Surya Grahan 2026: अगस्त 2026 में एक नहीं बल्कि दो ग्रहण लगने वाले हैं। पहले सूर्य ग्रहण फिर चंद्र ग्रहण। सूर्य ग्रहण अमावस्या के दिन लगता है। अमावस्या तिथि 11 अगस्त की देर रात 1 बजकर 52 मिनट पर शुरू होकर 12 अगस्त की रात 11 बजकर 6 मिनट पर समाप्त होगी।
साल का दूसरा सूर्य ग्रहण सावन शिवरात्रि के अगले दिन यानी श्रावण अमावस्या पर लगेगा। इसे हरियाली अमावस्या भी कहा जाता है। यह कंकणाकृति या वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा।
Surya Grahan 2026: सूर्य ग्रहण की सही तारीख और समय
12 अगस्त 2026 बुधवार को सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। ग्रहण की शुरुआत रात 9 बजकर 4 मिनट पर होगी। समापन सुबह 4 बजकर 25 मिनट पर होगा। यह लगभग साढ़े सात घंटे तक रहेगा। पंचांग के अनुसार यह सूर्य ग्रहण कर्क राशि और अश्लेषा नक्षत्र में लगेगा। अमावस्या की अवधि को ध्यान में रखते हुए ग्रहण 12 अगस्त को ही माना जा रहा है।
वलयाकार सूर्य ग्रहण क्या होता है?
इस ग्रहण में चंद्रमा सूर्य को इस तरह ढकता है कि सूर्य का बाहरी हिस्सा प्रकाशित रहता है। अंदर का हिस्सा पूरी तरह ढक जाता है। इससे सूर्य के चारों ओर चमकती हुई अंगूठी या छल्ले जैसी आकृति बनती है। इसे कंकणाकृति सूर्य ग्रहण भी कहते हैं। यह साल का दूसरा सूर्य ग्रहण है।
Surya Grahan 2026: कहां-कहां दिखाई देगा यह ग्रहण?
12 अगस्त का सूर्य ग्रहण वलयाकार रूप में अधिकांश यूरोपीय देशों, कनाडा और अमेरिका के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में दिखेगा। खग्रास रूप में ग्रीनलैंड, आइसलैंड, अटलांटिक महासागर, आर्कटिक, उत्तरी स्पेन और पुर्तगाल के कुछ उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में दिखाई देगा। खंडग्रास रूप में फ्रांस, ब्रिटेन और यूरोप के अधिकतर देशों में नजर आएगा। भारत में यह ग्रहण बिल्कुल नहीं दिखेगा।
सूतक काल की स्थिति
सूर्य ग्रहण का सूतक काल आमतौर पर ग्रहण लगने से 12 घंटे पहले शुरू हो जाता है। लेकिन 12 अगस्त के इस सूर्य ग्रहण का सूतक भारत में मान्य नहीं होगा। कारण यह है कि ग्रहण भारत से दिखाई नहीं दे रहा। सूतक केवल उन जगहों पर लागू होता है जहां ग्रहण प्रत्यक्ष दिखाई देता है।
Surya Grahan 2026: गर्भवती महिलाओं के लिए सावधानियां
सूर्य ग्रहण के समय गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए। सिलाई-कढ़ाई या चाकू-कैंची जैसे काटने-छीलने वाले काम नहीं करने चाहिए। ग्रहण के दौरान भोजन करने से भी परहेज रखने की सलाह दी जाती है। भारी काम करने से बचना बेहतर माना जाता है। ये मान्यताएं धार्मिक आस्था और लोक परंपराओं पर आधारित हैं।
श्रावण अमावस्या का महत्व
यह सूर्य ग्रहण श्रावण अमावस्या पर पड़ रहा है। सावन शिवरात्रि के अगले दिन होने के कारण इसे खास माना जा रहा है। हरियाली अमावस्या के नाम से भी जानी जाने वाली इस तिथि पर ग्रहण लगना धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। भक्त इस दिन की विशेषताओं को ध्यान में रखकर गतिविधियां तय करते हैं।
Surya Grahan 2026: भारत में ग्रहण न दिखने का असर
चूंकि सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए यहां सूतक काल लागू नहीं होगा। धार्मिक गतिविधियां सामान्य रूप से चल सकती हैं। फिर भी कई लोग पारंपरिक सावधानियों का पालन करते हैं। यूरोप और उत्तरी अमेरिका के कुछ हिस्सों में ग्रहण का सीधा अनुभव होगा।
12 अगस्त 2026 को साल का दूसरा सूर्य ग्रहण वलयाकार रूप में लगेगा। शुरुआत रात 9:04 बजे और समापन सुबह 4:25 बजे होगा। यह कर्क राशि और अश्लेषा नक्षत्र में होगा। यूरोप, कनाडा और कुछ अन्य क्षेत्रों में दिखाई देगा लेकिन भारत में नहीं। सूतक काल भारत में मान्य नहीं है। गर्भवती महिलाओं के लिए पारंपरिक सावधानियों का जिक्र किया जाता है। ये जानकारियां धार्मिक आस्था पर आधारित हैं।
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