शांत रहने का अनुमान है। मौसम केंद्र सफदरजंग और पालम के अनुसार आज दिनभर मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहेगा और तेज धूप खिली रहेगी। शहर में अधिकतम तापमान लगभग 34 से 35 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 24 से 25 डिग्री सेल्सियस के दायरे में रहने की संभावना है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार आगामी दो से तीन दिनों तक दिल्ली में किसी व्यापक वर्षा तंत्र के सक्रिय होने की संभावना नहीं है। यद्यपि 25 सितंबर के आसपास पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बनने वाले वर्षा तंत्र के आंशिक प्रभाव से दिल्ली के वायुमंडल में बादलों की आवाजाही बढ़ सकती है और तापमान में दो से तीन डिग्री की मामूली गिरावट दर्ज की जा सकती है। वर्तमान में तेज धूप और उच्च आर्द्रता के कारण राजधानीवासियों को हल्की उमस का सामना करना पड़ सकता है, किंतु जलभराव या भारी बारिश से पूरी तरह राहत रहेगी।
उत्तर प्रदेश का मौसमी चक्र: 24 से गरज-चमक और 25 सितंबर से मूसलाधार बारिश का अलर्ट
उत्तर प्रदेश के लिए जारी उप-विभागीय मौसम पूर्वानुमान दर्शाता है कि 22 और 23 सितंबर को पूरे प्रदेश में मानसून काफी हद तक निष्क्रिय रहेगा। राज्य के अधिकांश हिस्सों में तीखी धूप के साथ आर्द्र मौसम बना रहेगा। हालांकि वायुमंडलीय परिस्थितियों में 24 सितंबर की शाम से नाटकीय परिवर्तन देखने को मिलेगा, जब पूर्वी उत्तर प्रदेश के तराई और मैदानी जनपदों में गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने (Thunderstorm & Lightning) की गतिविधियां शुरू होंगी।
मौसम विभाग ने 25 सितंबर से 28 सितंबर के मध्य पूरे उत्तर प्रदेश के लिए व्यापक वर्षा चेतावनी जारी की है। इस दौरान पूर्वी उत्तर प्रदेश के वाराणसी, गोरखपुर, प्रयागराज, जौनपुर, गाजीपुर और मिर्जापुर में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। वहीं 25 सितंबर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बरेली, मुरादाबाद, अलीगढ़, मेरठ और सहारनपुर संभागों में भी 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने और तेज बौछारें पड़ने को लेकर यलो और ऑरेंज अलर्ट सक्रिय किया गया है।
लखनऊ और प्रयागराज का स्थानीय मिजाज: सप्ताह के अंत में बदलेंगे हालात
राजधानी लखनऊ और कानपुर मंडल में मंगलवार को मौसम सामान्य रूप से खुला रहेगा और तेज धूप के कारण दिन के तापमान में वृद्धि दर्ज की जाएगी। स्थानीय स्तर पर संवहनीय बादलों के निर्माण से कहीं-कहीं छिटपुट बूंदाबांदी संभव है, किंतु किसी बड़ी वर्षा प्रणाली का असर 24 सितंबर के उपरांत ही दिखाई देगा।
प्रयागराज मौसम केंद्र द्वारा जारी विशेष बुलेटिन के अनुसार 22 सितंबर को संगम नगरी में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया जा सकता है। दिन के समय आंशिक रूप से हल्के बादल छाए रह सकते हैं। इसके उपरांत 23 सितंबर को शहर में एक या दो दौर की गरज-चमक वाली बौछारें पड़ने का अनुमान है। 24 सितंबर से बादलों का घनत्व बढ़ेगा और 25 व 26 सितंबर को प्रयागराज और समीपवर्ती क्षेत्रों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलने वाली अंधड़ और मूसलाधार बारिश की संभावना के चलते सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
उत्तराखंड के पर्वतीय जनपदों में गंभीर खतरा: 26 से 28 सितंबर तक बहुत भारी बारिश की चेतावनी
पहाड़ी राज्य उत्तराखंड के लिए सितंबर का अंतिम सप्ताह प्राकृतिक आपदा की दृष्टि से संवेदनशील साबित हो सकता है। मौसम विभाग के अनुसार 25 सितंबर से राज्य के कुमाऊं और गढ़वाल दोनों मंडलों में मौसम तेजी से करवट लेगा। 25 सितंबर को गरज-चमक, आकाशीय बिजली और तेज हवाओं के साथ भारी बारिश का सिलसिला प्रारंभ होगा।
इसके पश्चात 26, 27 और 28 सितंबर के लिए देहरादून, नैनीताल, चंपावत, पिथौरागढ़, बागेश्वर, टिहरी और पौड़ी गढ़वाल जनपदों में ‘अत्यधिक भारी बारिश’ का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विज्ञान केंद्र ने चेतावनी दी है कि लगातार तीव्र वर्षा के कारण संवेदनशील पर्वतीय ढलानों पर भूस्खलन (Landslide), बोल्डर गिरने, संपर्क मार्गों के अवरुद्ध होने और पहाड़ी नदियों के जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि का जोखिम रहेगा। चारधाम यात्रा और उच्च हिमालयी मार्गों पर जाने वाले तीर्थयात्रियों व पर्यटकों को प्रशासनिक दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन करने और मौसम साफ होने पर ही यात्रा करने का परामर्श दिया गया है।
बंगाल की खाड़ी में गहराया डिप्रेशन: ओडिशा, आंध्र और मध्य भारत में भारी वर्षा की तैयारी
देश के पूर्वी और मध्य राज्यों में मानसूनी वर्षा के दोबारा तेज होने का मुख्य कारण उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना एक सुस्पष्ट निम्न दबाव का क्षेत्र (Well-Marked Low Pressure Area) है। मौसम विभाग के अनुसार यह मौसमी तंत्र आगामी 48 घंटों के भीतर और अधिक सघन होकर एक गहरे अवदाब (Deep Depression) में रूपांतरित होने की दिशा में अग्रसर है।
इस मौसमी तंत्र के जमीनी भूभाग की ओर बढ़ने के कारण 22 सितंबर को ओडिशा के तटीय और आंतरिक जनपदों में मूसलाधार बारिश की चेतावनी दी गई है। उत्तरी आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में भी समुद्र में ऊंची लहरें उठने और भारी बारिश की संभावना के मद्देनजर मछुआरों को गहरे समुद्र में न जाने की हिदायत दी गई है। इस सिस्टम का असर आगे चलकर छत्तीसगढ़, विदर्भ, पूर्वी मध्य प्रदेश और झारखंड के मौसमी मिजाज पर भी सीधा प्रभाव डालेगा।
दक्षिण और पश्चिम भारत की स्थिति: मानसून की वापसी का क्या है चरण
देश के अन्य प्रमुख राज्यों के मौसम पर नजर डालें तो महाराष्ट्र के कोंकण, गोवा और मध्य महाराष्ट्र के घाट क्षेत्रों में 22 सितंबर को भारी बारिश होने के आसार हैं। गुजरात के सौराष्ट्र और कच्छ क्षेत्र में कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ बौछारें गिर सकती हैं। दक्षिण भारत में कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में हल्की से मध्यम बारिश और तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में रुक-रुक कर बौछारें पड़ने का अनुमान जताया गया है।
इस बीच देश से दक्षिण-पश्चिम मानसून की आधिकारिक वापसी (Withdrawal of Southwest Monsoon) की प्रक्रिया भी आरंभ हो चुकी है। मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों से मानसून की वापसी की रेखा गुजर रही है। हालांकि मानसून की वापसी एक क्रमिक और चरणबद्ध प्रक्रिया होती है, जिसमें कई हफ्तों का समय लगता है। बंगाल की खाड़ी में नए दबाव क्षेत्रों के सक्रिय होने के कारण उत्तर और मध्य भारत के कई राज्यों में मानसून की वापसी से पूर्व वर्षा का यह अंतिम बड़ा दौर देखने को मिल रहा है।
Aaj Ka Mausam 23 September 2026: निष्कर्ष
23 सितंबर 2026 को पूरे देश में मौसम के दो विपरीत छोर देखने को मिल रहे हैं। जहां दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आज धूप खिली रहेगी और मौसम शुष्क रहेगा, वहीं ओडिशा, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में बादलों का पहरा रहेगा। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों के लिए आगामी 48 घंटे शांतिपूर्ण रहने वाले हैं, किंतु 24 सितंबर से उत्तर प्रदेश और 25 सितंबर से उत्तराखंड में भारी बारिश की जो रूपरेखा बन रही है, वह किसानों की फसलों और आम जनजीवन दोनों के लिए व्यापक प्रभाव वाली सिद्ध होगी। नागरिकों और यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे सप्ताह के उत्तरार्ध में किसी भी लंबी यात्रा की योजना बनाने से पूर्व मौसम विभाग के नवीनतम उपग्रह चित्रों और स्थानीय चेतावनियों का अवलोकन अवश्य करें।
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