ताज़ा खबर
अंटार्कटिक संधि: 1959 में 12 देशों का समझौता, बर्फीले महाद्वीप पर सेना और खनन पर रोक, मैड्रिड प्रोटोकॉल और भारत की भूमिका What Is BRICS? Members, New Development Bank and India’s Role as Chair in 2026 BREAKING: 4 नवंबर को चंडीगढ़ में बीजेपी का सिख सम्मेलन आयोजित प्रधानमंत्री वन धन योजना: आदिवासी समूहों को महुआ, इमली और शहद जैसी वन उपज से कमाई, वन धन विकास केंद्र और TRIFED की भूमिका BREAKING: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरदार पटेल कौशल योजना का शुभारंभ करेंगे Guru Nanak Jayanti: Significance of Gurpurab, Prabhat Pheri, Akhand Path and the Teachings of Guru Nanak पुराना सामान ऑनलाइन बेचने में फ्रॉड: दिवाली की सफाई के बाद बिक्री करते समय QR कोड और फर्जी खरीदार से बचें BREAKING: तमिलनाडु में सरकारी नौकरियों के लिए अधिकतम उम्र सीमा में पांच साल की छूट
ट्रेंडिंग
मनोरंजन

शैलेंद्र: रेलवे वर्कशॉप के कामगार से राज कपूर के चहेते गीतकार तक, आवारा हूं से सजन रे झूठ मत बोलो और तीसरी कसम का दर्द

सीधे शब्दों में गहरी बात कहने वाले शैलेंद्र के गीत आज भी आम आदमी की आवाज लगते हैं।

पुराने ग्रामोफोन और गीतों की डायरी का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार, आवारा हूं, मेरा जूता है जापानी, सजन रे झूठ मत बोलो और होठों पे सच्चाई रहती है।
  • एक मुशायरे में राज कपूर ने शैलेंद्र को अपनी कविता जलता है पंजाब पढ़ते सुना और उनसे अपनी फिल्म के लिए गीत लिखने को कहा।
  • शैलेंद्र ने एसडी बर्मन, सलिल चौधरी और दूसरे संगीतकारों के साथ भी यादगार गीत लिखे।
  • शैलेंद्र ने फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी मारे गए गुलफाम पर फिल्म बनाने का सपना देखा।

किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार, आवारा हूं, मेरा जूता है जापानी, सजन रे झूठ मत बोलो और होठों पे सच्चाई रहती है। ये गीत दशकों बाद भी उतने ही ताजा लगते हैं। इन्हें लिखने वाले शैलेंद्र हिंदी सिनेमा के उन गीतकारों में थे, जिन्होंने बहुत सरल शब्दों में जीवन की गहरी बातें कहीं। रेलवे वर्कशॉप में काम करने वाला यह कवि राज कपूर की टीम का अहम हिस्सा बना और फिर एक फिल्म के निर्माण ने उसे भीतर तक तोड़ दिया। इस लेख में जानिए शैलेंद्र के जीवन और गीतों की कहानी।

जन्म और संघर्ष

शैलेंद्र का असली नाम शंकरदास केसरीलाल था। उनका जन्म 30 अगस्त 1923 को रावलपिंडी में हुआ, जो अब पाकिस्तान में है। उनका परिवार मूल रूप से बिहार से जुड़ा था और बाद में उत्तर प्रदेश के मथुरा में रहा। आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई के बाद उन्होंने बंबई के माटुंगा में रेलवे वर्कशॉप में नौकरी की। काम के साथ वे कविताएं लिखते रहे और भारतीय जन नाट्य संघ यानी इप्टा से जुड़ गए। उनकी कविताओं में मजदूरों और आम आदमी के दुख दर्द की बात होती थी।

मुख्य बातें: पुराने ग्रामोफोन और गीतों की डायरी का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

राज कपूर से मुलाकात

एक मुशायरे में राज कपूर ने शैलेंद्र को अपनी कविता जलता है पंजाब पढ़ते सुना और उनसे अपनी फिल्म के लिए गीत लिखने को कहा। शैलेंद्र ने पहले मना कर दिया, क्योंकि वे अपनी कविता को फिल्मों के लिए बेचना नहीं चाहते थे। बाद में पैसों की जरूरत पड़ने पर वे राज कपूर के पास गए। 1949 की फिल्म बरसात के लिए उन्होंने गीत लिखे, जिनमें बरसात में हमसे मिले तुम सजन बहुत मशहूर हुआ।

शंकर जयकिशन और हसरत के साथ

इसके बाद शैलेंद्र राज कपूर की टीम का स्थायी हिस्सा बन गए। संगीतकार जोड़ी शंकर जयकिशन, गीतकार हसरत जयपुरी, गायक मुकेश और राज कपूर के साथ मिलकर उन्होंने आवारा, श्री 420, चोरी चोरी, अनाड़ी और जिस देश में गंगा बहती है जैसी फिल्मों के अमर गीत रचे। आवारा हूं और मेरा जूता है जापानी जैसे गीत भारत के बाहर, खासकर सोवियत संघ में भी बहुत लोकप्रिय हुए।

यह भी पढ़ें: Drishyam 3 Review: 2 अक्टूबर के बाद अब 23 जुलाई का राज, अजय देवगन और जयदीप अहलावत की दिमागी जंग ने बांधे रखा | काव्या मारन और अनिरुद्ध रविचंदर का शादी रिसेप्शन 21 नवंबर को चेन्नई में, तेलंगाना CMO ने दी जानकारी

दूसरे संगीतकारों के साथ

शैलेंद्र ने एसडी बर्मन, सलिल चौधरी और दूसरे संगीतकारों के साथ भी यादगार गीत लिखे। गाइड के गीत आज फिर जीने की तमन्ना है, पिया तोसे नैना लागे रे और वहां कौन है तेरा उन्हीं की कलम से निकले। मधुमती के सुहाना सफर और ये मौसम हसीं और दो बीघा जमीन के गीत भी उनके लिखे माने जाते हैं।

फिल्मफेयर पुरस्कार

शैलेंद्र को तीन बार सर्वश्रेष्ठ गीतकार का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला।

  • ये मेरा दीवानापन है, फिल्म यहूदी
  • सब कुछ सीखा हमने, फिल्म अनाड़ी
  • मैं गाऊं तुम सो जाओ, फिल्म ब्रह्मचारी, जो उनके निधन के बाद मिला

तीसरी कसम

शैलेंद्र ने फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी मारे गए गुलफाम पर फिल्म बनाने का सपना देखा। बासु भट्टाचार्य के निर्देशन में बनी तीसरी कसम में राज कपूर ने गाड़ीवान हीरामन और वहीदा रहमान ने नौटंकी कलाकार हीराबाई की भूमिका निभाई। सजन रे झूठ मत बोलो, दुनिया बनाने वाले और चलत मुसाफिर मोह लियो रे जैसे गीत इसी फिल्म के हैं। फिल्म बनने में कई साल लगे और इसमें शैलेंद्र की सारी जमा पूंजी लग गई। 1966 में रिलीज होने पर यह व्यावसायिक रूप से नहीं चली।

निधन और सम्मान

फिल्म की असफलता, कर्ज और मानसिक तनाव ने शैलेंद्र की सेहत पर बुरा असर डाला। 14 दिसंबर 1966 को केवल 43 साल की उम्र में मुंबई में उनका निधन हो गया। संयोग से उसी दिन राज कपूर का जन्मदिन था। बाद में तीसरी कसम को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला और आज इसे हिंदी सिनेमा की क्लासिक फिल्मों में गिना जाता है।

शैलेंद्र के कुछ यादगार गीत

  • आवारा हूं, फिल्म आवारा
  • मेरा जूता है जापानी, फिल्म श्री 420
  • प्यार हुआ इकरार हुआ, फिल्म श्री 420
  • किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार, फिल्म अनाड़ी
  • होठों पे सच्चाई रहती है, फिल्म जिस देश में गंगा बहती है
  • आज फिर जीने की तमन्ना है, फिल्म गाइड
  • सुहाना सफर और ये मौसम हसीं, फिल्म मधुमती
  • सजन रे झूठ मत बोलो, फिल्म तीसरी कसम

लेखन की खासियत

शैलेंद्र के गीतों की सबसे बड़ी ताकत उनकी सादगी थी। वे भारी भरकम शब्दों के बजाय रोजमर्रा की बोलचाल की भाषा में लिखते थे, लेकिन उन शब्दों में जीवन का दर्शन छिपा होता था। उनके गीतों में मेहनतकश लोगों का दर्द, प्रेम की कोमलता और व्यवस्था पर व्यंग्य, तीनों दिखते हैं। कई गीतकारों और कवियों ने उन्हें हिंदी फिल्मी गीतों का सबसे बड़ा जनकवि कहा है।

शैलेंद्र का असली नाम क्या था

शंकरदास केसरीलाल।

शैलेंद्र की पहली फिल्म कौन सी थी

राज कपूर की बरसात, 1949।

तीसरी कसम किसकी कहानी पर बनी

फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी मारे गए गुलफाम पर।

शैलेंद्र को कितने फिल्मफेयर मिले

सर्वश्रेष्ठ गीतकार के तीन।

स्रोत: Directorate of Film Festivals: National Film Awards, Filmfare Awards, Prasar Bharati Archives

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

अपनी राय लिखें

WhatsApp Facebook X