हर साल किसी न किसी मौसम में प्याज, टमाटर या दाल के दाम अचानक बढ़ जाते हैं। ऐसे समय में सरकार बाजार में दखल देकर दाम काबू में रखने की कोशिश करती है। इसका एक बड़ा जरिया है मूल्य स्थिरीकरण कोष यानी Price Stabilisation Fund या PSF। इस लेख में जानिए यह कोष क्या है और कैसे काम करता है।
PSF क्या है
PIB के अनुसार मूल्य स्थिरीकरण कोष की स्थापना 500 करोड़ रुपये के शुरुआती कोष के साथ कुछ कृषि और बागवानी उत्पादों के दाम में उतार चढ़ाव से निपटने के लिए की गई। शुरुआत में इसमें प्याज, आलू और दालें शामिल थीं। इसका तरीका यह है कि फसल कटाई के समय किसानों या किसान संगठनों से ये उत्पाद खरीदे जाएं, उन्हें भंडार में रखा जाए और कमी वाले मौसम में नियंत्रित तरीके से बाजार में उतारा जाए।

कौन चलाता है
PIB के अनुसार PSF को 1 अप्रैल 2016 से उपभोक्ता मामले विभाग को सौंपा गया। केंद्र में दाम स्थिर करने के फैसले केंद्रीय मूल्य स्थिरीकरण कोष प्रबंधन समिति लेती है, जिसकी अध्यक्षता उपभोक्ता मामले विभाग के सचिव करते हैं। कोष का प्रबंधन लघु कृषक कृषि व्यापार संघ यानी SFAC करता है। अब PSF को कृषि मंत्रालय की PM-AASHA योजना के घटकों में मिला दिया गया है, लेकिन दाम स्थिर करने का काम उपभोक्ता मामले विभाग ही देखता है।
कितनी रकम लगी
PIB के अनुसार 2014-15 से 2024-25 तक PSF कोष के तहत कुल 37,489.15 करोड़ रुपये का आवंटन या खर्च हुआ। इस रकम का बड़ा हिस्सा दालों और प्याज का बफर बनाने में लगा।
यह भी पढ़ें: Sugar Price Today 20 October 2026: त्योहारी सीजन में चीनी के दाम में उछाल, जानें खुदरा-थोक भाव और सरकारी फैसलों की पूरी रिपोर्ट | डीमैट खाता क्या है: ट्रेडिंग खाते से फर्क, खोलने का तरीका, शुल्क और निवेशकों के लिए जरूरी सावधानियां
प्याज का बफर
प्याज के दाम में उतार चढ़ाव रोकने के लिए सरकार PSF के तहत प्याज का बफर रखती है। PIB के अनुसार बफर का आकार 2020-21 में 1 लाख टन था, जो 2022-23 में 2.5 लाख टन, 2023-24 में 7 लाख टन और 2024-25 में 4.75 लाख टन रहा। इस बफर से सितंबर से दिसंबर के कमी वाले मौसम में बड़े खपत केंद्रों पर प्याज उतारा जाता है, ताकि दाम ठंडे हों।
दालों का बफर
PIB के अनुसार दिसंबर 2015 में सरकार ने 1.5 लाख टन दालों का बफर बनाने की मंजूरी दी। बाद में 20 लाख टन के बड़े बफर की जरूरत महसूस हुई, जिसे 12 सितंबर 2016 को मंजूरी मिली। पहले चरण में घरेलू खरीद और आयात से 20.50 लाख टन दालों का बफर बनाया गया।
भारत दाल
PSF के दालों के भंडार को सस्ती दाल के रूप में उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए भारत दाल ब्रांड शुरू किया गया। PIB के अनुसार:
- पहले चरण में भारत चना दाल 1 किलो पैक में 60 रुपये प्रति किलो और 30 किलो पैक में 55 रुपये प्रति किलो बेची गई।
- दूसरे चरण में 23 अक्टूबर 2024 से भारत चना दाल 70 रुपये प्रति किलो और साबुत चना 58 रुपये प्रति किलो में बिक्री शुरू हुई।
- भारत मूंग दाल धुली 107 रुपये और साबुत 93 रुपये प्रति किलो तय की गई।
- भारत मसूर दाल 89 रुपये प्रति किलो तय की गई।
ये दालें NAFED, NCCF, केंद्रीय भंडार और सफल जैसे आउटलेट पर उपलब्ध कराई गईं। मौजूदा दाम और उपलब्धता के लिए नजदीकी आउटलेट से जानकारी लें।
राज्य स्तर का कोष
PSF में राज्यों के लिए भी प्रावधान है। राज्य अपना मूल्य स्थिरीकरण कोष बना सकते हैं, जिसमें केंद्र और राज्य का हिस्सा 50:50 होता है, जबकि पूर्वोत्तर राज्यों के लिए यह 75:25 है। PIB के अनुसार अब तक सात राज्यों ने इस सुविधा का लाभ लिया है।
38 चीजों के दाम पर नजर
PIB के अनुसार उपभोक्ता मामले विभाग का मूल्य निगरानी प्रभाग 38 खाद्य वस्तुओं के दाम पर रोज नजर रखता है। देश भर के 555 केंद्रों से मोबाइल ऐप के जरिए ये दाम जुटाए जाते हैं। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर बाजार में दखल, आयात निर्यात शुल्क और दूसरे फैसले लिए जाते हैं।
किसानों और उपभोक्ताओं पर असर
PSF के तहत फसल के समय खरीद होने से किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम मिलने में मदद मिलती है। वहीं कमी के समय बफर से माल उतरने पर उपभोक्ताओं को राहत मिलती है। PIB के अनुसार बफर स्टॉक जमाखोरी और सट्टेबाजी पर रोक का काम भी करता है।
PSF की शुरुआत कब हुई
2014-15 में, 500 करोड़ रुपये के शुरुआती कोष के साथ।
PSF अब कौन सा विभाग चलाता है
उपभोक्ता मामले विभाग।
2023-24 में प्याज बफर कितना था
7 लाख टन।
भारत दाल कहां मिलती है
NAFED, NCCF, केंद्रीय भंडार और सफल जैसे आउटलेट पर।
सलाह लें: ताजा मंडी भाव और सरकारी बिक्री की जानकारी के लिए अपनी नजदीकी मंडी समिति, राज्य के कृषि विपणन विभाग या उपभोक्ता मामले विभाग की वेबसाइट देखें।
स्रोत: PIB: Department of Consumer Affairs year end review 2024, Indian Economic Service Arthapedia: Price Stabilisation Fund, PIB: Bharat Dal launch





