मध्य अमेरिका का छोटा सा देश पनामा दुनिया के व्यापार के नक्शे पर बहुत बड़ा महत्व रखता है। इसकी वजह है पनामा नहर, जो अटलांटिक महासागर को प्रशांत महासागर से जोड़ती है। इस नहर के बनने से पहले न्यूयॉर्क से सैन फ्रांसिस्को जाने वाले जहाजों को दक्षिण अमेरिका के आखिरी छोर केप हॉर्न का चक्कर लगाना पड़ता था, जिसमें हजारों किलोमीटर का अतिरिक्त सफर होता था। आज दुनिया के समुद्री व्यापार का अच्छा खासा हिस्सा इस नहर से गुजरता है। इस लेख में जानिए पनामा नहर का इतिहास, यह कैसे काम करती है और आज इसके सामने क्या चुनौतियां हैं।
फ्रांस की पहली कोशिश
स्वेज नहर बनवाने वाले फ्रांसीसी इंजीनियर फर्डिनेंड डी लेसेप्स ने 1881 में पनामा में नहर बनाने का काम शुरू किया। उस समय पनामा कोलंबिया का हिस्सा था। लेसेप्स समुद्र के स्तर वाली नहर बनाना चाहते थे, जैसी स्वेज में बनी थी। लेकिन पनामा के पहाड़, भारी बारिश, भूस्खलन और मलेरिया व पीत ज्वर जैसी बीमारियों ने काम को बेहद मुश्किल बना दिया। हजारों मजदूरों की मौत हो गई और कंपनी दिवालिया हो गई। 1889 में यह कोशिश नाकाम हो गई।

अमेरिका का प्रवेश
अमेरिका एक ऐसी नहर चाहता था जिससे उसके पूर्वी और पश्चिमी तटों के बीच जहाजों की आवाजाही आसान हो। कोलंबिया के साथ बातचीत नाकाम होने के बाद 1903 में अमेरिका के समर्थन से पनामा ने कोलंबिया से आजादी की घोषणा की। इसके तुरंत बाद नए देश पनामा ने अमेरिका के साथ संधि की, जिसमें अमेरिका को नहर बनाने और नहर क्षेत्र पर नियंत्रण का अधिकार मिला।
नहर का निर्माण
1904 में अमेरिका ने काम शुरू किया। इस बार सबसे पहले बीमारियों पर ध्यान दिया गया। डॉक्टर विलियम गोर्गस की अगुवाई में मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म किया गया, जिससे पीत ज्वर पर काबू पाया गया और मलेरिया भी घटा। इंजीनियर जॉन स्टीवंस और बाद में जॉर्ज गोएथल्स ने तय किया कि समुद्र के स्तर की जगह लॉक वाली नहर बनाई जाए। 15 अगस्त 1914 को नहर औपचारिक रूप से खुल गई। उस समय यह दुनिया की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग परियोजनाओं में से एक थी।
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लॉक प्रणाली कैसे काम करती है
पनामा नहर की लंबाई करीब 82 किलोमीटर है। इसके बीच में चाग्रेस नदी पर बांध बनाकर गाटुन झील बनाई गई, जो समुद्र तल से करीब 26 मीटर ऊपर है। जहाजों को इस ऊंचाई तक उठाने और फिर नीचे लाने के लिए लॉक बनाए गए हैं। लॉक पानी से भरे बड़े कक्ष होते हैं। जहाज एक कक्ष में आता है, फाटक बंद होते हैं और पानी भरकर जहाज को ऊपर उठाया जाता है। फिर अगला फाटक खुलता है। इस प्रणाली में पानी गुरुत्वाकर्षण से बहता है, कोई पंप नहीं लगता। एक जहाज के गुजरने में झील का भारी मात्रा में मीठा पानी समुद्र में चला जाता है।
पनामा को नियंत्रण
नहर क्षेत्र पर अमेरिका का नियंत्रण पनामा के लोगों के बीच लंबे समय तक नाराजगी का कारण रहा। 1964 में इसे लेकर हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए। 1977 में अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर और पनामा के नेता उमर तोरीहोस के बीच दो संधियों पर हस्ताक्षर हुए, जिन्हें तोरीहोस कार्टर संधियां कहा जाता है। इनके तहत 31 दिसंबर 1999 को नहर का पूरा नियंत्रण पनामा को सौंप दिया गया। अब इसका संचालन पनामा नहर प्राधिकरण करता है।
2016 का विस्तार
समय के साथ जहाज बहुत बड़े हो गए और पुराने लॉक उनके लिए छोटे पड़ने लगे। इसलिए पनामा ने नए और बड़े लॉक बनाने की परियोजना शुरू की, जो 2016 में पूरी हुई। इन नए लॉक से नियो पनामैक्स कहे जाने वाले बड़े जहाज गुजर सकते हैं, जिनमें कहीं ज्यादा कंटेनर और तरलीकृत प्राकृतिक गैस यानी LNG ले जाई जाती है। नए लॉक में पानी बचाने के लिए अलग बेसिन बनाए गए हैं, जो इस्तेमाल हुए पानी का कुछ हिस्सा दोबारा इस्तेमाल करते हैं।
सूखे का संकट
पनामा नहर बारिश के पानी पर निर्भर है, क्योंकि गाटुन झील का पानी ही लॉक चलाता है। 2023 में अल नीनो के असर से पनामा में बहुत कम बारिश हुई और झील का स्तर गिर गया। इसके कारण नहर प्राधिकरण को रोज गुजरने वाले जहाजों की संख्या और उनकी अधिकतम गहराई पर पाबंदियां लगानी पड़ीं। कई जहाजों को हफ्तों इंतजार करना पड़ा या दूसरे रास्ते अपनाने पड़े। बाद में बारिश सुधरने पर पाबंदियां धीरे धीरे हटाई गईं। पनामा अब नए जलाशय बनाने की योजना पर काम कर रहा है।
भारत के लिए महत्व
भारत के ज्यादातर व्यापारिक जहाज स्वेज नहर से यूरोप और अमेरिका के पूर्वी तट तक जाते हैं। लेकिन अमेरिका के पूर्वी तट और एशिया के बीच का व्यापार, जिसमें कई सामान भारत तक भी पहुंचते हैं, पनामा नहर पर निर्भर है। नहर में रुकावट से माल ढुलाई की लागत और समय बढ़ता है, जिसका असर पूरी दुनिया की सप्लाई चेन पर पड़ता है।
पनामा नहर कब खुली
15 अगस्त 1914 को।
पनामा नहर कितनी लंबी है
करीब 82 किलोमीटर।
पनामा को नहर का नियंत्रण कब मिला
31 दिसंबर 1999 को।
नहर के लॉक किस पानी से चलते हैं
गाटुन झील के मीठे पानी से।
स्रोत: Panama Canal Authority, UNCTAD: Review of Maritime Transport, US Office of the Historian: Panama Canal





