Sugar Price Today: दिवाली और आगामी छठ पूजा के त्योहारी मौसम के बीच देशभर के बाजारों में चीनी की मांग में जबरदस्त इजाफा देखा जा रहा है। घरेलू रसोई से लेकर मिठाई निर्माताओं, कन्फेक्शनरी और पेय पदार्थ उद्योग की ओर से बढ़ती खपत के कारण थोक और खुदरा दोनों बाजारों में चीनी की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। त्योहारी मांग का अनुचित लाभ उठाने और जमाखोरी रोकने के लिए केंद्र सरकार पूरी तरह सतर्क हो चुकी है। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने अक्टूबर माह के दूसरे पखवाड़े के लिए निर्धारित समय से पहले ही चीनी का अतिरिक्त बिक्री कोटा जारी कर दिया है, ताकि बाजार में पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित कर दामों को अनियंत्रित होने से रोका जा सके।
Sugar Price Today: खुदरा और थोक कीमतों की वास्तविक स्थिति
उपभोक्ता मामलों के विभाग द्वारा जारी आधिकारिक मूल्य निगरानी आंकड़ों के अनुसार, देश में चीनी का अखिल भारतीय औसत खुदरा भाव 56.67 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर दर्ज किया गया है। वहीं, प्रमुख थोक मंडियों में चीनी की औसत थोक दर 5,254.91 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास दर्ज हुई है। यह दरें देश के विभिन्न राज्यों और शहरों के आधार पर भिन्न हो सकती हैं, जहां पूर्वोत्तर और सुदूर पहाड़ी क्षेत्रों में परिवहन भाड़े के चलते कीमतें थोड़ी अधिक हैं, जबकि महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में कीमतें अपेक्षाकृत नियंत्रण में हैं।
आम उपभोक्ताओं और खुदरा खरीदारों के लिए यह समझना आवश्यक है कि थोक और खुदरा दरों के बीच का यह अंतर विभिन्न स्तरों पर लगने वाले परिवहन खर्च, भंडारण लागत, मंडी शुल्क, जीएसटी और स्थानीय खुदरा दुकानदारों के लाभ मार्जिन के कारण होता है। स्थानीय किराना दुकानों पर पैकेज्ड और ब्रांडेड चीनी सामान्य खुली चीनी की तुलना में दो से तीन रुपये प्रति किलो महंगी बिक रही है।
दिवाली से पहले सरकार का बड़ा कदम: 14 लाख टन का अतिरिक्त कोटा और स्टॉक सीमा
त्योहारी सीजन में मांग की तुलना में आपूर्ति कम न पड़े, इसके लिए केंद्र सरकार ने 13 से 31 अक्टूबर की अवधि के लिए घरेलू मिलों से खुले बाजार में बिक्री हेतु 14 लाख मीट्रिक टन चीनी का कोटा जारी किया है। इसके अतिरिक्त, चीनी आयातकों के लिए भी दो लाख मीट्रिक टन का विशेष आवंटन सुनिश्चित किया गया है। इस घरेलू कोटे का सबसे बड़ा हिस्सा यानी लगभग 83 प्रतिशत आवंटन तीन प्रमुख उत्पादक राज्यों—महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक की 587 से अधिक चीनी मिलों को सौंपा गया है।
अतिरिक्त कोटा जारी करने के साथ ही सरकार ने व्यापारियों और थोक विक्रेताओं के लिए स्टॉक रखने की सीमा को और कड़ा कर दिया है। जमाखोरी और कृत्रिम किल्लत पैदा करने की कोशिशों पर अंकुश लगाने के लिए चीनी डीलरों के लिए अधिकतम स्टॉक सीमा घटाकर एक हजार क्विंटल कर दी गई है। खाद्य मंत्रालय ने राज्य सरकारों को निर्देश दिए हैं कि वे थोक विक्रेताओं और बड़े खुदरा विक्रेताओं के गोदामों पर नियमित निगरानी रखें ताकि त्योहारी सीजन में आम जनता को उचित मूल्य पर चीनी मिलती रहे।
एथेनॉल निर्माण पर सख्त फैसला: आपूर्ति वर्ष 2026-27 के लिए डायवर्जन पर पूर्ण रोक
चीनी की घरेलू कीमतों को काबू में रखने के लिए केंद्र सरकार ने ऊर्जा और जैव-ईंधन नीति के मोर्चे पर भी एक महत्वपूर्ण नीतिगत फैसला लिया है। सरकार ने आगामी एथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2026-27 (ESY 2026-27) के दौरान एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के रस (शुगरकेन जूस), शुगर सिरप और बी-हैवी शीरे (B-Heavy Molasses) के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाने के निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत चीनी को एथेनॉल में डायवर्ट करने की सीमा शून्य कर दी गई है।
इस कड़े कदम का उद्देश्य मिलों को अधिकतम चीनी उत्पादन के लिए बाध्य करना है, जिससे देश के बफर स्टॉक को सुदृढ़ किया जा सके और आगामी पेराई सत्र के दौरान घरेलू बाजार में किसी भी प्रकार की कमी न हो। तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने भी अपने नए टेंडरों में चीनी आधारित एथेनॉल की खरीद को रोकते हुए अन्य स्रोतों पर ध्यान केंद्रित किया है। यद्यपि चीनी मिलों ने इस फैसले से अपनी तरलता और किसानों के भुगतान पर असर पड़ने की चिंता जताई है, किंतु सरकार का स्पष्ट रुख घरेलू उपभोक्ताओं को महंगाई से बचाना है।
Sugar Price Today: आगामी दिनों में क्या सस्ता होगा चीनी का भाव? बाजार का परिदृश्य
कमोडिटी और कृषि व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्र सरकार द्वारा अतिरिक्त 14 लाख टन कोटा जारी किए जाने और एथेनॉल पर रोक लगाए जाने से बाजार में घबराहट की खरीदारी पर लगाम लगेगी। हालांकि, थोक मंडियों से आवंटित कोटा खुदरा बाजार और किराना दुकानों तक पहुंचने में तीन से पांच दिनों का समय लेता है। इसलिए खुदरा स्तर पर कीमतों में त्वरित गिरावट के बजाय अगले कुछ दिनों में कीमतों में स्थिरता आने की संभावना अधिक है।
जैसे ही उत्तर भारत और महाराष्ट्र की मिलों में नए पेराई सत्र की विधिवत शुरुआत होगी और नई चीनी की आवक जोर पकड़ेगी, बाजार में आपूर्ति का दबाव कम होगा और कीमतों में दो से तीन रुपये प्रति किलो तक की नरमी देखने को मिल सकती है। उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे त्योहारी खरीदारी करते समय किसी भी प्रकार की घबराहट में आकर अनावश्यक भंडारण न करें, क्योंकि देश में चीनी का कुल स्टॉक और आगामी फसल का उत्पादन घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पूरी तरह पर्याप्त है।
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