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51 शक्तिपीठ क्या हैं: माता सती की कथा, कामाख्या से हिंगलाज तक प्रमुख पीठ और भारत के बाहर के शक्तिपीठ

देवी उपासना में शक्तिपीठों का खास महत्व है। जानिए इनसे जुड़ी कथा और प्रमुख स्थान।

पहाड़ी पर बने प्राचीन देवी मंदिर का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • हिंदू धर्म में देवी उपासना की परंपरा बहुत पुरानी है और इसमें शक्तिपीठों का विशेष स्थान है।
  • कोलकाता का कालीघाट मंदिर भी प्रमुख शक्तिपीठ माना जाता है। मान्यता है कि यहां सती के दाएं पैर की उंगलियां गिरी थीं।
  • चैत्र और शारदीय नवरात्रि में शक्तिपीठों पर भारी भीड़ होती है।
  • प्रचलित मान्यता में 51, हालांकि ग्रंथों में संख्या अलग अलग है।

हिंदू धर्म में देवी उपासना की परंपरा बहुत पुरानी है और इसमें शक्तिपीठों का विशेष स्थान है। शक्तिपीठ वे पवित्र स्थान माने जाते हैं, जहां पौराणिक कथा के अनुसार माता सती के शरीर के अंग, आभूषण या वस्त्र गिरे थे। आम तौर पर 51 शक्तिपीठों की बात होती है, हालांकि अलग अलग ग्रंथों में यह संख्या अलग बताई गई है। कुछ ग्रंथ 52 पीठों का जिक्र करते हैं और कुछ 108 का। इस लेख में जानिए शक्तिपीठों से जुड़ी कथा, कुछ प्रमुख शक्तिपीठ और उनसे जुड़ी मान्यताएं।

माता सती और दक्ष यज्ञ की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार माता सती प्रजापति दक्ष की पुत्री थीं और उनका विवाह भगवान शिव से हुआ था। दक्ष शिव को पसंद नहीं करते थे। एक बार दक्ष ने बड़ा यज्ञ किया, जिसमें सभी देवताओं को बुलाया, लेकिन शिव और सती को निमंत्रण नहीं दिया। सती बिना बुलाए पिता के यज्ञ में पहुंचीं, जहां शिव का अपमान हुआ। इस अपमान को सहन न कर पाने पर सती ने यज्ञ की अग्नि में अपने प्राण त्याग दिए।

मुख्य बातें: पहाड़ी पर बने प्राचीन देवी मंदिर का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

शिव का तांडव और सुदर्शन चक्र

सती के देह त्याग की खबर से शिव बहुत क्रोधित हुए। कथा के अनुसार उनके गण वीरभद्र ने दक्ष के यज्ञ का विनाश किया। इसके बाद शिव सती के शरीर को उठा कर ब्रह्मांड में घूमने लगे। सृष्टि को बचाने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के हिस्से किए। जहां जहां ये हिस्से गिरे, वे स्थान शक्तिपीठ कहलाए। मान्यता है कि हर शक्तिपीठ में देवी के साथ शिव भी भैरव रूप में विराजमान रहते हैं।

कामाख्या, असम

गुवाहाटी के नीलाचल पर्वत पर स्थित कामाख्या मंदिर सबसे प्रसिद्ध शक्तिपीठों में गिना जाता है। तंत्र साधना में इसका विशेष महत्व है। हर साल यहां अंबुबाची मेला लगता है, जिसमें देश भर से श्रद्धालु और साधु आते हैं।

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कालीघाट, कोलकाता

कोलकाता का कालीघाट मंदिर भी प्रमुख शक्तिपीठ माना जाता है। मान्यता है कि यहां सती के दाएं पैर की उंगलियां गिरी थीं। मां काली के इस मंदिर में साल भर भीड़ रहती है, खासकर काली पूजा के समय।

ज्वालामुखी, हिमाचल प्रदेश

कांगड़ा जिले में स्थित ज्वालामुखी मंदिर की खास बात यह है कि यहां कोई मूर्ति नहीं है। चट्टानों से निकलने वाली प्राकृतिक ज्योतियों को ही देवी का रूप मानकर पूजा जाता है। मान्यता है कि यहां सती की जीभ गिरी थी।

हिंगलाज, पाकिस्तान

बलूचिस्तान में स्थित हिंगलाज माता का मंदिर उन शक्तिपीठों में है जो आज भारत के बाहर हैं। हर साल वहां की हिंदू आबादी के लिए यहां की यात्रा बड़ा आयोजन होती है।

अन्य प्रमुख शक्तिपीठ

  • विशालाक्षी, वाराणसी।
  • अंबाजी, गुजरात।
  • नैना देवी, हिमाचल प्रदेश।
  • चिंतपूर्णी, हिमाचल प्रदेश।
  • महालक्ष्मी, कोल्हापुर, जिसे महाराष्ट्र की परंपरा में शक्तिपीठ माना जाता है।
  • गुह्येश्वरी, काठमांडू, नेपाल।
  • जशोरेश्वरी, बांग्लादेश।

किस स्थान को शक्तिपीठ माना जाए, इस पर अलग अलग परंपराओं में मतभेद है। कई स्थानों की पहचान को लेकर एक से ज्यादा दावे भी हैं।

शक्तिपीठ और नवरात्रि

चैत्र और शारदीय नवरात्रि में शक्तिपीठों पर भारी भीड़ होती है। कई श्रद्धालु जीवन में सभी प्रमुख शक्तिपीठों के दर्शन का संकल्प लेते हैं। हिमाचल प्रदेश में नैना देवी, चिंतपूर्णी, ज्वालामुखी, कांगड़ा की ब्रजेश्वरी और चामुंडा देवी की यात्रा को कई लोग एक साथ करते हैं।

यात्रा से पहले

पहाड़ी इलाकों वाले मंदिरों में मौसम देख कर यात्रा की योजना बनाएं। कई मंदिरों में त्योहार के समय दर्शन के लिए ऑनलाइन पंजीकरण या टोकन की व्यवस्था होती है, इसलिए मंदिर प्रबंधन की आधिकारिक वेबसाइट या जिला प्रशासन की जानकारी जरूर देखें।

शक्तिपीठ और भैरव

परंपरा के अनुसार हर शक्तिपीठ में देवी के एक नाम के साथ भैरव का भी एक नाम जुड़ा होता है। जैसे कई पीठों में देवी के दर्शन के बाद भैरव मंदिर के दर्शन को यात्रा पूरी होने के लिए जरूरी माना जाता है। तंत्र परंपरा में शक्तिपीठों को साधना के विशेष केंद्र माना गया है। तंत्र चूड़ामणि, देवी भागवत और कालिका पुराण जैसे ग्रंथों में शक्तिपीठों के नाम और संख्या का वर्णन अलग अलग रूप में मिलता है, इसलिए एक ही सूची पर सभी परंपराएं एकमत नहीं हैं।

श्रद्धालुओं के लिए नियम

मंदिरों में दर्शन के समय स्थानीय नियमों का पालन करें। कई मंदिरों में चमड़े का सामान, मोबाइल या कैमरा ले जाने पर रोक होती है। भीड़ वाले दिनों में बुजुर्गों और बच्चों का खास ध्यान रखें।

शक्तिपीठ कितने हैं

प्रचलित मान्यता में 51, हालांकि ग्रंथों में संख्या अलग अलग है।

शक्तिपीठ कैसे बने

माता सती के शरीर के अंग जहां गिरे, वहां शक्तिपीठ बने, ऐसी मान्यता है।

कौन से शक्तिपीठ भारत के बाहर हैं

हिंगलाज पाकिस्तान में, गुह्येश्वरी नेपाल में और कुछ पीठ बांग्लादेश में माने जाते हैं।

यह लेख धार्मिक मान्यताओं और लोक परंपराओं पर आधारित है। डेमोक्रेटिक भारत लाइव इनकी पुष्टि नहीं करता।

स्रोत: Assam Tourism: Kamakhya Temple, Himachal Tourism: Jwalamukhi, Wikipedia: Shakti Peetha

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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