राजस्थान में पंचायत चुनाव के तीसरे चरण के तहत मंगलवार को 27 जिलों में मतदान की प्रक्रिया संपन्न होगी। इस चरण में एक करोड़ छह लाख से अधिक मतदाता कुल 9094 उम्मीदवारों के राजनीतिक भविष्य का फैसला करेंगे। चुनाव के लिए राज्य भर में 11,869 मतदान केंद्र स्थापित किए गए हैं ताकि सुचारू रूप से मतदान कराया जा सके। इस चुनाव में जिला परिषद और पंचायत समिति के कुल 2496 वार्डों के लिए वोट डाले जाएंगे।

27 जिलों में चुनावी प्रक्रिया का व्यापक विस्तार
राजस्थान में पंचायतीराज व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आयोजित किए जा रहे इन चुनावों का तीसरा चरण अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस चरण में राज्य के 27 जिलों को शामिल किया गया है, जहां ग्रामीण सरकार के गठन के लिए मतदान होना है। प्रशासन ने इस व्यापक लोकतांत्रिक प्रक्रिया को संपन्न कराने के लिए 11,869 मतदान केंद्रों की स्थापना की है। इन केंद्रों पर सुरक्षा और पारदर्शिता के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि मतदाता बिना किसी डर के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें। इस चरण में कुल एक करोड़ छह लाख एकासी हजार पांच सौ सड़सठ मतदाता पंजीकृत हैं, जो अपने स्थानीय प्रतिनिधियों का चुनाव करेंगे। यह संख्या ग्रामीण क्षेत्रों में राजनीतिक जागरूकता और भागीदारी के स्तर को दर्शाती है।
उम्मीदवारों और वार्डों का सांख्यिकीय विवरण
तीसरे चरण के चुनावी आंकड़ों पर नजर डालें तो मुकाबला काफी सघन नजर आता है। कुल 2496 वार्डों के लिए 9094 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इसे दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है: जिला परिषद और पंचायत समिति। जिला परिषद के 377 वार्डों के लिए 1305 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिसका अर्थ है कि प्रत्येक वार्ड पर औसतन साढ़े तीन प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं, पंचायत समितियों के स्तर पर मुकाबला और भी बड़ा है। यहां 2119 वार्डों के लिए 7789 उम्मीदवारों के बीच प्रतिस्पर्धा है। उम्मीदवारों की यह बड़ी संख्या इस बात का संकेत है कि स्थानीय स्तर पर नेतृत्व के लिए उत्साह बहुत अधिक है। अधिकांश सीटों पर मुकाबला केवल दो मुख्य दलों के बीच न रहकर त्रिकोणीय या चतुष्कोणीय होने की संभावना है, जिससे मतों का विभाजन जीत-हार के समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
विधानसभा क्षेत्रों पर चुनाव का राजनीतिक प्रभाव
यह पंचायत चुनाव केवल स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर राज्य की मुख्यधारा की राजनीति पर भी पड़ने वाला है। इस चरण में शामिल 27 जिलों के भीतर 41 से अधिक विधानसभा क्षेत्र आते हैं। इन क्षेत्रों में वर्तमान विधायकों के प्रभाव की भी कड़ी परीक्षा होगी। आंकड़ों के अनुसार, इन 41 सीटों में से लगभग 26 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी के विधायक काबिज हैं, जबकि शेष 15 सीटें कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दलों या निर्दलीयों के पास हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों के नतीजे संबंधित विधायकों की लोकप्रियता और उनके द्वारा किए गए कार्यों के प्रति जनता के रुख को स्पष्ट करेंगे। राजनीतिक दलों के लिए यह चुनाव अपनी जमीनी पकड़ को मजबूत करने और आगामी चुनौतियों के लिए संगठन को सक्रिय करने का एक बड़ा अवसर है।
भरतपुर और दौसा में चुनावी मुकाबले की स्थिति
तीसरे चरण में कुछ जिलों पर विशेष नजर रहेगी, जिनमें मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का गृह जिला भरतपुर प्रमुख है। भरतपुर में मुकाबला काफी कड़ा है, जहां जिला परिषद के 19 वार्डों के लिए 91 उम्मीदवार मैदान में उतरे हैं। वहीं, पंचायत समिति के स्तर पर भरतपुर के 98 वार्डों में 696 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। दूसरी ओर, दौसा और हनुमानगढ़ जिलों में जिला परिषद के वार्डों की संख्या सबसे अधिक है, जहां प्रत्येक में 24-24 वार्डों के लिए चुनाव हो रहे हैं। दौसा में पंचायत समिति के 142 वार्डों के लिए 474 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि इन विशिष्ट जिलों में राजनीतिक सक्रियता अपने चरम पर है और स्थानीय समीकरण उम्मीदवारों की सफलता में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
मतदान केंद्रों की व्यवस्था और मतदाता भागीदारी
चुनाव आयोग ने मतदान को सुव्यवस्थित करने के लिए व्यापक प्रबंध किए हैं। 11,869 मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की सुविधा के लिए आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं। एक करोड़ छह लाख से अधिक मतदाताओं की भागीदारी इस चुनाव को भव्य बनाती है। 27 जिला परिषदों के 377 वार्डों और 116 पंचायत समितियों के 2119 वार्डों में होने वाला यह मतदान ग्रामीण विकास की दिशा तय करेगा। स्थानीय स्तर पर मतदाताओं की प्राथमिकताएं और उम्मीदवारों द्वारा किए गए वादे इस चुनाव के मुख्य केंद्र बिंदु हैं। मतदान के बाद इन 9094 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला मतपेटियों में बंद हो जाएगा, जिसके नतीजे राज्य की राजनीति में स्थानीय नेतृत्व की नई तस्वीर पेश करेंगे।
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स्रोत: Amar Ujala





