UP Farmer Scheme: उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में हजारों किसान सरकारी योजनाओं से दूर इसलिए हैं क्योंकि उनकी फार्मर रजिस्ट्री पूरी नहीं हुई है। जिले में करीब दो साल से यह प्रक्रिया चल रही है फिर भी 37,534 किसान अब भी रजिस्ट्री से बाहर हैं। पीएम किसान सम्मान निधि सहित कई योजनाओं की पात्रता इसी रजिस्ट्री पर टिकी है।
जिले में कुल 2,88,258 पंजीकृत किसान हैं। इनमें से 2,51,258 किसानों की रजिस्ट्री हो चुकी है। यह आंकड़ा करीब 87 प्रतिशत बैठता है। बाकी 13 प्रतिशत से अधिक किसान अभी भी इंतजार कर रहे हैं। कई किसान जन सुविधा केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं।
सरकार ने योजनाओं में पारदर्शिता के लिए फार्मर रजिस्ट्री अनिवार्य की है। सही किसान तक लाभ पहुंचाने और जमीन से जुड़े विवादों के निपटारे में भी इससे मदद मिलनी है। उप कृषि निदेशक डॉ. अभय यादव ने किसानों से नजदीकी जन सेवा केंद्र पर जाकर रजिस्ट्री कराने की अपील की है।
UP Farmer Scheme: बांदा में कितने किसानों की फार्मर रजिस्ट्री बाकी है?
बांदा में पंजीकृत किसानों की कुल संख्या 2,88,258 है। अब तक 2,51,258 किसानों का काम पूरा हुआ है। शेष 37,534 किसान रजिस्ट्री के बिना हैं। प्रतिशत के हिसाब से 87 प्रतिशत काम हो चुका है और 13 प्रतिशत से अधिक काम बाकी है।
यह अंतर छोटे नहीं है। हजारों परिवार पीएम किसान किस्त, फसली ऋण और आपदा राहत जैसे लाभ से पीछे रह सकते हैं। रजिस्ट्री अधूरी रहने से पात्रता प्रभावित हो रही है। किसान बार बार केंद्रों पर जा रहे हैं लेकिन काम अटका हुआ है।
दो साल की प्रक्रिया के बावजूद यह आंकड़ा पूरा नहीं हो सका। नवंबर 2024 से शिविर लगाए गए थे। उसके बाद राजस्व कर्मचारी गांव गांव और घर घर भी गए। फिर भी लक्ष्य पूरा नहीं हुआ। लेखपालों पर अन्य विभागीय काम होने से रफ्तार सुस्त रही।
फार्मर रजिस्ट्री अटकने की मुख्य वजहें क्या हैं?
आधार कार्ड और खतौनी में नाम का अंतर सबसे बड़ी अड़चन है। दोनों दस्तावेजों में नाम अलग होने पर रजिस्ट्री नहीं हो पाती। कई मामलों में खतौनी में अंश निर्धारण नहीं हुआ है। इससे भी काम रुक जाता है।
21 गांवों का भूलेख ऑनलाइन उपलब्ध नहीं है। चकबंदी वाले कुछ गांवों का रिकॉर्ड भी सिस्टम पर नहीं दिख रहा। इन गांवों के किसानों को ज्यादा परेशानी हो रही है। बिना ऑनलाइन रिकॉर्ड के प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाती।
शुरुआत में शिविरों से काम शुरू हुआ। बाद में घर घर अभियान चला। लेकिन लेखपाल दूसरे कामों में व्यस्त रहे इसलिए निरंतर गति नहीं बनी। अब किसान जन सुविधा केंद्रों पर निर्भर हैं। केंद्रों पर भी भीड़ और दस्तावेजी गड़बड़ी काम को धीमा कर रही है।
नाम मिलान और भूमि रिकॉर्ड की कमी दोनों तकनीकी समस्याएं हैं। इनका समाधान प्रशासनिक स्तर पर होना जरूरी है। किसान अकेले इन अड़चनों को नहीं काट सकते।
UP Farmer Scheme: रजिस्ट्री न होने से किन योजनाओं का लाभ प्रभावित हो रहा है?
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ रजिस्ट्री से जुड़ा है। फसली ऋण भी इसी प्रक्रिया पर निर्भर करता है। प्रधानमंत्री फसल बीमा की क्षतिपूर्ति और आपदा राहत में भी रजिस्ट्री जरूरी बताई गई है।
सरकार का मकसद सही लाभार्थी तक पैसा पहुंचाना है। गलत नाम या अधूरे रिकॉर्ड से विवाद बढ़ते हैं। रजिस्ट्री से जमीन संबंधी विवाद निपटाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। इसलिए इसे औपचारिकता नहीं बल्कि पात्रता की शर्त बनाया गया है।
37 हजार से अधिक किसान इन योजनाओं से बाहर रह सकते हैं जब तक रजिस्ट्री पूरी नहीं होती। कई किसान बार बार केंद्र जाकर भी काम नहीं करवा पा रहे। आर्थिक रूप से कमजोर किसान परिवारों पर इसका सीधा असर पड़ता है।
उप कृषि निदेशक डॉ. अभय यादव ने कहा है कि किसान नजदीकी जन सेवा केंद्र जाकर रजिस्ट्री कराएं। अधिकारियों का जोर इसी बात पर है कि बाकी किसान अब केंद्रों के माध्यम से काम पूरा करें।
किसानों को अब क्या करना चाहिए और कहां जाएं?
किसानों को अपने आधार और खतौनी का नाम मिलान कराना चाहिए। अंतर होने पर पहले दस्तावेज ठीक कराने होंगे। अंश निर्धारण लंबित हो तो राजस्व कार्यालय में काम कराना पड़ेगा। ऑनलाइन भूलेख न दिखने वाले गांवों के किसानों को विशेष ध्यान देना होगा।
जन सुविधा केंद्र या जन सेवा केंद्र पर जाकर आवेदन दिया जा सकता है। शिविरों का दौर पहले हो चुका है। अब केंद्र ही मुख्य विकल्प हैं। दस्तावेज पूरे लेकर जाने से समय बचता है। नाम में छोटी गलती भी रजिस्ट्री रोक देती है।
लेखपालों पर अतिरिक्त काम का बोझ प्रक्रिया को धीमा कर चुका है। इसलिए किसानों को खुद सक्रिय रहना पड़ रहा है। केंद्र पर जाकर स्थिति पूछना और कमी दूर करना जरूरी है। दो साल इंतजार के बाद भी अधूरा काम किसानों को परेशान कर रहा है।
रजिस्ट्री पूरी होते ही योजनाओं की पात्रता खुल सकती है। इसलिए बाकी किसान जल्द केंद्र पहुंचें। प्रशासन से रिकॉर्ड ऑनलाइन कराने और नाम सुधार की प्रक्रिया तेज करने की अपेक्षा है।
UP Farmer Scheme: आगे प्रक्रिया कैसे तेज हो सकती है?
21 गांवों का भूलेख ऑनलाइन लाना जरूरी है। चकबंदी वाले गांवों का रिकॉर्ड भी सिस्टम पर आना चाहिए। नाम अंतर और अंश निर्धारण के मामलों का निपटारा तेज हो तो आंकड़ा सुधर सकता है।
लेखपालों को रजिस्ट्री का काम प्राथमिकता देने से गति बढ़ सकती है। शिविर दोबारा लगाने या विशेष अभियान चलाने से बाकी 37,534 किसानों तक पहुंचा जा सकता है। डॉ. अभय यादव की अपील के बाद किसान केंद्रों की ओर बढ़ सकते हैं।
योजनाओं की पारदर्शिता तभी पूरी होगी जब सभी पात्र किसान रजिस्ट्री में आ जाएं। बांदा जैसे जिले में अधूरी रजिस्ट्री का मतलब हजारों परिवारों का लाभ रुकना है। काम पूरा होने तक किसान बार बार पूछताछ करते रहेंगे।
रजिस्ट्री सिर्फ एक फॉर्म नहीं है। यह पीएम किसान, ऋण, बीमा मुआवजा और राहत से सीधे जुड़ी है। इसलिए बाकी किसानों के लिए यह सबसे जरूरी काम बन गया है। केंद्र जाकर दस्तावेज मिलान कराना फिलहाल सबसे व्यावहारिक रास्ता है।
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