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राष्ट्रीय दल का दर्जा कैसे मिलता है: चुनाव आयोग की तीन शर्तें, 6% वोट, 4 लोकसभा सीट और दर्जा मिलने के फायदे

हर बड़े चुनाव के बाद चर्चा होती है कि किस पार्टी का राष्ट्रीय दल का दर्जा बचा और किसका गया। जानिए इसका नियम।

चुनाव में मतदान और राजनीतिक दलों का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • भारत में हजारों राजनीतिक दल चुनाव आयोग में पंजीकृत हैं, लेकिन इनमें से बहुत कम दलों को राष्ट्रीय दल का दर्जा मिला है।
  • किसी दल को राष्ट्रीय दल का दर्जा पाने के लिए इनमें से कोई एक शर्त पूरी करनी होती है:
  • चुनाव आयोग समय समय पर दलों के प्रदर्शन की समीक्षा करता है। अगर कोई दल लगातार चुनावों में तय शर्तें पूरी नहीं कर पाता, तो उसका राष्ट्रीय या राज्य दल का दर्जा वापस लिया जा सकता है।
  • राष्ट्रीय दल का दर्जा होना जरूरी नहीं कि पार्टी हर राज्य में मजबूत हो।

भारत में हजारों राजनीतिक दल चुनाव आयोग में पंजीकृत हैं, लेकिन इनमें से बहुत कम दलों को राष्ट्रीय दल का दर्जा मिला है। यह दर्जा सिर्फ नाम के लिए नहीं होता, बल्कि इसके साथ कई अहम सुविधाएं जुड़ी हैं, जैसे पूरे देश में एक ही चुनाव चिह्न। यह दर्जा भारत का चुनाव आयोग चुनाव चिह्न आरक्षण और आवंटन आदेश 1968 के तहत देता है। यह लेख एक व्याख्या है, जिसमें बताया गया है कि राष्ट्रीय दल बनने की शर्तें क्या हैं, राज्य दल कैसे बनते हैं और दर्जा कब छिन सकता है।

पंजीकृत, राज्य और राष्ट्रीय दल

चुनाव आयोग राजनीतिक दलों को तीन श्रेणियों में देखता है। पहला, पंजीकृत लेकिन गैर मान्यता प्राप्त दल, जिनकी संख्या सबसे ज्यादा है। दूसरा, राज्य स्तरीय मान्यता प्राप्त दल, जिन्हें आम बोलचाल में क्षेत्रीय दल भी कहते हैं। तीसरा, राष्ट्रीय दल। पंजीकरण जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 29A के तहत होता है, जबकि मान्यता चुनावी प्रदर्शन के आधार पर 1968 के आदेश से मिलती है।

मुख्य बातें: चुनाव में मतदान और राजनीतिक दलों का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

राष्ट्रीय दल की तीन शर्तें

किसी दल को राष्ट्रीय दल का दर्जा पाने के लिए इनमें से कोई एक शर्त पूरी करनी होती है:

  • लोकसभा की कुल सीटों में से कम से कम 2 प्रतिशत सीटें जीते और ये सदस्य कम से कम तीन अलग अलग राज्यों से चुने गए हों। 543 सीटों वाली लोकसभा में यह संख्या 11 सीट बनती है।
  • लोकसभा या विधानसभा चुनाव में कम से कम चार राज्यों में कुल वैध वोटों का कम से कम 6 प्रतिशत हासिल करे और साथ ही लोकसभा में कम से कम 4 सीटें जीते।
  • कम से कम चार राज्यों में राज्य स्तरीय दल के रूप में मान्यता हो।

राज्य दल की शर्तें

किसी राज्य में राज्य स्तरीय दल की मान्यता पाने के लिए भी शर्तें तय हैं। इनमें विधानसभा चुनाव में 6 प्रतिशत वोट के साथ 2 सीटें जीतना, लोकसभा चुनाव में उस राज्य में 6 प्रतिशत वोट के साथ 1 सीट जीतना, विधानसभा की कुल सीटों का 3 प्रतिशत या कम से कम 3 सीटें जीतना, राज्य की हर 25 लोकसभा सीटों में से 1 सीट जीतना, या उस राज्य में कुल वैध वोटों का 8 प्रतिशत हासिल करना शामिल है। इनमें से किसी एक शर्त को पूरा करना काफी है।

यह भी पढ़ें: लोकसभा चुनाव कैसे होता है: 543 सीटें, 272 का बहुमत, नामांकन से मतगणना और सरकार गठन तक पूरी प्रक्रिया | भारत में कानून कैसे बनता है: विधेयक के तीन वाचन, संयुक्त बैठक, धन विधेयक और राष्ट्रपति की मंजूरी

दर्जा मिलने के फायदे

  • पूरे देश में पार्टी का चुनाव चिह्न आरक्षित रहता है, कोई दूसरा उम्मीदवार उसे इस्तेमाल नहीं कर सकता।
  • नामांकन के समय पार्टी उम्मीदवार को सिर्फ एक प्रस्तावक की जरूरत होती है।
  • चुनाव के दौरान सरकारी प्रसारकों दूरदर्शन और आकाशवाणी पर प्रसारण का समय मिलता है।
  • पार्टी 40 तक स्टार प्रचारक घोषित कर सकती है, जिनका यात्रा खर्च उम्मीदवार के खर्च में नहीं जुड़ता। गैर मान्यता प्राप्त दलों के लिए यह संख्या 20 है।
  • चुनाव से पहले मतदाता सूची की मुफ्त प्रतियां मिलती हैं।
  • राजधानी दिल्ली में पार्टी कार्यालय के लिए सरकारी जमीन या भवन मिलने का रास्ता खुलता है।

दर्जा कब छिनता है

चुनाव आयोग समय समय पर दलों के प्रदर्शन की समीक्षा करता है। अगर कोई दल लगातार चुनावों में तय शर्तें पूरी नहीं कर पाता, तो उसका राष्ट्रीय या राज्य दल का दर्जा वापस लिया जा सकता है। 2016 में आयोग ने नियम में बदलाव करके यह व्यवस्था की कि मान्यता की समीक्षा हर पांच साल के बजाय दो लगातार चुनावों के आधार पर होगी। इससे दलों को एक खराब चुनाव के बाद तुरंत दर्जा खोने से राहत मिली।

हाल के बदलाव

अप्रैल 2023 में चुनाव आयोग ने आम आदमी पार्टी को राष्ट्रीय दल का दर्जा दिया था। उसी आदेश में तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का राष्ट्रीय दल का दर्जा वापस लिया गया था। राष्ट्रीय दलों की ताजा सूची चुनाव आयोग की वेबसाइट पर देखी जा सकती है।

राष्ट्रीय दल और राष्ट्रीय पहुंच

राष्ट्रीय दल का दर्जा होना जरूरी नहीं कि पार्टी हर राज्य में मजबूत हो। कई बार किसी राज्य दल की लोकसभा में ज्यादा सीटें होती हैं, फिर भी उसके पास राष्ट्रीय दल का दर्जा नहीं होता, क्योंकि उसका आधार एक या दो राज्यों तक सीमित रहता है। यह दर्जा कई राज्यों में फैले प्रदर्शन को मापने का पैमाना है।

क्षेत्रीय दलों की बढ़ती भूमिका

1990 के दशक के बाद से गठबंधन सरकारों के दौर में क्षेत्रीय दलों की भूमिका केंद्र की राजनीति में काफी बढ़ी है। कई बार राज्य दल केंद्र सरकार बनाने में निर्णायक रहे हैं। इसी वजह से कई दल अपनी पहुंच दूसरे राज्यों तक बढ़ा कर राष्ट्रीय दल बनने की कोशिश करते हैं। दूसरे राज्यों में चुनाव लड़ना और वहां 6 प्रतिशत वोट जुटाना इसका सबसे आम रास्ता है।

राष्ट्रीय दल का दर्जा कौन देता है

भारत का चुनाव आयोग।

किस नियम के तहत दर्जा मिलता है

चुनाव चिह्न आरक्षण और आवंटन आदेश 1968।

राष्ट्रीय दल का सबसे बड़ा फायदा क्या है

पूरे देश में आरक्षित चुनाव चिह्न।

स्रोत: ECI: Political parties and symbols, ECI: Election Symbols (Reservation and Allotment) Order, 1968, Wikipedia: List of political parties in India

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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