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राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार कैसे मिलते हैं: कौन चुनता है, स्वर्ण कमल और रजत कमल का फर्क, दादासाहेब फाल्के सम्मान की कहानी

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार को भारतीय सिनेमा का सबसे प्रतिष्ठित सरकारी सम्मान माना जाता है। जानिए इसकी शुरुआत, चयन प्रक्रिया और प्रमुख श्रेणियों के बारे में।

फिल्म पुरस्कार और ट्रॉफी का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • भारत में हर साल हजारों फिल्में बनती हैं और इनके लिए कई निजी पुरस्कार समारोह भी होते हैं।
  • जूरी में फिल्मकार, अभिनेता, समीक्षक, तकनीशियन और कला जगत से जुड़े विशेषज्ञ होते हैं।
  • फिल्मों पर लिखी गई सर्वश्रेष्ठ किताब और सर्वश्रेष्ठ फिल्म समीक्षक के लिए पुरस्कार दिए जाते हैं।
  • राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने से किसी फिल्म, खासकर छोटे बजट या क्षेत्रीय भाषा की फिल्म, को नई पहचान मिलती है।

भारत में हर साल हजारों फिल्में बनती हैं और इनके लिए कई निजी पुरस्कार समारोह भी होते हैं। लेकिन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार की जगह सबसे अलग है, क्योंकि ये भारत सरकार की ओर से दिए जाते हैं और इनका फैसला लोकप्रियता या कमाई से नहीं, बल्कि विशेषज्ञ जूरी के मूल्यांकन से होता है। विजेताओं को ये पुरस्कार राष्ट्रपति के हाथों मिलते हैं, इसलिए फिल्मी दुनिया में इन्हें सबसे बड़ा सम्मान माना जाता है। गोवा में होने वाले IFFI के मौसम में भारतीय सिनेमा के इन सम्मानों को समझना दिलचस्प है।

कब शुरू हुए

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की शुरुआत 1954 में हुई थी। पहले इन्हें स्टेट अवॉर्ड्स फॉर फिल्म्स कहा जाता था। शुरुआती दौर में सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार मराठी फिल्म श्यामची आई को मिला था। समय के साथ श्रेणियों की संख्या बढ़ती गई और आज इनमें फिल्म निर्माण के लगभग हर पहलू को शामिल किया गया है।

मुख्य बातें: फिल्म पुरस्कार और ट्रॉफी का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

कौन आयोजित करता है

पुरस्कार सूचना और प्रसारण मंत्रालय देता है। लंबे समय तक इनका आयोजन फिल्म समारोह निदेशालय करता था। मंत्रालय के फिल्म मीडिया इकाइयों के पुनर्गठन के बाद यह जिम्मेदारी राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम यानी NFDC को सौंपी गई। हर साल पुरस्कारों के लिए प्रविष्टियां मांगी जाती हैं और एक तय अवधि में सेंसर प्रमाणपत्र पाने वाली फिल्में ही इसमें भाग ले सकती हैं।

चयन कैसे होता है

  1. निर्माता अपनी फिल्म की प्रविष्टि तय शुल्क और दस्तावेजों के साथ भेजते हैं
  2. फीचर फिल्म, गैर-फीचर फिल्म और सिनेमा पर लेखन, तीनों के लिए अलग-अलग जूरी बनाई जाती है
  3. फीचर फिल्मों की संख्या ज्यादा होने के कारण पहले क्षेत्रीय पैनल फिल्में देखकर छंटनी करते हैं
  4. केंद्रीय जूरी चुनी गई फिल्में देखती है और अंतिम विजेताओं का फैसला करती है
  5. जूरी की सिफारिशें मंत्रालय को सौंपी जाती हैं और फिर विजेताओं की घोषणा होती है

जूरी में फिल्मकार, अभिनेता, समीक्षक, तकनीशियन और कला जगत से जुड़े विशेषज्ञ होते हैं। जूरी का फैसला अंतिम माना जाता है।

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प्रमुख श्रेणियां

फीचर फिल्म

इसमें सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म, सर्वश्रेष्ठ निर्देशन, सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री, सहायक कलाकार, बाल कलाकार, संगीत, गीत, पटकथा, छायांकन, संपादन जैसी श्रेणियां हैं। इसके अलावा मनोरंजन प्रदान करने वाली सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय फिल्म, किसी निर्देशक की पहली फिल्म और सामाजिक मुद्दों पर बनी फिल्मों के लिए भी पुरस्कार हैं।

क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्में

संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल भाषाओं में बनी सर्वश्रेष्ठ फिल्मों के लिए अलग पुरस्कार दिए जाते हैं। इससे हिंदी के अलावा दूसरी भाषाओं के सिनेमा को भी राष्ट्रीय पहचान मिलती है।

गैर-फीचर फिल्म

डॉक्यूमेंट्री, लघु फिल्म, एनीमेशन और शैक्षिक फिल्मों को इस श्रेणी में सम्मान मिलता है।

सिनेमा पर लेखन

फिल्मों पर लिखी गई सर्वश्रेष्ठ किताब और सर्वश्रेष्ठ फिल्म समीक्षक के लिए पुरस्कार दिए जाते हैं।

स्वर्ण कमल और रजत कमल

पुरस्कारों को दो स्तरों में बांटा जाता है। सबसे प्रतिष्ठित श्रेणियों, जैसे सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म और सर्वश्रेष्ठ निर्देशन, में स्वर्ण कमल दिया जाता है। बाकी ज्यादातर श्रेणियों में रजत कमल मिलता है। दोनों के साथ प्रमाणपत्र और नकद राशि दी जाती है। हाल के वर्षों में पुरस्कार श्रेणियों और राशि में कुछ बदलाव भी किए गए हैं।

दादासाहेब फाल्के पुरस्कार

भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान दादासाहेब फाल्के पुरस्कार है, जो सिनेमा में आजीवन योगदान के लिए दिया जाता है। इसकी शुरुआत 1969 में हुई, यानी भारतीय सिनेमा के पितामह कहे जाने वाले दादासाहेब फाल्के के जन्म शताब्दी वर्ष में। फाल्के ने 1913 में भारत की पहली पूर्ण लंबाई की फीचर फिल्म राजा हरिश्चंद्र बनाई थी। पहला फाल्के पुरस्कार अभिनेत्री देविका रानी को मिला था। इसके बाद पृथ्वीराज कपूर, सत्यजीत रे, लता मंगेशकर, राज कपूर, अमिताभ बच्चन जैसे कई दिग्गजों को यह सम्मान मिल चुका है। इस पुरस्कार में स्वर्ण कमल, शॉल और नकद राशि दी जाती है।

पुरस्कार पाने का फायदा

राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने से किसी फिल्म, खासकर छोटे बजट या क्षेत्रीय भाषा की फिल्म, को नई पहचान मिलती है। ऐसी फिल्मों को दूरदर्शन और OTT मंचों पर जगह मिलने की संभावना बढ़ती है और कलाकारों व तकनीशियनों को आगे काम मिलने में मदद मिलती है। कई कलाकारों ने माना है कि राष्ट्रीय पुरस्कार ने उनके करियर की दिशा बदल दी।

विवाद भी होते रहे हैं

हर साल पुरस्कारों की घोषणा के बाद कुछ फैसलों पर सवाल उठते हैं। कभी किसी लोकप्रिय फिल्म को नजरअंदाज करने की बात होती है, तो कभी जूरी के चयन पर बहस होती है। फिर भी राष्ट्रीय पुरस्कार को आज भी कलात्मक और तकनीकी उत्कृष्टता का सबसे भरोसेमंद पैमाना माना जाता है।

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार कौन देता है

ये पुरस्कार भारत सरकार का सूचना और प्रसारण मंत्रालय देता है और विजेताओं को राष्ट्रपति सम्मानित करते हैं।

पहला दादासाहेब फाल्के पुरस्कार किसे मिला

1969 में पहला दादासाहेब फाल्के पुरस्कार अभिनेत्री देविका रानी को दिया गया था।

स्रोत: सूचना और प्रसारण मंत्रालय, राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (NFDC)

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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